सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद ने सरकार पर धार्मिक आस्थाओं को चोट पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा शासन में लोगों की भावनाओं की अनदेखी हो रही है। उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग घटनाओं में धार्मिक स्थलों और मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, जबकि सरकार इन घटनाओं को एआई जनरेटेड या झूठा बताकर पल्ला झाड़ रही है। इमरान मसूद ने कहा कि देश आस्थाओं का है और किसी भी धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाना स्वीकार्य नहीं हो सकता। इमरान मसूद ने बरेली की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोग अपने घर में नमाज अदा कर रहे थे, तभी उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। उन्होंने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया। इसके बाद उन्होंने बनारस की कथित घटना का हवाला देते हुए कहा कि वहां पूरे के पूरे मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया और भगवान शिव की मूर्ति को जंजीरों से घसीटते हुए ले जाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हनुमान जी की मूर्ति को ट्रैक्टर से खींचा गया। सांसद ने कहा कि सरकार इन वीडियो को फर्जी और एआई जनरेटेड बताकर खारिज कर रही है, जबकि अहिल्याबाई होल्कर चैरिटेबल ट्रस्ट ने मौके के वीडियो जारी किए हैं। इमरान मसूद ने अपने मोबाइल पर ट्रस्ट द्वारा जारी वीडियो ऑन-स्क्रीन दिखाते हुए सवाल उठाया कि क्या खंडित मूर्तियों को दोबारा स्थापित किया जा सकता है? उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खंडित मूर्तियों की दोबारा स्थापना संभव नहीं होती, ऐसे में यह नुकसान अपूरणीय है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बड़ा सवाल उठ रहा है। इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि अतीत के आक्रांताओं का जिक्र कर नफरत फैलाने की बात की जाती है, लेकिन जो घटनाएं आज हो रही हैं, उन्हें क्या कहा जाएगा? उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में आरएसएस कार्यालय को पार्किंग देने के लिए सैकड़ों साल पुराना मंदिर तोड़ा गया। उन्होंने सवाल किया कि जब मंदिर तोड़े जाते हैं तो क्या दर्द नहीं होता? जब मस्जिदों पर बुलडोजर चलते हैं तो क्या दर्द नहीं होता? इमरान मसूद ने कहा कि देश में इस तरह की कार्रवाइयों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में सबसे ज्यादा मंदिर टूटे हैं और ये रिकॉर्ड पर है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि किसी को इस पर शंका है तो वे खुले मंच पर बहस के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा-हम पूरे हिंदुस्तान से लिस्ट देंगे कि भाजपा के राज में कितने मंदिर तोड़े गए। उन्होंने कहा कि आस्थाओं का सम्मान लोकतंत्र की बुनियाद है और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सभी धर्मों की भावनाओं की रक्षा करें। इमरान मसूद के इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में विवाद तेज हो गया है, वहीं सरकार समर्थकों ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज किया है।


