Sameer Rizvi Struggle Story: 6 साल की उम्र में ‘अंडा बॉल’ पर छक्का लगाने से लेकर, दिल्ली कैपिटल्स को IPL मैच जितने तक, आसान नहीं था समीर रिजवी का सफर

Sameer Rizvi Struggle Story: 6 साल की उम्र में ‘अंडा बॉल’ पर छक्का लगाने से लेकर, दिल्ली कैपिटल्स को IPL मैच जितने तक, आसान नहीं था समीर रिजवी का सफर

समीर का सफर आसान नहीं रहा। 2024 की नीलामी में CSK ने उन्हें 8.4 करोड़ में खरीदा था, लेकिन पांच पारियों में उन्हें कभी नंबर पांच से ऊपर बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला। फिर CSK ने उन्हें रिलीज कर दिया। 

Sameer Rizvi’s journey, Delhi Capitals, IPL 2026: मेरठ के गांधीबाग में कैंट क्रिकेट अकादमी चलाने वाले तनकीब अख्तर को आज भी वो दिन याद है जब छह साल के एक बच्चे ने चार रुपये वाली प्लास्टिक की अंडा बॉल को इस कदर टाइमिंग से मारा था कि देखने वाले दंग रह गए। वो बच्चा कोई और नहीं दिल्ली कैपिटल्स (DC) के विस्फोटक बल्लेबाज समीर रिजवी थे।

ऑलराउंडर बनने का सपना लेकर तनकीब खुद बारागांव गांव से मेरठ शहर आए थे। लेकिन जब तक वो शहर पहुंचे, वक्त निकल चुका था। फिर उन्होंने अपने भांजे समीर में वो संभावना देखी जो उनकी अपनी किस्मत में नहीं लिखी थी। तनकीब ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “उसकी फील्डिंग देखकर मैं हैरान था। छह साल की उम्र में उसे बॉल का इतना अच्छा अंदाजा था। मारने का हौसला भी था। चमड़े की गेंद नहीं खेलते थे, क्योंकि वो छोटा था, लेकिन अंडा बॉल पर उसका टाइमिंग कमाल का था।” हालांकि यह दांव आसान नहीं था। समीर के पिता हसीन प्रॉपर्टी ब्रोकर हैं, वे डरते थे कि बेटा भी मामू की तरह क्रिकेट में उलझकर रह जाएगा।

लखनऊ में चमका सितारा

चार बच्चों में सबसे छोटे समीर का आईपीएल सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। लेकिन बुधवार को लखनऊ में जो हुआ, वो उनके करियर का एक यादगार पल बन गया। दिल्ली कैपिटल्स 26 के स्कोर पर चार विकेट गंवा चुकी थी। 142 रनों का पीछा करते हुए टीम मुश्किल में थी। तभी इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर उतरे समीर ने 47 गेंदों में नाबाद 70 रन ठोक दिए। ट्रिस्टन स्टब्स के साथ पांचवें विकेट के लिए 119 रनों की नाबाद साझेदारी की और दिल्ली को जीत दिला दी।

तनकीब बड़े ध्यान से यह पारी देख रहे थे। उन्हें जो बात सबसे ज्यादा भाई वो थी समीर का शांत स्वभाव, खास कर जब दूसरे छोर से एक के बाद एक विकेट गिर रहे थे। तनकीब ने कहा, “उसका आत्मविश्वास वापस आया है, और यही सबसे जरूरी है। समीर की ताकत है छक्के मारना, लेकिन पहले वो दबाव में रहता था क्योंकि उसे यकीन नहीं होता था कि अगला मौका मिलेगा या नहीं। जब टीम उसे खुलकर खेलने की आजादी दे, तभी वो असली समीर दिखता है। मुझे लगता है इस बार दिल्ली ने उसे वो भरोसा दिया है।”

CSK ने छोड़ा, दिल्ली ने संवारा

समीर का सफर आसान नहीं रहा। 2024 की नीलामी में CSK ने उन्हें 8.4 करोड़ में खरीदा था, लेकिन पांच पारियों में उन्हें कभी नंबर पांच से ऊपर बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला। फिर CSK ने उन्हें रिलीज कर दिया। पिछले साल दिल्ली ने 95 लाख में खरीदा। पंजाब किंग्स के खिलाफ उनकी नाबाद 58 रनों की पारी तब आई जब मैच का कोई मतलब नहीं बचा था।

लेकिन इस बार दिल्ली के कोचों ने उन्हें साफ बोल दिया। समीर ने बताया, “कोचों ने कहा कि तुम नंबर चार पर खेलोगे, हम तुम्हारे साथ हैं। अपना स्वाभाविक खेल खेलो।” पिच आसान नहीं थी। सीम और स्विंग दोनों मिल रहे थे। समीर को पहला रन लेने में आठ गेंदें लग गईं। लेकिन एक शॉट ने सब बदल दिया। अनरिच नॉर्टजे की तेज गेंद पर उन्होंने रैंप शॉट खेला और गेंद फाइन थर्डमैन के ऊपर से छक्के के लिए चली गई। समीर ने कहा, “उस बाउंड्री के बाद मुझे भरोसा आ गया।”

समीर और स्टब्स ने बातचीत करके तय किया कि जल्दबाजी नहीं करनी है। शाहबाज अहमद की लेफ्ट-आर्म स्पिन पर तीन चौके मारकर दवाब कम किया, और फिर ऐडन मार्क्रम की गेंदों पर छक्का-चौका लगाकर अर्धशतक पूरा किया।

ऊपरी क्रम ही असली पहचान

तनकीब चाहते हैं कि समीर नंबर चार पर ही खेलें। वो सौरव गांगुली का हवाला देते हैं जिन्होंने कहा था कि किसी बल्लेबाज की असली काबिलियत तभी दिखती है जब उसे ऊपरी क्रम में मौका मिले। धोनी को विशाखापट्टनम में नंबर तीन पर 148 रन बनाने का मौका मिला था, तब जाकर दुनिया को पता चला था। CSK में समीर को छह-सात नंबर पर भेजा जाता था, जहां क्लास नहीं, किस्मत चलती है।

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