‘राजद ने गलत उम्मीदवार चुना, इसलिए वोट नहीं दिया’:विधायकों ने चुनाव में न आने का बताया कारण, सुरेंद्र के पोस्ट पर यूजर ने लिखा- ये नमकहरामी है

‘राजद ने गलत उम्मीदवार चुना, इसलिए वोट नहीं दिया’:विधायकों ने चुनाव में न आने का बताया कारण, सुरेंद्र के पोस्ट पर यूजर ने लिखा- ये नमकहरामी है

‘एक सीट का मौका था, महागठबंधन के पास दीपक यादव जी से बेहतर उम्मीदवार कौन हो सकता था, वह भी नहीं तो मुकेश सहनी थे, लेकिन उन्हें मौका ना देकर ऐसे वर्ग के व्यक्ति को उम्मीदवार बना दिया गया, जिसका जनाधार महागठबंधन के खिलाफ है। मैं NDA का साथ दे नहीं सकता हूं और राजद ने उम्मीदवार गलत चुना तो मैने वोट नहीं देना ही बेहतर समझा। रही बात मुझपर आरोप लगाने की, तो मुख्यमंत्री के सबसे चहेते सीट पर हमनें पूरे सरकारी तंत्र को हराकर विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। जनता के आशीर्वाद का कर्ज पूरे बिहार में विकास कार्यों से चुकता कर रहा हूं तो विरोधी जब बराबरी नहीं कर पाएगा तो बदनाम ही करेगा।
आशा है जनता दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग के लिए मेरे इस त्याग और समर्पण की भावना को समझेगी और विरोधियों के झांसे में नहीं आएगी।’ ये बातें कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट की है। ये वही विधायक हैं जों राज्यसभा चुनाव की वोटिंग में नहीं पहुंचे थे। जिसके बाद फेसबुक पोस्ट पर उन्होंने चुनाव में न आने की वजह बताई। वे मुकेश सहनी या बगहा चीनी मिल के मालिक दीपक यादव को उम्मीदवार बनाना चाहते थे। वहींस पोस्ट पर कुथ यूजर्स ने टिप्पणी भी की है। इनमें एक ने लिखा है कि ‘इसे नमकहरामी कहते हैं।’ विधायक सुरेंद्र प्रसाद का पोस्ट… फेसबुक यूजर्स ने विधायक के पोस्ट पर क्या-क्या लिखा… राजनीति अब सिद्धांतों की नहीं, बल्कि स्वार्थ की हो गई है मयूर आलम लिखते हैं, माननीय विधायक जी, जनता ने आपको किसी कुर्सी का मालिक नहीं, बल्कि अपनी आवाज बनाकर भेजा था। आपने जिस विचारधारा और गठबंधन के नाम पर वोट लिया, उसी INDIA Alliance को राज्यसभा में वोट न देकर आपने साफ कर दिया कि राजनीति अब सिद्धांतों की नहीं, बल्कि मौके और स्वार्थ की हो गई है।
दम है तो निर्दलीय चुनाव लड़ें, औकात समझ आ जएगा
मो. अरशद जमा ने कहा, विधायक जी जनता ने वोट आपको नहीं महागठबंधन को दिया था। तब आपके सिर पर ताज सजी है। अगर दम है तो निर्दलीय चुनाव लड़कर देख लीजिए। औकात समझ में आ जाएगा। इंडिविजुअल निर्णय लेने का अधिकार नहीं
अतूल पांडे ने लिखा है कि आप निर्दलीय नहीं है कि आपको इंडिविजुअल निर्णय लेने का अधिकार है। आप पार्टी के सिंबल पर लड़े हैं तो डिसीजन पार्टी ही लेती है। अकेले निर्दलीय लड़े रहते तब आपको दीपक यादव जी के कंधे पर बंदूक रख कर चलाने का अधिकार रहता। कुछ देर के लिए मान भी ले कि आप रावणों से घिरे हैं, तो भी सम्मान ‘कुंभकरण’ और ‘मेघनाद’ जैसे लोगों को ही मिलता है। क्योंकि वे अपने पार्टी के लिए मर गए, पर घात नहीं किए।
आप पार्टी से ऊपर नहीं आसिफ इकबाल ने लिखा है कि पार्टी का आदेश था। सब को मानना पड़ता है, आप पार्टी से ऊपर नहीं हैं। वहीं, इसके अलावा कुछ यूजर्स ने विधायक के पक्ष में भी लिखा है। उनका कहना है कि आपका निर्णय सही है। महागठबंधन के अन्य तीनों विधायकों ने भी वोट न देने का कारण बताया… अल्पसंख्यक-ओबीसी वर्ग से उम्मीदवार होना चाहिए था वहीं, मनिहारी से कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद सिंह ने कहा कि महागठबंधन की ओर से दलित, अल्पसंख्यक या ओबीसी वर्ग से उम्मीदवार नहीं बनाया गया। इन वर्गों की अनदेखी कर अन्य कोटे से प्रत्याशी उतारा गया, जिसके विरोध में मैंने मतदान का बहिष्कार किया।
विधायकों को सम्मान नहीं मिलेगा तो वोट भी नहीं मिलेगा फारबिसगंज से कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास ने कहा कि जब पार्टी के विधायकों को ही सम्मान नहीं मिलेगा तो वोट देने का कोई मतलब नहीं रह जाता। AD सिंह के अलावा दूसरा कैंडिडेट होता तो जरूर वोट देते। पार्टी की कार्रवाई के लिए तैयार हूं।
