देश में आज से डिजिटल माध्यम से जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर केंद्र सरकार इसे पारदर्शी और आधुनिक पहल बता रही है, वहीं विपक्ष जाति आधारित जनगणना को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। जनगणना शुरू होते ही राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। राजद के प्रवक्ता एजाज अहमद ने केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा जाति आधारित जनगणना कराने का जो वादा किया गया था, उस दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। जनगणना में जोड़ना चाहिए जाति आधारिक कॉलम उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने हाल ही में जातिगत सर्वेक्षण कराया था, जिसमें पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्ग की आबादी के साथ-साथ उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का भी आकलन किया गया। उनके मुताबिक, इस तरह के आंकड़े सामाजिक न्याय की नीतियां बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। एजाज अहमद ने मांग की कि केंद्र सरकार को जनगणना में जाति आधारित डेटा के लिए अलग कॉलम जोड़ना चाहिए, तभी यह प्रक्रिया समाज के वंचित और शोषित वर्गों के लिए सार्थक साबित होगी। भाजपा बोली- विपक्ष का इतिहास झूठ और भ्रम फैलाने का वहीं, भाजपा के प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष का इतिहास ही “झूठ और भ्रम फैलाने” का रहा है। जब देश डिजिटल जनगणना की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है, तब विपक्ष बेवजह विवाद खड़ा कर रहा है। उनके अनुसार, जो दल लंबे समय तक सत्ता में रहे, वे पारदर्शी जनगणना कराने में असफल रहे और अब राजनीतिक लाभ के लिए जाति का मुद्दा उठा रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता ने यह भी कहा कि विपक्ष के पास अब कोई ठोस नीति या दृष्टि नहीं बची है, इसलिए वह समाज को बांटने की राजनीति कर रहा है, जबकि देश विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 1872 में पहली बार हुई थी जनगणना भारत में जनगणना का सफर काफी लंबा रहा है, पहली व्यवस्थित जनगणना 1872 में शुरू हुई थी, जबकि 1881 से हर 10 साल पर नियमित जनगणना कराई जाती है। आज़ादी के बाद भी यह सिलसिला जारी रहा और रजिस्ट्रार जनरल एंड सेंसस कमिश्नर ऑफ इंडिया के अधीन पूरे देश में यह कार्य होता है। हालांकि 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण टल गई थी। अब सरकार ने इसे डिजिटल स्वरूप में शुरू करने का फैसला लिया है, जिसमें मोबाइल ऐप और ऑनलाइन डेटा एंट्री के जरिए जानकारी जुटाई जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और त्रुटिहीन होगी। देश में आज से डिजिटल माध्यम से जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर केंद्र सरकार इसे पारदर्शी और आधुनिक पहल बता रही है, वहीं विपक्ष जाति आधारित जनगणना को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। जनगणना शुरू होते ही राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। राजद के प्रवक्ता एजाज अहमद ने केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा जाति आधारित जनगणना कराने का जो वादा किया गया था, उस दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। जनगणना में जोड़ना चाहिए जाति आधारिक कॉलम उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने हाल ही में जातिगत सर्वेक्षण कराया था, जिसमें पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्ग की आबादी के साथ-साथ उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का भी आकलन किया गया। उनके मुताबिक, इस तरह के आंकड़े सामाजिक न्याय की नीतियां बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। एजाज अहमद ने मांग की कि केंद्र सरकार को जनगणना में जाति आधारित डेटा के लिए अलग कॉलम जोड़ना चाहिए, तभी यह प्रक्रिया समाज के वंचित और शोषित वर्गों के लिए सार्थक साबित होगी। भाजपा बोली- विपक्ष का इतिहास झूठ और भ्रम फैलाने का वहीं, भाजपा के प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष का इतिहास ही “झूठ और भ्रम फैलाने” का रहा है। जब देश डिजिटल जनगणना की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है, तब विपक्ष बेवजह विवाद खड़ा कर रहा है। उनके अनुसार, जो दल लंबे समय तक सत्ता में रहे, वे पारदर्शी जनगणना कराने में असफल रहे और अब राजनीतिक लाभ के लिए जाति का मुद्दा उठा रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता ने यह भी कहा कि विपक्ष के पास अब कोई ठोस नीति या दृष्टि नहीं बची है, इसलिए वह समाज को बांटने की राजनीति कर रहा है, जबकि देश विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 1872 में पहली बार हुई थी जनगणना भारत में जनगणना का सफर काफी लंबा रहा है, पहली व्यवस्थित जनगणना 1872 में शुरू हुई थी, जबकि 1881 से हर 10 साल पर नियमित जनगणना कराई जाती है। आज़ादी के बाद भी यह सिलसिला जारी रहा और रजिस्ट्रार जनरल एंड सेंसस कमिश्नर ऑफ इंडिया के अधीन पूरे देश में यह कार्य होता है। हालांकि 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण टल गई थी। अब सरकार ने इसे डिजिटल स्वरूप में शुरू करने का फैसला लिया है, जिसमें मोबाइल ऐप और ऑनलाइन डेटा एंट्री के जरिए जानकारी जुटाई जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और त्रुटिहीन होगी।


