लॉन्ग कोविड उपचार में होम्योपैथी की भूमिका

प्रदीप कुमार बोरड़, सेवानिवृत्त आइएएस – कोविड महामारी भले ही अब सुर्खियों से दूर हो गई हो, पर उसका प्रभाव आज भी लोगों के जीवन पर बना हुआ है। बहुत से लोग यह शिकायत करते है कि रिपोर्ट तो सामान्य, पर शरीर पहले जैसा नहीं रहा, यह केवल एक अनुभव नहीं है बल्कि एक नई स्वास्थ्य चुनौती है। यह स्थिति ही लॉन्ग कोविड कहलाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोविड संक्रमण के बाद भी यदि थकान, सांस फूलना, याददाश्त में कमी, बेचैनी या नींद की समस्या बनी रहे तो इसे पोस्ट कोविड स्थिति माना जाता है। स्पष्ट है कि यह केवल वायरस का प्रभाव नहीं, बल्कि शरीर की दीर्घकालिक जैविक प्रतिक्रिया है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि संक्रमण या अत्यधिक तनाव के बाद कुछ कोशिकाएं निष्क्रिय (सेनेसेंट अवस्था) हो जाती हैं, वे न तो पूरी तरह काम करती हैं और न ही मरती हैं, पर लगातार हल्की सूजन पैदा करती रहती हैं। इन्हें ही सरल भाषा में जॉम्बी कोशिकाएं कहा जाता है। इस कारण शरीर में लगातार थकान, सूजन और मानसिक द्वंद्व (ब्रेन फोग) जैसे लक्षण बने रहते है।

पर्यावरणीय असंतुलन और प्रदूषण इस आग में घी डालता हुआ कारक है। पीएम 2.5, पीएम 10, औद्योगिक गैसें, ओजोन परत का क्षरण और अंतरिक्ष से आने वाली हानिकारक यूवी किरणें ये सभी हमारे शरीर की कोशिकाओं पर हानिकारक प्रभाव डालती हैं। इनके प्रभाव से कोशिकाओं में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, डीएनए को नुकसान, त्वचा पर नकारात्मक प्रभाव के कारण प्रतिरक्षा प्रणाली बार-बार सूजन की प्रतिक्रिया देने लगती है। इन सभी कारणों के संयुक्त प्रभाव से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में एक नई प्रवृति विकसित हो जाती है, जिसके कारण बार-बार सूजन आना, रक्त का गाढ़ापन बढऩा और थकान रहती है। यह केवल रोग नहीं है बल्कि शरीर की प्रतिक्रिया प्रणाली में बदलाव है।

होम्योपैथी का मूल सिद्धान्त है ‘रोग को नहीं, रोगी को ठीक करो’। जहां आधुनिक चिकित्सा पद्धति अक्सर लक्षणों को नियंत्रित करने पर केंद्रित रहती है, वही होम्योपैथी शरीर की स्वनियमन क्षमता को सक्रिय करती है। प्रदूषण से श्वसन तंत्र को होने वाली क्षति की मरम्मत में होम्योपैथी दवाएं प्रतिरक्षा प्रणाली की मदद करती है। होम्योपैथी के अनुसार शरीर की जीवनी शक्ति असंतुलित हो जाती है, जिसके कारण शरीर की इन नकारात्मक प्रभावों के विरुद्ध प्रतिक्रिया बदल जाती है। भारत वैज्ञानिक अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के समन्वय आधार पर कम लागत, स्वास्थ्य मॉडल और मजबूत सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा तंत्र विकसित कर सकता है। यह स्वास्थ्य तंत्र कम लागत वाला, समुदाय पहुंच आधारित और दीर्घकालीन रोगों के लिए प्रभावी होगा।

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