बरेली कॉलेज में बुधवार को हुए भारी हंगामे ने अब तूल पकड़ लिया है। एबीवीपी ने कल प्राचार्य ऑफिस का घेराव कर चीफ प्रॉक्टर आलोक खरे के साथ धक्का मुक्की की थी। नौबत हाथापाई तक पहुंच गई थी। अन्य प्रोफेसरों ने उन्हें बचाया। जिसके बाद अब समाजवादी छात्र सभा ने SSP को ज्ञापन देकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर एफआईआर नहीं हुई तो वो रोड जाम करेंगे। समाजवादी छात्र सभा के अध्यक्ष अविनाश मिश्रा के नेतृत्व में करीब 50 से अधिक कार्यकर्ता गुरुवार को एसएसपी ऑफिस पहुंचे। उन्होंने वहां ज्ञापन देकर कहा कि एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने प्राचार्य ऑफिस में घुसकर चीफ प्रॉक्टर आलोक खरे और अन्य प्रोफेसरों के साथ काफी अभद्रता की। प्रोफेसर आलोक खरे के साथ धक्का मुक्की भी हुई और उन्हें मारने की भी कोशिश की गई। काफी देर तक एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया। कालेज के अंदर इस तरह से एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने गुंडागर्दी करने का काम किया है। अविनाश मिश्रा ने कहा कि अगर यही काम समाजवादी छात्र सभा के लोग करते तो उनके खिलाफ अब तक मुकदमा दर्ज हो चुका होता, लेकिन एबीवीपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई क्योंकि उन्हें सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। अविनाश मिश्रा ने आरोप लगाया कि इससे पहले नगर निगम के अंदर नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य के साथ भी एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने काफी अभद्रता की थी। उस वक्त भी कोई कार्यवाही नहीं हुई थी। जिस वजह से एबीवीपी कार्यकर्ताओं के हौसले बुलंद है और वो निरंकुश होते जा रहे है। अब जाने पूरा मामला विस्तार से माधवी लता पर अभद्र टिप्पणी के बाद बरेली कॉलेज में बवाल प्रॉक्टर आलोक खरे को पद से हटाया दरअसल बरेली कॉलेज के चीफ प्रॉक्टर पद से हटाए गए प्रोफेसर आलोक खरे ने फेसबुक पर भाजपा नेत्री माधवी लता के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी की थी। विवाद की शुरुआत 19 मार्च को हुई थी। 62 वर्षीय बॉटनी प्रोफेसर आलोक खरे ने फेसबुक पर माधवी लता की भगवा भेष वाली फोटो साझा करते हुए लिखा था कि केवल बाबा ही नहीं, बाबी (साध्वी) भी कम सेक्सी नहीं होती। एबीवीपी का तर्क है कि जहां एक ओर देश नवरात्रि में नारी शक्ति की पूजा कर रहा था, वहीं एक जिम्मेदार शिक्षक ऐसी अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहा था। हालांकि, खरे ने सफाई दी कि उन्होंने हाल ही में गिरफ्तार हुए अशोक खरात के संदर्भ में यह पोस्ट की थी और बाद में इसे हटा भी लिया था। प्रोफेसर आलोक खरे के खिलाफ दर्ज हो एफआइआर- एबीवीपी एबीवीपी के महानगर सह मंत्री प्रिंस यादव ने कहा कि एक बड़े शिक्षण संस्थान में इतने उच्च पद पर बैठा व्यक्ति महिलाओं के लिए अशोभनीय टिप्पणी करता है। जो बहुत ही निंदनीय है। हम लोगों ने इसीलिए बरेली कॉलेज में प्राचार्य को ज्ञापन दिया था। जिसके बाद आलोक खरे को चीफ प्रॉक्टर के पद से हटा दिया गया है। उन्होंने ये भी कहा कि नवरात्र में जब पूरा देश मां दुर्गा की आराधना करता है उस समय इस तरह की टिप्पणी करना बहुत अशोभनीय है। उन्होंने कहा कि बरेली कॉलेज में बड़ी संख्या में छात्राएं पढ़ती है वो अपने आप को असहज महसूस कर रही है। एबीवीपी ने चीफ प्रॉक्टर के खिलाफ एफआईआर की मांग की है। 35 साल का करियर और विवादों का नाता प्रोफेसर आलोक खरे का शैक्षणिक सफर साढ़े तीन दशक पुराना है। 1984 में लखीमपुर खीरी के वाई.डी. कॉलेज से स्नातक करने वाले खरे ने वनस्पति विज्ञान में पीएचडी की है। बरेली कॉलेज आने से पहले वह सीतापुर के सेक्रेड हार्ट डिग्री कॉलेज में तैनात थे। वह रुहेलखंड विश्वविद्यालय के अधिकृत रिसर्च सुपरवाइजर भी हैं। हालांकि, वह अक्सर अपनी फेसबुक पोस्ट और सरकार विरोधी रुख के कारण चर्चा और विवादों में बने रहते हैं। 189 साल पुराना गौरवशाली इतिहास जिस बरेली कॉलेज में यह विवाद हुआ, उसकी नींव 1837 में रुहेलखंड के तत्कालीन कमिश्नर मिस्टर कॉनली के प्रयासों से पड़ी थी। 1857 की क्रांति के दौरान यहां के प्राचार्य डॉ. कारलोस बक की हत्या कर दी गई थी और कॉलेज बंद हो गया था। बाद में जयपुर के राजा जगत सिंह और नवाब रामपुर द्वारा दी गई 110 एकड़ भूमि के सहयोग से इस संस्थान का पुनर्जन्म हुआ। आज यह रुहेलखंड विश्वविद्यालय का सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज है, जिसने देश को कई बड़े राजनेता और नौकरशाह दिए हैं। आलोक खरे का पलटवार और कार्रवाई की मांग पद से हटाए जाने के बाद अब यह मामला नया मोड़ ले चुका है। गुरुवार को पूर्व चीफ प्रॉक्टर आलोक खरे ने प्राचार्य को पत्र लिखकर एबीवीपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने पत्र में आरोप लगाया कि प्रदर्शन के नाम पर उनके साथ अभद्रता और हाथापाई की गई है। खरे ने प्राचार्य से मांग की है कि ऑफिस में घुसकर हंगामा करने वाले और हमला करने वाले कार्यकर्ताओं के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाए। वही उन्होंने कहा कि उन्हें पद से चीफ प्रॉक्टर पद से हटाया नहीं गया बल्कि उन्होंने 30 मार्च को ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।


