बिहार में आय से अधिक संपत्ति के मामलों में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की कार्रवाई तेज हो गई है। EOU ने सहरसा के डीआरडीए निदेशक वैभव कुमार को पूछताछ के लिए तलब किया, जिसके बाद आज बुधवार को वे पटना स्थित EOU दफ्तर पहुंचे हैं। पिछले एक घंटे से EOU की पांच सदस्यीय टीम उनसे पूछताछ कर रही है। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में की जा रही है। इससे पहले भी मंगलवार को EOU ने उन्हें बुलाया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए थे। EOU ने छह ठिकानों पर की छापेमारी पिछले मंगलवार को EOU की टीम ने मुजफ्फरपुर और सहरसा सहित कुल छह ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान अधिकारियों को 16 संपत्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले। छापेमारी में पटना और मुजफ्फरपुर में स्थित कई कीमती जमीन के प्लॉट सहित अन्य संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हुए हैं। 2.41 करोड़ आय से अधिक संपत्ति का मामला जांच एजेंसियों के मुताबिक, वैभव कुमार के खिलाफ 2.41 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका था। छापेमारी में मिले साक्ष्य इस मामले को और मजबूत कर रहे हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि वैभव कुमार ने मुजफ्फरपुर के हरिशंकर मनियारी गांव में ‘ऐश्वर्या मैक्स ग्लो आईटीआई’ नाम से एक प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किया है। इस संस्थान के निर्माण और वर्कशॉप पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यह संस्थान एक चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से संचालित हो रहा है, जिसमें उनके पिता को प्रबंधक बनाया गया है। संस्थान के लिए एक बीघा जमीन वार्षिक लीज पर ली गई है, जिसका उपयोग खेल मैदान के रूप में किया जा रहा है। बैंक खाते, जमीन और निवेश पर ईओयू की नजर छापेमारी के दौरान वैभव कुमार और उनकी पत्नी के बैंक खातों में 20 लाख रुपए से अधिक की राशि जमा मिलने की पुष्टि हुई है। इसके बाद ईओयू ने संबंधित खातों और लॉकर को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच एजेंसी को यह भी पता चला है कि वैभव कुमार ने अपने स्वजनों के नाम पर पटना और मुजफ्फरपुर में 16 भूखंड खरीद रखे हैं। इसके अलावा उनके पास दो वाहन भी पाए गए हैं, जिनमें एक टाटा नेक्सन शामिल है। इतना ही नहीं, ईओयू को शेयर बाजार और बीमा कंपनियों में निवेश से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं, जो उनकी आय और संपत्ति के बीच असंतुलन की ओर इशारा करते हैं। बैंकिंग से प्रशासन तक का सफर गौरतलब है कि वैभव कुमार ने अपने करियर की शुरुआत बैंकिंग सेक्टर से की थी। वह वर्ष 2008 से 2013 तक भारतीय स्टेट बैंक में कार्यरत रहे थे। इसके बाद उन्होंने ग्रामीण विकास पदाधिकारी के रूप में प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया। अब उनके खिलाफ सामने आए इस बड़े घोटाले ने उनके पूरे करियर पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बढ़ती सख्ती का संकेत बिहार में हाल के दिनों में आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जिस तेजी से कार्रवाई हो रही है, वह साफ संकेत देता है कि सरकार और जांच एजेंसियां अब भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही हैं। किशनगंज से लेकर सहरसा तक लगातार हो रही कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चाहे अधिकारी किसी भी स्तर का हो, अगर उसके खिलाफ ठोस सबूत मिलते हैं तो कार्रवाई तय है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। बिहार में आय से अधिक संपत्ति के मामलों में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की कार्रवाई तेज हो गई है। EOU ने सहरसा के डीआरडीए निदेशक वैभव कुमार को पूछताछ के लिए तलब किया, जिसके बाद आज बुधवार को वे पटना स्थित EOU दफ्तर पहुंचे हैं। पिछले एक घंटे से EOU की पांच सदस्यीय टीम उनसे पूछताछ कर रही है। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में की जा रही है। इससे पहले भी मंगलवार को EOU ने उन्हें बुलाया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए थे। EOU ने छह ठिकानों पर की छापेमारी पिछले मंगलवार को EOU की टीम ने मुजफ्फरपुर और सहरसा सहित कुल छह ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान अधिकारियों को 16 संपत्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले। छापेमारी में पटना और मुजफ्फरपुर में स्थित कई कीमती जमीन के प्लॉट सहित अन्य संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हुए हैं। 2.41 करोड़ आय से अधिक संपत्ति का मामला जांच एजेंसियों के मुताबिक, वैभव कुमार के खिलाफ 2.41 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका था। छापेमारी में मिले साक्ष्य इस मामले को और मजबूत कर रहे हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि वैभव कुमार ने मुजफ्फरपुर के हरिशंकर मनियारी गांव में ‘ऐश्वर्या मैक्स ग्लो आईटीआई’ नाम से एक प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किया है। इस संस्थान के निर्माण और वर्कशॉप पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यह संस्थान एक चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से संचालित हो रहा है, जिसमें उनके पिता को प्रबंधक बनाया गया है। संस्थान के लिए एक बीघा जमीन वार्षिक लीज पर ली गई है, जिसका उपयोग खेल मैदान के रूप में किया जा रहा है। बैंक खाते, जमीन और निवेश पर ईओयू की नजर छापेमारी के दौरान वैभव कुमार और उनकी पत्नी के बैंक खातों में 20 लाख रुपए से अधिक की राशि जमा मिलने की पुष्टि हुई है। इसके बाद ईओयू ने संबंधित खातों और लॉकर को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच एजेंसी को यह भी पता चला है कि वैभव कुमार ने अपने स्वजनों के नाम पर पटना और मुजफ्फरपुर में 16 भूखंड खरीद रखे हैं। इसके अलावा उनके पास दो वाहन भी पाए गए हैं, जिनमें एक टाटा नेक्सन शामिल है। इतना ही नहीं, ईओयू को शेयर बाजार और बीमा कंपनियों में निवेश से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं, जो उनकी आय और संपत्ति के बीच असंतुलन की ओर इशारा करते हैं। बैंकिंग से प्रशासन तक का सफर गौरतलब है कि वैभव कुमार ने अपने करियर की शुरुआत बैंकिंग सेक्टर से की थी। वह वर्ष 2008 से 2013 तक भारतीय स्टेट बैंक में कार्यरत रहे थे। इसके बाद उन्होंने ग्रामीण विकास पदाधिकारी के रूप में प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया। अब उनके खिलाफ सामने आए इस बड़े घोटाले ने उनके पूरे करियर पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बढ़ती सख्ती का संकेत बिहार में हाल के दिनों में आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जिस तेजी से कार्रवाई हो रही है, वह साफ संकेत देता है कि सरकार और जांच एजेंसियां अब भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही हैं। किशनगंज से लेकर सहरसा तक लगातार हो रही कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चाहे अधिकारी किसी भी स्तर का हो, अगर उसके खिलाफ ठोस सबूत मिलते हैं तो कार्रवाई तय है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


