समस्तीपुर की डॉक्टर ने वाराणसी में लिया इंसुलिन का ओवरडोज:खुद को 100 अधिक इंजेक्शन लगाए, एक सप्ताह से ICU में भर्ती, डिप्रेशन में सुसाइड की कोशिश

समस्तीपुर की डॉक्टर ने वाराणसी में लिया इंसुलिन का ओवरडोज:खुद को 100 अधिक इंजेक्शन लगाए, एक सप्ताह से ICU में भर्ती, डिप्रेशन में सुसाइड की कोशिश

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा‎विज्ञान संस्थान (आईएमएस) में सर्जरी‎ विभाग की एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ने आत्महत्या की कोशिश की है। जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर सत्या समस्तीपुर की रहने वाली है। जो पीजी की छात्रा है। डिप्रेशन में सत्या ने पिछले गुरुवार को इंसुलिन का ओवरडोज ले लिया था। डॉक्टर ने खुद को 100 से अधिक इंसुलिन के इंजेक्शन लगाए। सत्या को एसएसबी के छठे तल पर स्थित आईसीयू के बेड नंबर 30 पर भर्ती करवाया गया है। इंसुलिन के ओवरडोज का असर मल्टीआर्गन पर पड़ा है। सबसे अधिक किडनी पर असर पड़ा है। पिछले शुक्रवार की देर शाम उसकी डायलिसिस भी हुई। हालांकि घटना के बाद से ही वह बेहोश पड़ी हैं, उसके इलाज में लगे डॉक्टर उसके होश में आने का इंतजार कर रहे हैं। आईएमएस बीएचयू के मेडिसिन विभाग, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी के साथ ही क्रिटिकल केयर से जुड़े डॉक्टरों की टीम नजर बनाए हुए हैं। सत्या के पिता समीर कुमार उर्फ चमन जी ने कहा कि, मुझे वाराणसी से फोन आया, मैं तुरंत वहां गया। घटना 12 मार्च की है, उस दिन शाम में बेटी ने अपने भाई से बात की थी। उसने कहा था कि अभी ड्यूटि से आई हूं। थोड़ा आराम करने के बाद तुमसे बात करूंगी। रात 12 बजे मुझे घटना की जानकारी दी गई।मैं वहां गया तो डॉक्टरों की टीम थी और बेटी आईसीयू में भर्ती थी। उसकी स्थिति अभी ठीक नहीं है। उसने साथ क्या हुआ मुझे पता नहीं। जांच के लिए समिति बनाई गई है आईएमएस निदेशक प्रो. एसएन संखवार‎ ने तत्काल तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच‎ समिति बनाई है। समिति प्रशासनिक, ‎विभागीय और सुरक्षा के सभी पहलुओं की‎ गहन समीक्षा करेगी और सात दिनों के अंदर रिपोर्ट सौंपेगी। समिति की अध्यक्षता‎ चिकित्सा संकाय के डीन को सौंपी गई है, ‎जबकि इसमें सर्जरी विभाग की प्रो. सीमा‎खन्ना और डिप्टी चीफ प्रॉक्टर को शामिल‎ किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया ‎है कि परिसर में किसी भी प्रकार का उत्पीड़न‎ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के‎ खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।‎

