उन्नाव सांसद साक्षी महाराज ने अपने कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान हालिया बयान को लेकर उठे विवाद पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके वक्तव्य को या तो पूरा सुना नहीं गया या फिर उसे तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया। सांसद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह सर्व समाज की राजनीति करते हैं और रत्ती भर भी जातिवाद में विश्वास नहीं रखते। सांसद ने बताया कि यदि वह राजनीति में नहीं आते तो एक सामान्य ब्राह्मण परिवार के व्यक्ति के रूप में जीवन व्यतीत करते। उन्होंने अपनी शिक्षा-दीक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि वे ऐसे संस्थानों में हुई है जहां अनुशासन और संस्कार सर्वोपरि रहे हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए बताया कि वह पहली बार मथुरा से सांसद चुने गए थे, जहां विभिन्न जातियों और वर्गों के लोगों ने उनका समर्थन किया था। साक्षी महाराज ने बताया कि वे अयोध्या आंदोलन से जुड़े रहे हैं और उन्हें ‘हिंदू हृदय सम्राट’ भी कहा जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका उद्देश्य कभी भी समाज में विघटन पैदा करना नहीं रहा। उन्होंने उन्नाव की राजनीति का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने यहां के कई नेताओं के साथ कठिन समय में सहयोग किया है। इसलिए उन पर जातिवाद का आरोप लगाना पूरी तरह गलत है। उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 के बाद देश में बड़े बदलाव हुए हैं। अयोध्या मुद्दे का समाधान, धारा 370 और 35ए का हटाया जाना तथा देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा में वृद्धि जैसे कार्य ऐतिहासिक हैं। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर प्रधानमंत्री के खिलाफ नारेबाजी करना उचित नहीं है।
सांसद ने कहा कि समाज में विभाजन की राजनीति समाप्त होनी चाहिए। कहा कि सनातन, प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सम्मान के लिए एकजुटता आवश्यक है। उन्होंने 10 प्रतिशत सवर्ण आरक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि यह निर्णय समाज के संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रदेश सरकार की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ मॉडल बन चुके हैं और विकास कार्य पूरे प्रदेश में दिखाई दे रहे हैं।


