पान के पत्तों की कीमतों में उछाल से किसानों के चेहरे खिले, उपभोक्ताओं पर बढ़ा बोझ

पान के पत्तों की कीमतों में उछाल से किसानों के चेहरे खिले, उपभोक्ताओं पर बढ़ा बोझ

बागलकोट क्षेत्र के उत्पादकों को मिला बेहतर दाम, मांग बनी रहने से बाजार गर्म
बागलकोट जिले में पान के पत्तों की कीमतों में हालिया तेजी ने किसानों को राहत दी है, जबकि उपभोक्ताओं और पान प्रेमियों को अब अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। क्षेत्र के किसानों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में पान पत्तों के दामों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जानकारी के अनुसार पिछले वर्ष दिसंबर तक लगभग 12 हजार पत्तों वाली एक खेप की कीमत करीब 2,000 से 3,000 रुपए मिल रही थी, जो अब बढ़कर 6,000 से 8,500 रुपए तक पहुंच गई है। इससे किसानों की आय में सुधार हुआ है। बागलकोट जिले के जगदल, नवलगी और बदामी तालुक के चोलाचगुड्डा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पान की खेती होती है। यहां उत्पादित पत्तों की आपूर्ति मुंबई, पुणे, हैदराबाद, बेंगलूरु और महाराष्ट्र के अन्य शहरों तक की जाती है। किसानों का कहना है कि इस बार ठंड और मौसम की मार से उत्पादन कुछ प्रभावित हुआ, जिससे बाजार में आपूर्ति सीमित रही और कीमतें बढ़ीं।

उपभोक्ताओं को अधिक खर्च करना पड़ रहा
पान की खेती पर प्रति एकड़ सालाना लगभग 2.5 से 3 लाख रुपए तक खर्च आता है। ऐसे में बेहतर दाम मिलने से किसानों को निवेश का उचित लाभ मिल रहा है। चोलाचगुड्डा क्षेत्र के पत्तों की खासियत यह है कि वे 10 से 12 दिनों तक खराब नहीं होते, इसलिए अन्य राज्यों में भी उनकी मांग बनी रहती है। हालांकि बढ़ती कीमतों का असर ग्राहकों पर साफ दिखाई दे रहा है। पहले जहां 25 से 30 पत्तों का दाम लगभग 10 रुपए था, वहीं अब एक पत्ता ही करीब एक रुपए में बिक रहा है। इससे पान दुकानदारों और नियमित उपभोक्ताओं को अधिक खर्च करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि क्षेत्र में स्थानीय थोक बाजार विकसित किया जाए तो बिचौलियों की भूमिका कम होगी और उत्पादकों को और बेहतर लाभ मिल सकता है। फिलहाल कीमतों की यह तेजी किसानों के लिए राहत का संदेश लेकर आई है।

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