देशभर के साथ ही संगम नगरी प्रयागराज के माघ मेले में गणतंत्र दिवस का पर्व बड़े ही धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया गया। जहाँ एक ओर रेती पर धर्म की ध्वजा लहरा रही है, वहीं आज राष्ट्रभक्ति के रंग में सराबोर संतों ने शान से तिरंगा फहराया। अखिल भारतीय दंडी सन्यासी परिषद के शिविरों में शंखनाद और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के बीच राष्ट्रगान गूँजा। माघ मेले के दंडी बाड़ा स्थित नागेश्वर धाम में परिषद के संरक्षक स्वामी महेशाश्रम महाराज ने ध्वजारोहण किया। इस दौरान कल्पवासियों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने माहौल को भक्ति और शक्ति से भर दिया। स्वामी महेशाश्रम महाराज ने राष्ट्रध्वज और धर्मध्वज के गहरे संबंध को समझाते हुए कहा “राष्ट्रध्वज हमें देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए समर्पित रहने की प्रेरणा देता है, जबकि धर्मध्वज हमारे आत्मबल को जागृत करता है। जब ये दोनों शक्तियाँ मिलती हैं, तो व्यक्ति राष्ट्र के लिए सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार हो जाता है।” संतों ने इस अवसर पर भारत को विश्व गुरु बनाने का संकल्प दोहराया। स्वामी महेशाश्रम ने भविष्य की ओर संकेत करते हुए कहा कि भारत की उन्नति का मार्ग यहीं से प्रशस्त होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि जो राष्ट्र भारत से अलग हुए हैं, उनका पुनः विलय होगा और भारत ‘चक्रवर्ती’ बनकर पूरे विश्व का संचालन करेगा। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज ने बताया कि नागेश्वर धाम शिविर में गणतंत्र दिवस मनाने की यह परंपरा पिछले 20 वर्षों से निरंतर चली आ रही है। इसका उद्देश्य देश के खिलाफ रचे जा रहे कुचक्रों को विफल करना है। तिरंगे के नीचे खड़े होकर सभी संतों ने भारत को अखंड बनाने की कामना की। कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से पूरा मेला क्षेत्र गुंजायमान रहा। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि संगम की इस पावन धरती पर तपस्या कर रहे संत न केवल आध्यात्मिक चेतना, बल्कि प्रखर राष्ट्रवाद के भी प्रहरी हैं।


