सहरसा नगर निगम के सफाईकर्मी शुक्रवार से दो दिवसीय सांकेतिक हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल के पहले दिन ही शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में कचरे का अंबार लग गया है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस हड़ताल से नगर निगम की स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है। सफाई कर्मियों का आरोप है कि उन्हें नियमित रूप से वेतन नहीं दिया जा रहा है और न ही उनके मासिक मानदेय में वृद्धि की जा रही है। मासिक मानदेय बढ़ाकर 18 हजार रुपये किया जाए उनकी मुख्य मांगों में हर महीने की 5 तारीख तक वेतन का भुगतान सुनिश्चित करना और मासिक मानदेय बढ़ाकर 18 हजार रुपये करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, पिछले दो वर्षों से लंबित ईपीएफ की राशि का भी तत्काल भुगतान करने की मांग की गई है। शुक्रवार को सफाई कर्मियों ने नगर निगम परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने नगर आयुक्त और महापौर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जिला अध्यक्ष ने कहा, आश्वासन मिले समाधान नहीं सफाई कर्मी संघ के सहरसा जिला अध्यक्ष रामचंद्र मल्लिक ने आरोप लगाया कि नगर निगम प्रशासन उनके साथ लगातार सौतेला व्यवहार कर रहा है। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मियों से आठ घंटे की ड्यूटी ली जाती है, लेकिन उन्हें समय पर मजदूरी और वेतन का भुगतान नहीं किया जाता। मल्लिक ने यह भी बताया कि बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद उनकी समस्याओं का आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ है। संघ के सचिव अमर कुमार मल्लिक ने बताया कि पिछले दो वर्षों से ईपीएफ की राशि नहीं मिली है। इस मुद्दे पर कई बार आंदोलन किए गए और लिखित-मौखिक आश्वासन भी मिले, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सहरसा नगर निगम में वेतन सबसे कम उन्होंने यह भी बताया कि बिहार के अन्य नगर निगमों में सफाई कर्मियों को 20 से 21 हजार रुपये तक वेतन दिया जा रहा है, जबकि सहरसा नगर निगम में वेतन सबसे कम है। सफाई कर्मी जितेंद्र कुमार ने बताया कि वर्तमान में उन्हें मात्र 9 हजार रुपये वेतन मिलता है, वह भी समय पर नहीं। करीब 45 सफाई कर्मियों को पिछले तीन महीनों से वेतन तक नहीं मिला है, जिससे उनके परिवार के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। सफाई कर्मियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यह हड़ताल शनिवार तक सांकेतिक रहेगी। इसके बाद भी अगर नगर निगम प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में तब्दील कर दिया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में शहर की सफाई व्यवस्था और अधिक चरमराने की आशंका है। सहरसा नगर निगम के सफाईकर्मी शुक्रवार से दो दिवसीय सांकेतिक हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल के पहले दिन ही शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में कचरे का अंबार लग गया है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस हड़ताल से नगर निगम की स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है। सफाई कर्मियों का आरोप है कि उन्हें नियमित रूप से वेतन नहीं दिया जा रहा है और न ही उनके मासिक मानदेय में वृद्धि की जा रही है। मासिक मानदेय बढ़ाकर 18 हजार रुपये किया जाए उनकी मुख्य मांगों में हर महीने की 5 तारीख तक वेतन का भुगतान सुनिश्चित करना और मासिक मानदेय बढ़ाकर 18 हजार रुपये करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, पिछले दो वर्षों से लंबित ईपीएफ की राशि का भी तत्काल भुगतान करने की मांग की गई है। शुक्रवार को सफाई कर्मियों ने नगर निगम परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने नगर आयुक्त और महापौर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जिला अध्यक्ष ने कहा, आश्वासन मिले समाधान नहीं सफाई कर्मी संघ के सहरसा जिला अध्यक्ष रामचंद्र मल्लिक ने आरोप लगाया कि नगर निगम प्रशासन उनके साथ लगातार सौतेला व्यवहार कर रहा है। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मियों से आठ घंटे की ड्यूटी ली जाती है, लेकिन उन्हें समय पर मजदूरी और वेतन का भुगतान नहीं किया जाता। मल्लिक ने यह भी बताया कि बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद उनकी समस्याओं का आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ है। संघ के सचिव अमर कुमार मल्लिक ने बताया कि पिछले दो वर्षों से ईपीएफ की राशि नहीं मिली है। इस मुद्दे पर कई बार आंदोलन किए गए और लिखित-मौखिक आश्वासन भी मिले, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सहरसा नगर निगम में वेतन सबसे कम उन्होंने यह भी बताया कि बिहार के अन्य नगर निगमों में सफाई कर्मियों को 20 से 21 हजार रुपये तक वेतन दिया जा रहा है, जबकि सहरसा नगर निगम में वेतन सबसे कम है। सफाई कर्मी जितेंद्र कुमार ने बताया कि वर्तमान में उन्हें मात्र 9 हजार रुपये वेतन मिलता है, वह भी समय पर नहीं। करीब 45 सफाई कर्मियों को पिछले तीन महीनों से वेतन तक नहीं मिला है, जिससे उनके परिवार के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। सफाई कर्मियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यह हड़ताल शनिवार तक सांकेतिक रहेगी। इसके बाद भी अगर नगर निगम प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में तब्दील कर दिया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में शहर की सफाई व्यवस्था और अधिक चरमराने की आशंका है।


