संशोधित निर्देश जारी… 4 लाख कर्मियों को फायदा:बाद में भी पदोन्नति स्वीकारी तो मिल सकेगा उच्च वेतनमान

संशोधित निर्देश जारी… 4 लाख कर्मियों को फायदा:बाद में भी पदोन्नति स्वीकारी तो मिल सकेगा उच्च वेतनमान

वित्त विभाग ने समयमान वेतनमान से जुड़े लगभग 17 साल पुराने आदेश में बदलाव करके स्पष्टीकरण जारी किया है। साल 2008 में हुए आदेश में कहा गया था कि यदि सरकारी कर्मचारी पहले उच्चतर वेतनमान लेकर बाद में पदोन्नति से मना कर दें, तो उन्हें फिर बाद में उच्चतर वेतनमान का लाभ नहीं दिया जाएगा। अब संशोधित निर्देश जारी कर वित्त विभाग ने कहा कि अगर शासकीय कर्मी बाद में भी पदोन्नति स्वीकार कर लेते हैं तो उसको उच्च वेतनमान देने पर विचार कर सकते हैं। कुल 3 से 4 लाख शासकीय कर्मचारियों को इसका फायदा मिलेगा। कई बार पदो​न्नति नहीं लेते थे… बड़ी संख्या में वर्ग 3 और वर्ग 4 कर्मचारी कई बार पदोन्नति की जगह उच्चतर वेतनमान ले लेते हैं। इसकी मुख्य वजह ट्रांसफर होती है, क्योंकि पदोन्नत होकर कर्मचारियों को दूसरी जगह जाना पड़ सकता है। कई बार अधिकार और कार्यक्षेत्र भी वजह होते हैं। अब तक साल 2008 के आदेश के मुताबिक अगर कर्मचारी पदोन्नति से मना कर दे तो उसे बाद में उच्च वेतनमान नहीं दिया जाता था। उच्च वेतनमान के लाभ वापस करने की बाध्यता नहीं थी। अब स्पष्टीकरण के मुताबिक कर्मचारी द्वारा पदोन्नति अस्वीकार करने पर उच्च वेतनमान नहीं देय होगा, पर बाद में पदोन्नति स्वीकार कर ली जाती है तो पूर्व निर्देशों की कंडिका 4 के मुताबिक पात्रता के मुताबिक उच्च वेतनमान पर विचार कर लेंगे। किन पदों पर बनती है स्थिति: एलडीसी से यूडीसी पर, वन रक्षक से वनपाल, शिक्षकों के मामले के अलावा राजस्व विभाग पटवारी से राजस्व निरीक्षक पर पदोन्नति के मामले ज्यादा सामने आते हैं। अधिकतर ये स्थिति वर्ग 3 से जुड़े नियमित कर्मियों के मामले में बनती है। कर्मचारी संगठनों के मुताबिक शिक्षक कई बार उच्च्चतर वेतनमान ही लेते हैं, ताकि उन्हें दूर दराज के विद्यालयों में न जाना पड़े। ये कर्मचारियों के हितों में लिया गया निर्णय है। इससे बड़ी संख्या में कर्मचारियों को वित्तीय लाभ मिल सकेगा। – अशोक पांडे, अध्यक्ष-मप्र अधिकारी कर्मचारी संघ

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