सहरसा के किसान बेटे बने एयर इंडिया पायलट:कैप्टन चंदन अब जिले में खोलेंगे रोबोटिक स्कूल

सहरसा के किसान बेटे बने एयर इंडिया पायलट:कैप्टन चंदन अब जिले में खोलेंगे रोबोटिक स्कूल

सहरसा के एक किसान परिवार से आने वाले कैप्टन चंदन अब एयर इंडिया में पायलट के रूप में कार्यरत हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने पायलट बनने के सपने को साकार किया। उनकी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूलों में हुई, जहां उन्हें कई बार बोरे पर बैठकर भी पढ़ाई करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि 6 क्लास में प्राइवेट स्कूल में दाखिला तो पिता ने दिल दिया लेकिन इतने पैसे नहीं थे कि वह प्राइवेट स्कूल में ज्यादा दिनों तक सरवाइव कर सके। इंडियन एयरलाइंस में कैप्टन पायलट के रूप में कार्यरत सरकारी स्कूल से पढ़ने के बाद इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करी की और उसके बाद उन्होंने पायलट बनने के लिए ज़ी तोड़ मेहनत शुरू कर दी। इसके बाद उसे बड़ी सफलता मिली।चंदन इंडियन एयरलाइंस में कैप्टन पायलट के रूप में कार्यरत है। उन्होंने बताया कि बचपन में एक रात घर की छत पर सोते हुए आसमान में उड़ते हवाई जहाज को देखकर उनके मन में पायलट बनने की इच्छा जागी। उसी क्षण उन्होंने विमान उड़ाने का संकल्प लिया और पढ़ाई के साथ-साथ विमानन से जुड़ी जानकारी जुटाना शुरू किया। देशभर से चयनित 40 अभ्यर्थियों में शामिल शुरुआती दौर में कम उम्र के कारण उन्हें फ्लाइंग क्लब में दाखिला नहीं मिल पाया। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और देश की प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी में प्रवेश का लक्ष्य निर्धारित किया। कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की और देशभर से चयनित 40 अभ्यर्थियों में अपना स्थान बनाया। अकादमी में उन्होंने कठोर अनुशासन और गहन प्रशिक्षण का सामना किया। लगभग 17 वर्षों के अनुभव और समर्पण के बाद उनका सपना साकार हुआ। वर्तमान में, वे देश की प्रमुख विमानन कंपनी एयर इंडिया में कैप्टन के पद पर कार्यरत हैं। अब कैप्टन चंदन ने सहरसा में ‘काइनेसिस इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल’ की स्थापना सहरसा मे करने का संकल्प लिया है। इसके माध्यम से वे बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और रोबोटिक्स से जोड़ना चाहते हैं। उनका मानना है कि उचित मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीक से ग्रामीण बच्चों के सपनों को नई दिशा मिल सकती है। सहरसा के एक किसान परिवार से आने वाले कैप्टन चंदन अब एयर इंडिया में पायलट के रूप में कार्यरत हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने पायलट बनने के सपने को साकार किया। उनकी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूलों में हुई, जहां उन्हें कई बार बोरे पर बैठकर भी पढ़ाई करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि 6 क्लास में प्राइवेट स्कूल में दाखिला तो पिता ने दिल दिया लेकिन इतने पैसे नहीं थे कि वह प्राइवेट स्कूल में ज्यादा दिनों तक सरवाइव कर सके। इंडियन एयरलाइंस में कैप्टन पायलट के रूप में कार्यरत सरकारी स्कूल से पढ़ने के बाद इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करी की और उसके बाद उन्होंने पायलट बनने के लिए ज़ी तोड़ मेहनत शुरू कर दी। इसके बाद उसे बड़ी सफलता मिली।चंदन इंडियन एयरलाइंस में कैप्टन पायलट के रूप में कार्यरत है। उन्होंने बताया कि बचपन में एक रात घर की छत पर सोते हुए आसमान में उड़ते हवाई जहाज को देखकर उनके मन में पायलट बनने की इच्छा जागी। उसी क्षण उन्होंने विमान उड़ाने का संकल्प लिया और पढ़ाई के साथ-साथ विमानन से जुड़ी जानकारी जुटाना शुरू किया। देशभर से चयनित 40 अभ्यर्थियों में शामिल शुरुआती दौर में कम उम्र के कारण उन्हें फ्लाइंग क्लब में दाखिला नहीं मिल पाया। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और देश की प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी में प्रवेश का लक्ष्य निर्धारित किया। कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की और देशभर से चयनित 40 अभ्यर्थियों में अपना स्थान बनाया। अकादमी में उन्होंने कठोर अनुशासन और गहन प्रशिक्षण का सामना किया। लगभग 17 वर्षों के अनुभव और समर्पण के बाद उनका सपना साकार हुआ। वर्तमान में, वे देश की प्रमुख विमानन कंपनी एयर इंडिया में कैप्टन के पद पर कार्यरत हैं। अब कैप्टन चंदन ने सहरसा में ‘काइनेसिस इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल’ की स्थापना सहरसा मे करने का संकल्प लिया है। इसके माध्यम से वे बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और रोबोटिक्स से जोड़ना चाहते हैं। उनका मानना है कि उचित मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीक से ग्रामीण बच्चों के सपनों को नई दिशा मिल सकती है।  

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