सीनियर रेजिडेंट्स पर मानसिक‎ प्रताड़ना के आरोप
घटना के पीछे विभागीय तनाव और‎ मानसिक उत्पीड़न की बात सामने‎ आ रही है। छात्रा ने निदेशक को लिखे पत्र में सर्जरी ‎विभाग के 2 सीनियर रेजिडेंट‎ डॉक्टरों डॉ. राहुल राज और डॉ. ‎उत्सव गांगली पर आरोप ‎लगाए हैं। आरोप है कि दोनों डॉक्टर ‎लगातार उसे अपमानित करते हुए ‎पेशेवर रूप से अक्षम बताते थे। ‎उसके आत्मविश्वास को तोड़ने का‎ प्रयास करते थे। परिजनों और ‎सहकर्मियों का कहना है कि छात्रा ने‎ कई बार इस उत्पीड़न की शिकायत‎ की थी और वह मानसिक रूप से ‎बेहद परेशान थी। छात्रा के माता-पिता वाराणसी में ही हैं। अस्पताल प्रशासन से लगातार‎ संपर्क में हैं।
क्रिटिकल केयर की टीम निगरानी कर रही है निदेशक प्रो. एसएन ‎संखवार ने बताया, ‘‎मेडिसिन, न्यूरोलॉजी,‎ नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी और‎ क्रिटिकल केयर की टीम छात्रा की‎ निगरानी कर रही है। कहा कि गठित ‎जांच समिति न केवल पूरे मामले‎ की तह तक जाएगी, बल्कि भविष्य ‎में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति‎ रोकने के लिए ठोस सुझाव भी देगी।’
जानिए पूरा मामला वाराणसी में सत्या घाट के पास किराए के मकान में रहती हैं। उनकी दोस्त के मुताबिक, रात में उन्होंने कई कॉल किए, लेकिन सत्या ने फोन नहीं उठाया। इसके बाद सत्या के पिता को फोन किया। पिता से पता लेकर मैं कमरे पर पहुंची। दरवाजा अंदर से बंद था। काफी देर तक खटखटाने के बावजूद दरवाजा नहीं खुला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी। कुछ देर में पुलिस पहुंची और आवाज लगाई, लेकिन दरवाजा नहीं खुला। इसके बाद दरवाजा तोड़ा दिया। अंदर सत्या बेसुध हालत में पड़ी थीं। फिलहाल उन्हें बीएचयू के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के ICU में भर्ती किया गया है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा‎विज्ञान संस्थान (आईएमएस) में सर्जरी‎ विभाग की एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ने आत्महत्या की कोशिश की है। जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर सत्या समस्तीपुर की रहने वाली है। जो पीजी की छात्रा है। डिप्रेशन में सत्या ने पिछले गुरुवार को इंसुलिन का ओवरडोज ले लिया था। डॉक्टर ने खुद को 100 से अधिक इंसुलिन के इंजेक्शन लगाए। सत्या को एसएसबी के छठे तल पर स्थित आईसीयू के बेड नंबर 30 पर भर्ती करवाया गया है। इंसुलिन के ओवरडोज का असर मल्टीआर्गन पर पड़ा है। सबसे अधिक किडनी पर असर पड़ा है। पिछले शुक्रवार की देर शाम उसकी डायलिसिस भी हुई। हालांकि घटना के बाद से ही वह बेहोश पड़ी हैं, उसके इलाज में लगे डॉक्टर उसके होश में आने का इंतजार कर रहे हैं। आईएमएस बीएचयू के मेडिसिन विभाग, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी के साथ ही क्रिटिकल केयर से जुड़े डॉक्टरों की टीम नजर बनाए हुए हैं। सत्या के पिता समीर कुमार उर्फ चमन जी ने कहा कि, मुझे वाराणसी से फोन आया, मैं तुरंत वहां गया। घटना 12 मार्च की है, उस दिन शाम में बेटी ने अपने भाई से बात की थी। उसने कहा था कि अभी ड्यूटि से आई हूं। थोड़ा आराम करने के बाद तुमसे बात करूंगी। रात 12 बजे मुझे घटना की जानकारी दी गई।मैं वहां गया तो डॉक्टरों की टीम थी और बेटी आईसीयू में भर्ती थी। उसकी स्थिति अभी ठीक नहीं है। उसने साथ क्या हुआ मुझे पता नहीं। जांच के लिए समिति बनाई गई है आईएमएस निदेशक प्रो. एसएन संखवार‎ ने तत्काल तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच‎ समिति बनाई है। समिति प्रशासनिक, ‎विभागीय और सुरक्षा के सभी पहलुओं की‎ गहन समीक्षा करेगी और सात दिनों के अंदर रिपोर्ट सौंपेगी। समिति की अध्यक्षता‎ चिकित्सा संकाय के डीन को सौंपी गई है, ‎जबकि इसमें सर्जरी विभाग की प्रो. सीमा‎खन्ना और डिप्टी चीफ प्रॉक्टर को शामिल‎ किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया ‎है कि परिसर में किसी भी प्रकार का उत्पीड़न‎ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के‎ खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।‎

सीनियर रेजिडेंट्स पर मानसिक‎ प्रताड़ना के आरोप
घटना के पीछे विभागीय तनाव और‎ मानसिक उत्पीड़न की बात सामने‎ आ रही है। छात्रा ने निदेशक को लिखे पत्र में सर्जरी ‎विभाग के 2 सीनियर रेजिडेंट‎ डॉक्टरों डॉ. राहुल राज और डॉ. ‎उत्सव गांगली पर आरोप ‎लगाए हैं। आरोप है कि दोनों डॉक्टर ‎लगातार उसे अपमानित करते हुए ‎पेशेवर रूप से अक्षम बताते थे। ‎उसके आत्मविश्वास को तोड़ने का‎ प्रयास करते थे। परिजनों और ‎सहकर्मियों का कहना है कि छात्रा ने‎ कई बार इस उत्पीड़न की शिकायत‎ की थी और वह मानसिक रूप से ‎बेहद परेशान थी। छात्रा के माता-पिता वाराणसी में ही हैं। अस्पताल प्रशासन से लगातार‎ संपर्क में हैं।
क्रिटिकल केयर की टीम निगरानी कर रही है निदेशक प्रो. एसएन ‎संखवार ने बताया, ‘‎मेडिसिन, न्यूरोलॉजी,‎ नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी और‎ क्रिटिकल केयर की टीम छात्रा की‎ निगरानी कर रही है। कहा कि गठित ‎जांच समिति न केवल पूरे मामले‎ की तह तक जाएगी, बल्कि भविष्य ‎में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति‎ रोकने के लिए ठोस सुझाव भी देगी।’
जानिए पूरा मामला वाराणसी में सत्या घाट के पास किराए के मकान में रहती हैं। उनकी दोस्त के मुताबिक, रात में उन्होंने कई कॉल किए, लेकिन सत्या ने फोन नहीं उठाया। इसके बाद सत्या के पिता को फोन किया। पिता से पता लेकर मैं कमरे पर पहुंची। दरवाजा अंदर से बंद था। काफी देर तक खटखटाने के बावजूद दरवाजा नहीं खुला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी। कुछ देर में पुलिस पहुंची और आवाज लगाई, लेकिन दरवाजा नहीं खुला। इसके बाद दरवाजा तोड़ा दिया। अंदर सत्या बेसुध हालत में पड़ी थीं। फिलहाल उन्हें बीएचयू के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के ICU में भर्ती किया गया है।  

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