सलमान खान ने सुना मोहन भागवत का भाषण, RSS के इवेंट में दिखा खास अंदाज

सलमान खान ने सुना मोहन भागवत का भाषण, RSS के इवेंट में दिखा खास अंदाज

Salman Khan Attends RSS Event Mohan Bhagwat: मुंबई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी समारोह के तहत आयोजित दो दिवसीय सीरीज इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। वर्ली स्थित नेहरू सेंटर ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में जब बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान पहुंचे, तो वहां मौजूद लोगों की नजरें उन पर टिक गईं। सलमान खान संघ प्रमुख मोहन भागवत का भाषण ध्यान से सुनते नजर आए और उनका ये गंभीर और शांत अंदाज कैमरों में कैद हो गया।

आरएसएस के कार्यक्रम के बारे में (Salman Khan Attends RSS Event Mohan Bhagwat)

ये कार्यक्रम ‘100 ईयर्स ऑफ संघ जर्नी’ थीम पर आधारित है, जिसका उद्देश्य RSS की सौ साल की यात्रा, समाज में उसकी भूमिका और भविष्य की दिशा पर विचार करना है। 7 फरवरी से शुरू हुई ये सीरीज 8 फरवरी तक चलेगी। कार्यक्रम में देशभर से आए वरिष्ठ RSS नेता, विचारक और आमंत्रित वक्ता समाज से जुड़े अलग-अलग मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं।

सलमान खान के अलावा कौन-कौन पहुंचा? (Salman Khan Attends RSS Event Mohan Bhagwat)

सलमान खान के अलावा इस कार्यक्रम में अभिनेता रणबीर कपूर, प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक सुभाष घई और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के चेयरमैन प्रसून जोशी भी शामिल हुए। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में 900 से ज्यादा अतिथि मौजूद थे, जिनमें वैज्ञानिक, उद्योगपति, कलाकार और बुद्धिजीवी शामिल थे। जैसे ही सलमान खान कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, वहां मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल फोन से उनकी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करने शुरू कर दिए। इस इवेंट से जुड़े वीडियोज को ‘ताहिर जासूस’ समेत कई पैपराजी पेजिस ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है।

भागवत ने संबोधन में क्या कहा?

अपने संबोधन में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने साफ कहा कि संघ किसी का विरोध नहीं करता और न ही सत्ता या लोकप्रियता की चाह रखता है। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य देश में चल रहे सकारात्मक प्रयासों को समर्थन देना और समाज को संगठित करना है। भागवत ने ये भी साफ किया कि संघ किसी घटना की प्रतिक्रिया में काम नहीं करता, बल्कि उसका फोकस दीर्घकालिक राष्ट्र निर्माण पर है।

भारत के ‘विश्व गुरु’ बनने की अवधारणा पर बोले भागवत

मोहन भागवत ने भारत के ‘विश्व गुरु’ बनने की अवधारणा पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारत प्रभुत्व के जरिए नहीं, बल्कि उदाहरण और आचरण से विश्व का मार्गदर्शन करेगा। उनके अनुसार, विश्व गुरु बनने के लिए चरित्र निर्माण, सामाजिक संगठन और अनुशासन की जरूरत होती है।

भागवत ने अपने भाषण में ये भी कहा कि भारतीय समाज का मूल भाव लेन-देन नहीं, बल्कि अपनत्व है। उन्होंने ऋषि-मुनियों की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सोच हमेशा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की रही है, जहां पूरा विश्व एक परिवार माना जाता है। उनका मानना है कि भारत में यह क्षमता विरासत के रूप में मौजूद है, जिसे पहचानने और व्यवहार में लाने की जरूरत है।

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