वसंत नवरात्रि के साथ कल से शुरू होगा सनातन नववर्ष:डोली पर आ रही है भगवती, बेगूसराय में आचार्य बोले- ये शुभकारक है

वसंत नवरात्रि के साथ कल से शुरू होगा सनातन नववर्ष:डोली पर आ रही है भगवती, बेगूसराय में आचार्य बोले- ये शुभकारक है

वसंत नवरात्रि और हिंदू नववर्ष की शुरुआत कल से हो रही है। संवत 2083 (2026-2027) का नाम रौद्र संवत्सर है। यह हिंदू नव वर्ष 19 मार्च चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होगा। बेगूसराय में आचार्य अविनाश शास्त्री ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस साल गुरु (बृहस्पति) राजा और मंगल मंत्री पद संभालेंगे। रौद्र का संबंध तीव्र या उग्र प्रवृत्तियों से है, जो सामाजिक और प्राकृतिक बदलावों का संकेत हो सकता है। ज्येष्ठ माह में अधिक मास (मलमास) होने के कारण यह साल 13 महीने का होगा। 19 मार्च गुरुवार को वसंत नवरात्रि का आरंभ कलश स्थापना के साथ होगा। देवी का आगमन डोली पर हो रहा है। डोली पर आगमन होना शुभकारक है, यह आम जनमानस के साथ साथ देश के किसी प्रतिष्ठित सम्मानित व्यक्ति के मृत्यु का कारक है। उन्होंने बताया कि 19 मार्च गुरुवार को सुबह 6 बजकर 51 मिनट तक अमावस्या रहेगा और उसके बाद प्रतिपदा प्रवेश करेगी। जो गुरुवार की रात शेष तक रहेगी। कलश स्थापना का शुभ समय सुबह 6 बजकर 51 मिनट के बाद पूरे दिन रहेगा। गुरुवार को कलश स्थापना के बाद 24 मार्च को विलवाभिमंत्रण और गजपूजा होगा। 25 मार्च को निशापूजा, देवी जागरण और नवपत्रिका प्रवेश और 26 मार्च को महाष्टमी, 27 मार्च को रामनवमी, हनुमत ध्वजारोहण, महानवमी व्रत, हवन और श्रीसीताराम दर्शन होगा। 28 मार्च को विजयादशमी, नवरात्रि व्रत पारण, जयंती धारण व दीक्षा ग्रहण होगा। चैती छठ पर्व का आयोजन होगा इस दौरान चैती छठ पर्व का आयोजन होगा। जिसके लिए 22 मार्च रविवार को नहाय खाय, 23 मार्च सोमवार को खरना, 24 मार्च मंगलवार को सूर्य षष्ठी व्रत एवं संध्या कालीन अर्घ्य और 25 मार्च बुधवार को प्रातःकालीन अर्घ्य के साथ चैती छठ का पारण होना है। उन्होंने कहा कि नववर्ष प्रतिपदा उल्लास, उत्साह, उमंग, खुशी और चारों ओर पुष्पों की सुगंध से भरी होती है। फसल पकने यानी किसान की मेहनत का फल मिलने का भी यही समय होता है। खगोलीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण दिवस होता है। ब्रह्मपुराण पर आधारित ग्रंथ ‘कथा कल्पतरु’ में कहा गया है कि चैत्र माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम दिन सूर्योदय के समय ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना आरम्भ की और उसी दिन से संवत् की गणना आरम्भ हुई। सब पापों को नष्ट करने वाली महाशांति उसी दिन सूर्योदय के साथ आती है। नव संवत्सर के काल में अपने भीतर के सौभाग्य को, अपनी पात्रता को विकसित करना चाहते हैं, उनके लिए नियम और पूजा-विधानों के अतिरिक्त कुछ आंतरिक आधार भी जरूरी हैं। जिनका हृदय तपस्या की रश्मि से ओत-प्रोत है, अंतःकरण में ईश्वर या मिलन की अभिप्शा है। उनके लिए चैत्र संवत्सर एक नवीन जीवन का प्रारंभ होता है। उल्लास और ऊर्जा के सकारात्मक परिवर्तन का संकेत लेकर आ रहे नववर्ष के पहले दिन से ‘सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते’ का पवित्र और तेजस युक्त मंत्रोच्चार लगातार नौ दिन तक घर से लेकर देवालय तक गूंजता रहेगा। वसंत नवरात्रि और हिंदू नववर्ष की शुरुआत कल से हो रही है। संवत 2083 (2026-2027) का नाम रौद्र संवत्सर है। यह हिंदू नव वर्ष 19 मार्च चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होगा। बेगूसराय में आचार्य अविनाश शास्त्री ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस साल गुरु (बृहस्पति) राजा और मंगल मंत्री पद संभालेंगे। रौद्र का संबंध तीव्र या उग्र प्रवृत्तियों से है, जो सामाजिक और प्राकृतिक बदलावों का संकेत हो सकता है। ज्येष्ठ माह में अधिक मास (मलमास) होने के कारण यह साल 13 महीने का होगा। 19 मार्च गुरुवार को वसंत नवरात्रि का आरंभ कलश स्थापना के साथ होगा। देवी का आगमन डोली पर हो रहा है। डोली पर आगमन होना शुभकारक है, यह आम जनमानस के साथ साथ देश के किसी प्रतिष्ठित सम्मानित व्यक्ति के मृत्यु का कारक है। उन्होंने बताया कि 19 मार्च गुरुवार को सुबह 6 बजकर 51 मिनट तक अमावस्या रहेगा और उसके बाद प्रतिपदा प्रवेश करेगी। जो गुरुवार की रात शेष तक रहेगी। कलश स्थापना का शुभ समय सुबह 6 बजकर 51 मिनट के बाद पूरे दिन रहेगा। गुरुवार को कलश स्थापना के बाद 24 मार्च को विलवाभिमंत्रण और गजपूजा होगा। 25 मार्च को निशापूजा, देवी जागरण और नवपत्रिका प्रवेश और 26 मार्च को महाष्टमी, 27 मार्च को रामनवमी, हनुमत ध्वजारोहण, महानवमी व्रत, हवन और श्रीसीताराम दर्शन होगा। 28 मार्च को विजयादशमी, नवरात्रि व्रत पारण, जयंती धारण व दीक्षा ग्रहण होगा। चैती छठ पर्व का आयोजन होगा इस दौरान चैती छठ पर्व का आयोजन होगा। जिसके लिए 22 मार्च रविवार को नहाय खाय, 23 मार्च सोमवार को खरना, 24 मार्च मंगलवार को सूर्य षष्ठी व्रत एवं संध्या कालीन अर्घ्य और 25 मार्च बुधवार को प्रातःकालीन अर्घ्य के साथ चैती छठ का पारण होना है। उन्होंने कहा कि नववर्ष प्रतिपदा उल्लास, उत्साह, उमंग, खुशी और चारों ओर पुष्पों की सुगंध से भरी होती है। फसल पकने यानी किसान की मेहनत का फल मिलने का भी यही समय होता है। खगोलीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण दिवस होता है। ब्रह्मपुराण पर आधारित ग्रंथ ‘कथा कल्पतरु’ में कहा गया है कि चैत्र माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम दिन सूर्योदय के समय ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना आरम्भ की और उसी दिन से संवत् की गणना आरम्भ हुई। सब पापों को नष्ट करने वाली महाशांति उसी दिन सूर्योदय के साथ आती है। नव संवत्सर के काल में अपने भीतर के सौभाग्य को, अपनी पात्रता को विकसित करना चाहते हैं, उनके लिए नियम और पूजा-विधानों के अतिरिक्त कुछ आंतरिक आधार भी जरूरी हैं। जिनका हृदय तपस्या की रश्मि से ओत-प्रोत है, अंतःकरण में ईश्वर या मिलन की अभिप्शा है। उनके लिए चैत्र संवत्सर एक नवीन जीवन का प्रारंभ होता है। उल्लास और ऊर्जा के सकारात्मक परिवर्तन का संकेत लेकर आ रहे नववर्ष के पहले दिन से ‘सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते’ का पवित्र और तेजस युक्त मंत्रोच्चार लगातार नौ दिन तक घर से लेकर देवालय तक गूंजता रहेगा।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *