पटना विश्वविद्यालय में AISA की समता चौपाल:JNUSU अध्यक्ष अदिति ने शिक्षा नीति, UGC गाइडलाइंस और लोकतांत्रिक ढांचे पर उठाए सवाल

पटना विश्वविद्यालय में AISA की समता चौपाल:JNUSU अध्यक्ष अदिति ने शिक्षा नीति, UGC गाइडलाइंस और लोकतांत्रिक ढांचे पर उठाए सवाल

पटना विश्वविद्यालय के पटना कॉलेज स्थित हिंदी विभाग में आज AISA की ओर से ‘समता चौपाल’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम में छात्र आंदोलन से जुड़े मौजूदा मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान शिक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाया गया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता JNUSU अध्यक्ष कॉमरेड अदिति ने अपने संबोधन में छात्र राजनीति की वर्तमान परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के समय में संगठित छात्र आंदोलन की जरूरत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित लोकतांत्रिक और प्रगतिशील शिक्षा मॉडल पर लगातार हमले हो रहे हैं। छात्र संघों को कमजोर करने और लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने की कोशिशें तेज हो गई हैं, जिसका संगठित विरोध जरूरी है। शिक्षा के निजीकरण और फीस वृद्धि पर तीखा विरोध अदिति ने अपने भाषण में शिक्षा के निजीकरण, लगातार बढ़ती फीस, आरक्षण व्यवस्था पर हो रहे हमलों और विश्वविद्यालयों की लोकतांत्रिक संरचना को कमजोर करने के प्रयासों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने ‘रोहित एक्ट’ के आधार पर मजबूत UGC गाइडलाइंस लागू करने की मांग की और ट्रांस समुदाय के खिलाफ लाए गए ट्रांस बिल का विरोध करते हुए इसे दमनकारी बताया। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन को मौजूदा राजनीतिक माहौल में और अधिक एकजुट और संगठित होने की आवश्यकता है, ताकि शिक्षा के अधिकार, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जा सके। छात्रों के साथ संवाद में उठे अहम मुद्दे कार्यक्रम के बाद अदिति ने इकबाल और नदवी हॉस्टल के छात्रों के साथ संवाद किया। इस दौरान छात्रों ने वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, छात्र आंदोलन की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साम्राज्यवादी ताकतों—खासकर अमेरिका और इज़राइल—की नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने की जरूरत पर चर्चा की।
छात्रों ने उठाई कई मांगें
समता चौपाल के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों को मजबूती से उठाया। इनमें UGC रेगुलेशन को लागू करने, 65 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने, नई शिक्षा नीति 2020 और वीबीएसए बिल को वापस लेने, फीस वृद्धि पर रोक लगाने तथा पटना विश्वविद्यालय में सशक्त जेंडर सेल (GSCASH) के गठन की मांग प्रमुख रही। पटना विश्वविद्यालय के पटना कॉलेज स्थित हिंदी विभाग में आज AISA की ओर से ‘समता चौपाल’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम में छात्र आंदोलन से जुड़े मौजूदा मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान शिक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाया गया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता JNUSU अध्यक्ष कॉमरेड अदिति ने अपने संबोधन में छात्र राजनीति की वर्तमान परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के समय में संगठित छात्र आंदोलन की जरूरत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित लोकतांत्रिक और प्रगतिशील शिक्षा मॉडल पर लगातार हमले हो रहे हैं। छात्र संघों को कमजोर करने और लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने की कोशिशें तेज हो गई हैं, जिसका संगठित विरोध जरूरी है। शिक्षा के निजीकरण और फीस वृद्धि पर तीखा विरोध अदिति ने अपने भाषण में शिक्षा के निजीकरण, लगातार बढ़ती फीस, आरक्षण व्यवस्था पर हो रहे हमलों और विश्वविद्यालयों की लोकतांत्रिक संरचना को कमजोर करने के प्रयासों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने ‘रोहित एक्ट’ के आधार पर मजबूत UGC गाइडलाइंस लागू करने की मांग की और ट्रांस समुदाय के खिलाफ लाए गए ट्रांस बिल का विरोध करते हुए इसे दमनकारी बताया। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन को मौजूदा राजनीतिक माहौल में और अधिक एकजुट और संगठित होने की आवश्यकता है, ताकि शिक्षा के अधिकार, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जा सके। छात्रों के साथ संवाद में उठे अहम मुद्दे कार्यक्रम के बाद अदिति ने इकबाल और नदवी हॉस्टल के छात्रों के साथ संवाद किया। इस दौरान छात्रों ने वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, छात्र आंदोलन की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साम्राज्यवादी ताकतों—खासकर अमेरिका और इज़राइल—की नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने की जरूरत पर चर्चा की।
छात्रों ने उठाई कई मांगें
समता चौपाल के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों को मजबूती से उठाया। इनमें UGC रेगुलेशन को लागू करने, 65 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने, नई शिक्षा नीति 2020 और वीबीएसए बिल को वापस लेने, फीस वृद्धि पर रोक लगाने तथा पटना विश्वविद्यालय में सशक्त जेंडर सेल (GSCASH) के गठन की मांग प्रमुख रही।  

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