जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ में सेना के जवान सीताराम राय शहीद हो गए। शहीद जवान सीताराम राय मोरवा के लोदीपुर गावं के रहने वाले थे। बुधवार की सुबह पत्नी सुमन राय से ड्यूटी पर जाने के दौरान वीडियो कॉल कर बात हुई थी। बताया था कि वह ड्यूटी पर जा रहे हैं। उसके बाद सुबह 11 बजे के करीब पत्नी को आर्मी यूनिट से फोन आया कि उनके पैर में चोट लग गई है। कुछ देर बाद परिजन के मोबाइल पर शहीद हो जाने की सूचना आई। वर्ष 2002 में उनकी बहाली इंडियन आर्मी में सिपाही के पद पर हुई थी। तब से कई सर्च ऑपरेशन में शामिल हुए। गांव में होगा अंतिम संस्कार परिवार के लोगों का कहना है कि पार्थिव शरीर गुरुवार रात तक समस्तीपुर आ सकता है। जिसके बाद गांव में उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा। शहादत की खबर मिलते ही पंचायत में शोक की लहर छा गई। पत्नी सुमन राय, पिता सूरज राय, माता महारानी देवी, भाई शिवानंद राय रो-रोकर बुरा हाल है। अपने पीछे दो पुत्र और एक पुत्री श्रुति छोड़ गए हैं। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ में सेना के जवान सीताराम राय शहीद हो गए। शहीद जवान सीताराम राय मोरवा के लोदीपुर गावं के रहने वाले थे। बुधवार की सुबह पत्नी सुमन राय से ड्यूटी पर जाने के दौरान वीडियो कॉल कर बात हुई थी। बताया था कि वह ड्यूटी पर जा रहे हैं। उसके बाद सुबह 11 बजे के करीब पत्नी को आर्मी यूनिट से फोन आया कि उनके पैर में चोट लग गई है। कुछ देर बाद परिजन के मोबाइल पर शहीद हो जाने की सूचना आई। वर्ष 2002 में उनकी बहाली इंडियन आर्मी में सिपाही के पद पर हुई थी। तब से कई सर्च ऑपरेशन में शामिल हुए। गांव में होगा अंतिम संस्कार परिवार के लोगों का कहना है कि पार्थिव शरीर गुरुवार रात तक समस्तीपुर आ सकता है। जिसके बाद गांव में उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा। शहादत की खबर मिलते ही पंचायत में शोक की लहर छा गई। पत्नी सुमन राय, पिता सूरज राय, माता महारानी देवी, भाई शिवानंद राय रो-रोकर बुरा हाल है। अपने पीछे दो पुत्र और एक पुत्री श्रुति छोड़ गए हैं।


