बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और बेतिया सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर निशाना साधा है। मोतिहारी में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे डॉ. जायसवाल ने मीडिया से बातचीत में तेजस्वी यादव पर बिहार की जनता से दूरी बनाने का आरोप लगाया। डॉ. जायसवाल ने कहा कि जब भी बिहार को तेजस्वी यादव की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, वे राज्य छोड़कर बाहर चले जाते हैं। उन्होंने इसे तेजस्वी की पुरानी कार्यशैली बताया। 2017 की भीषण बाढ़ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय लाखों लोग प्रभावित थे, लेकिन तेजस्वी यादव दिल्ली में रहकर राजनीति कर रहे थे। ‘खानदानी पार्टियों’ में जनसेवा की भावना नहीं होती
उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान भी तेजस्वी यादव पर बिहार से दूर रहने का आरोप लगाया। डॉ. जायसवाल के अनुसार, जब राज्य की जनता मुश्किल दौर से गुजर रही थी, तब वे लगभग दस महीने तक बिहार नहीं आए। चुनाव समाप्त होते ही वे विदेश भ्रमण पर निकल गए, जिसकी जानकारी भी जनता को नहीं दी गई। डॉ. जायसवाल ने आरोप लगाया कि इन ‘खानदानी पार्टियों’ में जनसेवा की भावना नहीं होती। वे केवल चुनाव के समय जनता के बीच जाते हैं और वोट लेकर सत्ता की राजनीति करते हैं। सेवा का समय आने पर ये नेता गायब हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अब इन बातों को अच्छी तरह समझ चुकी है। सुरक्षा का निर्धारण खतरे के आकलन पर आधारित
तेजस्वी यादव की सुरक्षा घटाए जाने के सवाल पर डॉ. संजय जायसवाल ने इसे राजनीतिक मुद्दा मानने से इनकार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा बढ़ाने या घटाने का निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय लेता है और इसमें कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होता। डॉ. जायसवाल ने अपना उदाहरण देते हुए बताया कि उन्हें भी वाई-प्लस सुरक्षा मिली थी, जिसे बाद में घटा दिया गया, लेकिन उन्होंने इसे कभी मुद्दा नहीं बनाया। सांसद ने कहा कि सुरक्षा का निर्धारण पूरी तरह से खतरे के आकलन पर आधारित होता है और इसमें किसी को अनावश्यक राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बीजेपी विकास, सुशासन और जनता की सेवा के मुद्दे पर राजनीति करती है, जबकि विपक्ष केवल आरोप-प्रत्यारोप में लगा रहता है। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और बेतिया सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर निशाना साधा है। मोतिहारी में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे डॉ. जायसवाल ने मीडिया से बातचीत में तेजस्वी यादव पर बिहार की जनता से दूरी बनाने का आरोप लगाया। डॉ. जायसवाल ने कहा कि जब भी बिहार को तेजस्वी यादव की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, वे राज्य छोड़कर बाहर चले जाते हैं। उन्होंने इसे तेजस्वी की पुरानी कार्यशैली बताया। 2017 की भीषण बाढ़ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय लाखों लोग प्रभावित थे, लेकिन तेजस्वी यादव दिल्ली में रहकर राजनीति कर रहे थे। ‘खानदानी पार्टियों’ में जनसेवा की भावना नहीं होती
उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान भी तेजस्वी यादव पर बिहार से दूर रहने का आरोप लगाया। डॉ. जायसवाल के अनुसार, जब राज्य की जनता मुश्किल दौर से गुजर रही थी, तब वे लगभग दस महीने तक बिहार नहीं आए। चुनाव समाप्त होते ही वे विदेश भ्रमण पर निकल गए, जिसकी जानकारी भी जनता को नहीं दी गई। डॉ. जायसवाल ने आरोप लगाया कि इन ‘खानदानी पार्टियों’ में जनसेवा की भावना नहीं होती। वे केवल चुनाव के समय जनता के बीच जाते हैं और वोट लेकर सत्ता की राजनीति करते हैं। सेवा का समय आने पर ये नेता गायब हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अब इन बातों को अच्छी तरह समझ चुकी है। सुरक्षा का निर्धारण खतरे के आकलन पर आधारित
तेजस्वी यादव की सुरक्षा घटाए जाने के सवाल पर डॉ. संजय जायसवाल ने इसे राजनीतिक मुद्दा मानने से इनकार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा बढ़ाने या घटाने का निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय लेता है और इसमें कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होता। डॉ. जायसवाल ने अपना उदाहरण देते हुए बताया कि उन्हें भी वाई-प्लस सुरक्षा मिली थी, जिसे बाद में घटा दिया गया, लेकिन उन्होंने इसे कभी मुद्दा नहीं बनाया। सांसद ने कहा कि सुरक्षा का निर्धारण पूरी तरह से खतरे के आकलन पर आधारित होता है और इसमें किसी को अनावश्यक राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बीजेपी विकास, सुशासन और जनता की सेवा के मुद्दे पर राजनीति करती है, जबकि विपक्ष केवल आरोप-प्रत्यारोप में लगा रहता है।


