वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत और रूस के रिश्तों को लेकर एक अहम संकेत सामने आया है, जहां रूस ने भारत को ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने की पेशकश की है। यह पेशकश ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है।
बता दें कि रूस के वरिष्ठ अधिकारी डेनिस मंतुरोव ने भारत दौरे के दौरान कहा कि रूस की कंपनियां भारत को कच्चा तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बढ़ाने में सक्षम हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार, रूस पहले ही भारत को उर्वरकों की आपूर्ति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर चुका है और आगे भी जरूरतों को पूरा करने की तैयारी में है।
गौरतलब है कि वर्ष 2025 के अंत तक रूस ने भारत को खनिज उर्वरकों की आपूर्ति में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि की थी। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच यूरिया उत्पादन से जुड़ा एक संयुक्त प्रोजेक्ट भी विकसित किया जा रहा है, जिससे कृषि क्षेत्र में सहयोग और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
ऊर्जा क्षेत्र के अलावा परमाणु ऊर्जा सहयोग भी इस बातचीत का अहम हिस्सा रहा। मौजूद जानकारी के अनुसार, तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना में नए बिजली उत्पादन इकाइयों का निर्माण तय समय के अनुसार आगे बढ़ रहा है। इसे दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग का अहम स्तंभ माना जा रहा है।
इस दौरान दोनों पक्षों ने व्यापार, उद्योग, तकनीक, अंतरिक्ष, शिक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की। गौरतलब है कि हाल ही में हुई भारत-रूस वार्षिक शिखर बैठक के फैसलों की प्रगति की भी समीक्षा की गई और आगे की दिशा तय करने पर जोर दिया गया।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इस उच्चस्तरीय दौरे के दौरान भारतीय विदेश मंत्री सहित कई वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकें हुईं, जिनमें क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों, खासकर पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया गया।
कुल मिलाकर यह दौरा दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग को नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है।


