बड़वानी जिले में सड़क हादसों की संख्या में लगातार बढ़ रही है। साल 2025 के शुरुआती 11 महीनों में ही सड़क हादसों का आंकड़ा पिछले साल 2024 से अधिक रहा है। 30 नवंबर तक जिले में 841 दुर्घटनाएं दर्ज की गई, जिनमें 329 लोगों की मौत हुई और 1088 लोग घायल हुए। इसकी तुलना में, साल 2024 में कुल 808 दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें 331 मौतें और 1081 घायल शामिल थे। दिसंबर के आंकड़े आने बाकी हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति चिंताजनक हैं। जिले में हर साल में एक हजार से ज्यादा घायल पिछले चार वर्षों के आंकड़े सड़क सुरक्षा की गंभीर स्थिति को दर्शाते हैं। वर्ष 2022 में 852 दुर्घटनाओं में 302 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2023 में 825 हादसों में 299 लोगों ने जान गंवाई। 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 331 मौतों तक पहुंच गया। 2025 में नवंबर तक 329 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। इन वर्षों में हर साल एक हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं। इन दुर्घटनाओं के मुख्य कारणों में तेज रफ्तार, खराब सड़कें, नशे में वाहन चलाना और यातायात नियमों की अनदेखी शामिल है। इन हादसों के कारण सैकड़ों लोग असमय अपनी जान गंवा रहे हैं, जबकि हजारों घायल जीवन भर शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलने को मजबूर होते हैं। वरिष्ठ नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि वाहन चालकों में जिम्मेदारी का अभाव और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी दिख रही है। राहवीर योजना से घायलों को समय पर इलाज हालांकि, जिले में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। ‘राहवीर योजना’ के तहत घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। यातायात विभाग स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित कर रहा है। यातायात प्रभारी विनोद बघेल ने बताया कि नशे की हालत में वाहन चलाने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। सख्ती बिना सड़क हादसों पर रोक मुश्किल इस वर्ष बड़ी संख्या में वाहनों पर चालानी कार्रवाई की गई है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जागरूकता ही काफी नहीं है। तेज रफ्तार पर सख्त नियंत्रण, खराब सड़कों का सुधार, नशे में वाहन चलाने पर कड़ी कार्रवाई और यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराए बिना सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक नहीं लगाई जा सकती।


