17 मांगों को लेकर राजस्व कर्मियों का धरना:औरंगाबाद में 11 फरवरी से जारी है हड़ताल,अंचल से जुड़े काम में हो रही परेशानी

बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ के आह्वान पर औरंगाबाद जिला सहित पूरे बिहार के राजस्व कर्मचारी छुट्टी पर है। ये अपनी 17 सूत्री मांगों को लेकर पिछले 11 फरवरी से अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर हैं। इसी क्रम में आज दानी बिगहा में जिला स्तरीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा गया।धरना को संबोधित करते हुए संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि मई 2025 में 17 सूत्री मांगों को लेकर 27 दिनों तक चली हड़ताल के बाद 2 जून 2025 को तत्कालीन अपर मुख्य सचिव के साथ लिखित समझौता हुआ था। इस समझौते में राजस्व कर्मचारियों का ग्रेड पे 1900 से बढ़ाकर 2800 करने, पदनाम बदलकर सहायक राजस्व अधिकारी करने, निकटवर्ती जिलों में स्थानांतरण, क्षेत्रीय भत्ता देने तथा कार्यालयों में इंटरनेट और अन्य संसाधन उपलब्ध कराने जैसी महत्वपूर्ण मांगों पर सहमति बनी थी। बावजूद इसके अब तक इन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। मांगे पूरी नहीं होगी, तब तक जारी रहेगा हड़ताल कर्मचारियों ने कहा है कि सरकार की ओर से बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद समझौते का अनुपालन नहीं किया गया, जिसके कारण उन्हें दोबारा हड़ताल पर जाने को मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने यह भी मांग की कि पहले 31 मई 2025 तक हड़ताल कर लौटे कर्मचारियों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस लिया जाए और हड़ताल अवधि को नियमित करते हुए अवकाश स्वीकृत किया जाए। हड़ताल के कारण राजस्व विभाग के लगभग 68 प्रकार के काम पूरी तरह ठप हो गए हैं, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दाखिल-खारिज (नामांतरण), भूमि परिमार्जन, भू-अभिलेख सुधार, भूमि मापी, एलपीसी निर्गमन, जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र जारी करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य लंबित पड़े हैं। इसके अलावा जमीन से जुड़े ऑनलाइन आवेदन का सत्यापन, अंचल कार्यालयों में लंबित वादों का निष्पादन, भू-राजस्व वसूली, भूमि विवाद से संबंधित रिपोर्ट तथा आपदा मुआवजा सत्यापन जैसे कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। बिना काम कराए वापस लौट रहे लोग इसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। छात्रों के प्रमाण पत्र, बैंक ऋण के लिए आवश्यक एलपीसी, सामाजिक योजनाओं के फायदे के लिए आय-जाति प्रमाण पत्र और जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण जैसे जरूरी कार्य अटके पड़े हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। धरना के दौरान कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक उनकी 17 सूत्री मांगों पर विधिवत सरकारी आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी और कोई भी कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटेगा। कार्यक्रम में इंद्रजीत कुमार, अशोक कुमार, पुष्पमाला, वनपाल अवतार कुमार, वनरक्षी मो साबिर, राहुल कुमार, प्रिंस कुमार सिंह सहित कई कर्मचारी मौजूद रहे। बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ के आह्वान पर औरंगाबाद जिला सहित पूरे बिहार के राजस्व कर्मचारी छुट्टी पर है। ये अपनी 17 सूत्री मांगों को लेकर पिछले 11 फरवरी से अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर हैं। इसी क्रम में आज दानी बिगहा में जिला स्तरीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा गया।धरना को संबोधित करते हुए संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि मई 2025 में 17 सूत्री मांगों को लेकर 27 दिनों तक चली हड़ताल के बाद 2 जून 2025 को तत्कालीन अपर मुख्य सचिव के साथ लिखित समझौता हुआ था। इस समझौते में राजस्व कर्मचारियों का ग्रेड पे 1900 से बढ़ाकर 2800 करने, पदनाम बदलकर सहायक राजस्व अधिकारी करने, निकटवर्ती जिलों में स्थानांतरण, क्षेत्रीय भत्ता देने तथा कार्यालयों में इंटरनेट और अन्य संसाधन उपलब्ध कराने जैसी महत्वपूर्ण मांगों पर सहमति बनी थी। बावजूद इसके अब तक इन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। मांगे पूरी नहीं होगी, तब तक जारी रहेगा हड़ताल कर्मचारियों ने कहा है कि सरकार की ओर से बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद समझौते का अनुपालन नहीं किया गया, जिसके कारण उन्हें दोबारा हड़ताल पर जाने को मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने यह भी मांग की कि पहले 31 मई 2025 तक हड़ताल कर लौटे कर्मचारियों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस लिया जाए और हड़ताल अवधि को नियमित करते हुए अवकाश स्वीकृत किया जाए। हड़ताल के कारण राजस्व विभाग के लगभग 68 प्रकार के काम पूरी तरह ठप हो गए हैं, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दाखिल-खारिज (नामांतरण), भूमि परिमार्जन, भू-अभिलेख सुधार, भूमि मापी, एलपीसी निर्गमन, जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र जारी करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य लंबित पड़े हैं। इसके अलावा जमीन से जुड़े ऑनलाइन आवेदन का सत्यापन, अंचल कार्यालयों में लंबित वादों का निष्पादन, भू-राजस्व वसूली, भूमि विवाद से संबंधित रिपोर्ट तथा आपदा मुआवजा सत्यापन जैसे कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। बिना काम कराए वापस लौट रहे लोग इसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। छात्रों के प्रमाण पत्र, बैंक ऋण के लिए आवश्यक एलपीसी, सामाजिक योजनाओं के फायदे के लिए आय-जाति प्रमाण पत्र और जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण जैसे जरूरी कार्य अटके पड़े हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। धरना के दौरान कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक उनकी 17 सूत्री मांगों पर विधिवत सरकारी आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी और कोई भी कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटेगा। कार्यक्रम में इंद्रजीत कुमार, अशोक कुमार, पुष्पमाला, वनपाल अवतार कुमार, वनरक्षी मो साबिर, राहुल कुमार, प्रिंस कुमार सिंह सहित कई कर्मचारी मौजूद रहे।  

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