मां के इलाज में व्यस्त था ढाका से राजद विधायक फैसल रहमान ने बताया कि पारिवारिक वजह के कारण मैं राज्यसभा चुनाव के मतदान में शामिल नहीं हो सका। मैं अपनी बीमार मां रुक्साना खातून के इलाज के लिए दिल्ली में हूं। ‘एक सीट का मौका था, महागठबंधन के पास दीपक यादव जी से बेहतर उम्मीदवार कौन हो सकता था, वह भी नहीं तो मुकेश सहनी थे, लेकिन उन्हें मौका ना देकर ऐसे वर्ग के व्यक्ति को उम्मीदवार बना दिया गया, जिसका जनाधार महागठबंधन के खिलाफ है। मैं NDA का साथ दे नहीं सकता हूं और राजद ने उम्मीदवार गलत चुना तो मैने वोट नहीं देना ही बेहतर समझा। रही बात मुझपर आरोप लगाने की, तो मुख्यमंत्री के सबसे चहेते सीट पर हमनें पूरे सरकारी तंत्र को हराकर विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। जनता के आशीर्वाद का कर्ज पूरे बिहार में विकास कार्यों से चुकता कर रहा हूं तो विरोधी जब बराबरी नहीं कर पाएगा तो बदनाम ही करेगा।
आशा है जनता दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग के लिए मेरे इस त्याग और समर्पण की भावना को समझेगी और विरोधियों के झांसे में नहीं आएगी।’ ये बातें कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट की है। ये वही विधायक हैं जों राज्यसभा चुनाव की वोटिंग में नहीं पहुंचे थे। जिसके बाद फेसबुक पोस्ट पर उन्होंने चुनाव में न आने की वजह बताई। वे मुकेश सहनी या बगहा चीनी मिल के मालिक दीपक यादव को उम्मीदवार बनाना चाहते थे। वहींस पोस्ट पर कुथ यूजर्स ने टिप्पणी भी की है। इनमें एक ने लिखा है कि ‘इसे नमकहरामी कहते हैं।’ विधायक सुरेंद्र प्रसाद का पोस्ट… फेसबुक यूजर्स ने विधायक के पोस्ट पर क्या-क्या लिखा… राजनीति अब सिद्धांतों की नहीं, बल्कि स्वार्थ की हो गई है मयूर आलम लिखते हैं, माननीय विधायक जी, जनता ने आपको किसी कुर्सी का मालिक नहीं, बल्कि अपनी आवाज बनाकर भेजा था। आपने जिस विचारधारा और गठबंधन के नाम पर वोट लिया, उसी INDIA Alliance को राज्यसभा में वोट न देकर आपने साफ कर दिया कि राजनीति अब सिद्धांतों की नहीं, बल्कि मौके और स्वार्थ की हो गई है।
दम है तो निर्दलीय चुनाव लड़ें, औकात समझ आ जएगा
मो. अरशद जमा ने कहा, विधायक जी जनता ने वोट आपको नहीं महागठबंधन को दिया था। तब आपके सिर पर ताज सजी है। अगर दम है तो निर्दलीय चुनाव लड़कर देख लीजिए। औकात समझ में आ जाएगा। इंडिविजुअल निर्णय लेने का अधिकार नहीं
अतूल पांडे ने लिखा है कि आप निर्दलीय नहीं है कि आपको इंडिविजुअल निर्णय लेने का अधिकार है। आप पार्टी के सिंबल पर लड़े हैं तो डिसीजन पार्टी ही लेती है। अकेले निर्दलीय लड़े रहते तब आपको दीपक यादव जी के कंधे पर बंदूक रख कर चलाने का अधिकार रहता। कुछ देर के लिए मान भी ले कि आप रावणों से घिरे हैं, तो भी सम्मान ‘कुंभकरण’ और ‘मेघनाद’ जैसे लोगों को ही मिलता है। क्योंकि वे अपने पार्टी के लिए मर गए, पर घात नहीं किए।
आप पार्टी से ऊपर नहीं आसिफ इकबाल ने लिखा है कि पार्टी का आदेश था। सब को मानना पड़ता है, आप पार्टी से ऊपर नहीं हैं। वहीं, इसके अलावा कुछ यूजर्स ने विधायक के पक्ष में भी लिखा है। उनका कहना है कि आपका निर्णय सही है। महागठबंधन के अन्य तीनों विधायकों ने भी वोट न देने का कारण बताया… अल्पसंख्यक-ओबीसी वर्ग से उम्मीदवार होना चाहिए था वहीं, मनिहारी से कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद सिंह ने कहा कि महागठबंधन की ओर से दलित, अल्पसंख्यक या ओबीसी वर्ग से उम्मीदवार नहीं बनाया गया। इन वर्गों की अनदेखी कर अन्य कोटे से प्रत्याशी उतारा गया, जिसके विरोध में मैंने मतदान का बहिष्कार किया।
विधायकों को सम्मान नहीं मिलेगा तो वोट भी नहीं मिलेगा फारबिसगंज से कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास ने कहा कि जब पार्टी के विधायकों को ही सम्मान नहीं मिलेगा तो वोट देने का कोई मतलब नहीं रह जाता। AD सिंह के अलावा दूसरा कैंडिडेट होता तो जरूर वोट देते। पार्टी की कार्रवाई के लिए तैयार हूं।
मां के इलाज में व्यस्त था ढाका से राजद विधायक फैसल रहमान ने बताया कि पारिवारिक वजह के कारण मैं राज्यसभा चुनाव के मतदान में शामिल नहीं हो सका। मैं अपनी बीमार मां रुक्साना खातून के इलाज के लिए दिल्ली में हूं।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *