घाटे से जूझ रहे रोडवेज प्रबंधन ने अब इसे उबरने के लिए एक और नया प्रयोग किया है। यह प्रयोग कितना सफल रहेगा, यह आने वाले समय में ही पता चलेगा। परन्तु इससे एक बारगी लम्बे समय से एक ही बस के परिचालक के रूप में काम कर रहे परिचालक को अब दूसरे रूट और दूसरी बस में ड्यूटी करनी होगी। रोडवेज मुख्यालय ने प्रदेशभर में परिचालकों की अदला-बदली की कवायद शुरू की है। सबसे पहले राज्य से बाहर लंबी दूरी की बसों में ड्यूटी करने वाले परिचालकों को राज्य के भीतर संचालित बसों में लगाया जा रहा है। वहीं आगार में लोकल रूट पर कार्यरत परिचालकों को अन्य आगार क्षेत्र या प्रदेश से बाहर जाने वाली बसों में तैनात किया गया है। खासकर उन परिचालकों की अदला-बदली सबसे पहले की जा रही है, जिनके रूट की आय कम आ रही है। रोडवेज प्रबंधन इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य रोडवेज का राजस्व बढ़ाना, यात्रियों की संख्या में वृद्धि करना, टिकटिंग व्यवस्था को बेहतर बनाना बता रहा है। लंबे समय से एक ही रूट पर चलने वाले परिचालकों की कार्यशैली में ठहराव आ जाता है। इसका असर आय पर भी पड़ता है। नई जगह और नए रूट पर काम करने से परिचालकों में सक्रियता बढ़ेगी और बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
परिणाम आ रहे बेहतर
रोडवेज प्रबंधन ने इस व्यवस्था को लागू कर दिया है। पखवाड़ेभर से अच्छे परिणाम आ रहे हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार कई रूट्स पर यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। टिकट से होने वाली आय में भी इजाफा हुआ है। यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहा तो इसे स्थायी रूप से लागू किया जा सकता है।
आय बढ़ाने के प्रयास
कम इनकम लाने वाले परिचालकों की अदला-बदली की गई है। परिचालक बदलने से कई रूटों पर आय में फर्क पड़ा है। रोडवेज की आय बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
इन्द्रा गोदारा, मुख्य प्रबंधक बीकानेर आगार


