बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों और सरकार के बीच तनातनी बढ़ गई है। राज्य के 537 अंचलों के सीओ, आरओ, कई बंदोबस्त व राजस्व अधिकारियों ने रविवार को पटना में महाजुटान का निर्णय लिया है। बिरसा एवं बिरसा यूनाइटेड संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले संघर्ष को बढ़ाते हुए महाधरना/महाआंदोलन के कार्यक्रम की घोषणा की जा सकती है। संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने कहा कि सरकार के राजस्व सेवा के अधिकारियों के खिलाफ काम करने से राजस्व सेवा के संवर्गीय अधिकारों, सेवा संरचना की निरंतरता तथा राजस्व प्रशासन की संस्थागत व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है। 2 मार्च को राज्यव्यापी काला बिल्ला लगा “पेन-डाउन” आंदोलन किया गया। सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो 9 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल (सामूहिक अवकाश) शुरू की गई। मोर्चा के जितेन्द्र पाण्डेय ने कहा कि हम राजस्व प्रशासन की दक्षता, सेवा संरचना की तार्किक निरंतरता तथा संवर्गीय अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से हड़ताल पर हैं। रजनीकांत ने कहा कि यह आंदोलन टकराव नहीं न्यायसंगत मांगों के सम्मानजनक समाधान के लिए किया जा रहा है। संघ ने कहा कि 5 फरवरी को मिले आश्वासनों पर विश्वास जतते हुए संघ ने तब आंदोलन को सशर्त स्थगित किया था। पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा अब तक इन विषयों पर ठोस एवं लिखित निर्णय नहीं किया गया है। दूसरी तरफ विभिन्न स्तरों पर अनावश्यक प्रशासनिक दबाव, स्पष्टीकरण तथा जांच जैसी कार्रवाइयों कर राजस्व अधिकारियों के मनोबल को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। इस कारण ही एकजुटता का मैसेज देने के लिए महाजुटान कार्यक्रम बनाया गया है। हड़ताली अफसरों की मुख्य मांगें… डीसीएलआर पद पर राजस्व सेवा के अधिकारियों की वरीयता के आधार पर पोस्टिंग एसडीएम, अपर समाहर्ता (आपदा) तथा लोक शिकायत निवारण पदों में पोस्टिंग कैबिनेट के निर्णय संख्या 23 व 30 को वापस करना राजस्व से संबंधित प्रमुख पदों का संवर्गीय संरक्षण सेवा शर्तों, पदोन्नति, वित्तीय अधिकार, मानव संसाधन एवं प्रशासनिक स्वतंत्रता से संबंधित लंबित मुद्दों का समाधान बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों और सरकार के बीच तनातनी बढ़ गई है। राज्य के 537 अंचलों के सीओ, आरओ, कई बंदोबस्त व राजस्व अधिकारियों ने रविवार को पटना में महाजुटान का निर्णय लिया है। बिरसा एवं बिरसा यूनाइटेड संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले संघर्ष को बढ़ाते हुए महाधरना/महाआंदोलन के कार्यक्रम की घोषणा की जा सकती है। संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने कहा कि सरकार के राजस्व सेवा के अधिकारियों के खिलाफ काम करने से राजस्व सेवा के संवर्गीय अधिकारों, सेवा संरचना की निरंतरता तथा राजस्व प्रशासन की संस्थागत व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है। 2 मार्च को राज्यव्यापी काला बिल्ला लगा “पेन-डाउन” आंदोलन किया गया। सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो 9 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल (सामूहिक अवकाश) शुरू की गई। मोर्चा के जितेन्द्र पाण्डेय ने कहा कि हम राजस्व प्रशासन की दक्षता, सेवा संरचना की तार्किक निरंतरता तथा संवर्गीय अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से हड़ताल पर हैं। रजनीकांत ने कहा कि यह आंदोलन टकराव नहीं न्यायसंगत मांगों के सम्मानजनक समाधान के लिए किया जा रहा है। संघ ने कहा कि 5 फरवरी को मिले आश्वासनों पर विश्वास जतते हुए संघ ने तब आंदोलन को सशर्त स्थगित किया था। पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा अब तक इन विषयों पर ठोस एवं लिखित निर्णय नहीं किया गया है। दूसरी तरफ विभिन्न स्तरों पर अनावश्यक प्रशासनिक दबाव, स्पष्टीकरण तथा जांच जैसी कार्रवाइयों कर राजस्व अधिकारियों के मनोबल को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। इस कारण ही एकजुटता का मैसेज देने के लिए महाजुटान कार्यक्रम बनाया गया है। हड़ताली अफसरों की मुख्य मांगें… डीसीएलआर पद पर राजस्व सेवा के अधिकारियों की वरीयता के आधार पर पोस्टिंग एसडीएम, अपर समाहर्ता (आपदा) तथा लोक शिकायत निवारण पदों में पोस्टिंग कैबिनेट के निर्णय संख्या 23 व 30 को वापस करना राजस्व से संबंधित प्रमुख पदों का संवर्गीय संरक्षण सेवा शर्तों, पदोन्नति, वित्तीय अधिकार, मानव संसाधन एवं प्रशासनिक स्वतंत्रता से संबंधित लंबित मुद्दों का समाधान


