‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना के तहत सैंड स्टोन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। उद्योग विभाग और राजसीको के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में स्थानीय मध्यम, लघु एवं सूक्ष्म इकाइयों और कारीगरों को डिजिटल रूप से मजबूत बनाकर उन्हें देश-विदेश के बाजार से जोड़ने की ट्रेनिंग दी गई। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक मेघराज मीणा और जिला उद्योग अधिकारी राज राजेश्वर गौड़ ने प्रतिभागियों को ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना के अवसरों के बारे में बताया और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। ट्रेनिंग के दौरान आईसीईएस की टीम के रिपुदमन स्वामी और विकास जैन ने डिजिटल मार्केटिंग, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उत्पाद बेचने, एसएसओ आईडी और उद्यम पंजीकरण जैसी जरूरी जानकारियां सरल तरीके बताए। लोकल उत्पादों को बढावा देने की योजना
एक जिला-एक उत्पाद योजना केन्द्र और राज्य सरकारों की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य हर जिले के पारंपरिक या विशेष उत्पाद को पहचान देकर उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है। इसके तहत हर जिले का एक खास उत्पाद जैसे- हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद, खाद्य पदार्थ, या खनिज आधारित उत्पाद का चयन किया जाता है, जिसमें उस क्षेत्र की विशेषता और परंपरा झलकती है। मेक इन इंडिया को प्रोत्साहन
इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को ब्रांड पहचान देना, कारीगरों और उद्यमियों को रोजगार के अवसर प्रदान करना, उत्पादों की क्वालिटी, पैकेजिंग और मार्केटिंग में सुधार
निर्यात को बढ़ावा देना, वोकल फॉर लोकल और मेक इन इंडिया को मजबूत करना है। यह योजना स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्योगों को आत्मनिर्भर बनाती है और पारंपरिक कला को खत्म होने से बचाती है। साथ ही, यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाती है।


