बिहार में राजस्व कर्मचारियों का गुस्सा देखने को मिला है। लंबे समय से लंबित मांगों और सरकार की उदासीनता से तंग आकर बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान कर दिया है। संघ ने जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर स्पष्ट कर दिया है कि यदि 10 फरवरी तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 11 फरवरी से पूरे प्रदेश में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो जाएगी। आंदोलन की शुरुआत हो चुकी है कर्मचारियों ने अपना विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है। 3 फरवरी को पूरे बिहार में राजस्व कर्मचारियों ने काला बिल्ला लगाकर काम किया। आज यानी 5 फरवरी को राज्य के सभी जिला मुख्यालय नालन्दा के साथ-साथ पटना के गर्दनीबाग में एक दिवसीय धरना दिया गया है। बिहार राज्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष राम प्रताप सिंह ने कहा कि यदि सरकार अब भी नहीं चेती, तो 11 फरवरी से हजारों राजस्व कर्मचारी सामूहिक रूप से काम बंद कर देंगे। इससे प्रदेश भर में राजस्व संबंधी कार्य ठप हो जाएंगे। आठ महीने बाद भी नहीं मानी गई बात राजस्व कर्मचारियों का आरोप है कि जून 2025 में अपर मुख्य सचिव और विभागीय अधिकारियों के साथ हुई वार्ता में कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी थी। हड़ताल अवधि का सामंजन, गृह जिले के पास स्थानांतरण, और मोबाइल खर्च की प्रतिपूर्ति जैसे वादे किए गए थे। लेकिन आठ महीने बीत जाने के बाद भी इन फैसलों को अमल में नहीं लाया गया। यही वजह है कि कर्मचारियों में भारी आक्रोश है और उन्हें लग रहा है कि सरकार उनकी समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है। राजस्व कर्मचारियों की मांगों की सूची लंबी है और उनका कहना है कि ये सभी न्यायसंगत हैं। कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग है कि उनका ग्रेड पे 1900 (लेवल-2) से बढ़ाकर 2800 (लेवल-5) किया जाए। साथ ही, उनका पदनाम बदलकर ‘सहायक राजस्व पदाधिकारी’ किया जाए, जैसा कि पहले निर्णय लिया जा चुका है। 15 साल से अधिक सेवा दे चुके कर्मचारियों को ACP/MACP का लाभ तक नहीं मिला है। एक कर्मचारी को दो-तीन हल्के या पंचायतों का प्रभार दे दिया जाता है, जो व्यावहारिक नहीं है। संघ की मांग है कि प्रत्येक कर्मचारी को केवल एक हल्का या पंचायत का प्रभार दिया जाए। संघ ने फैसला किया है कि यदि 10 फरवरी तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होती, तो 11 फरवरी से कर्मचारी स्वयं अतिरिक्त प्रभार छोड़ देंगे। सरकारी छुट्टी पर करते है काम कर्मचारियों को रविवार और सरकारी छुट्टियों में भी काम करना पड़ता है। उनकी मांग है कि कार्य अवधि सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित की जाए और छुट्टियों में काम न लिया जाए। बुनियादी सुविधाओं का अभाव यह शर्मनाक स्थिति है कि राजस्व कर्मचारियों के पास बैठने के लिए न तो अपना कार्यालय है, न कुर्सी-टेबल और न ही अलमारी। उन्हें पंचायत भवन या अन्य निर्धारित स्थानों पर कार्यालय और जरूरी संसाधन मुहैया कराए जाने की मांग है। ऑनलाइन काम के लिए इंटरनेट रिचार्ज, मॉडम और डोंगल की व्यवस्था नहीं है। क्षेत्र भ्रमण के लिए मोटरसाइकिल और ईंधन की भी कोई सुविधा नहीं दी जाती। नवनियुक्त कर्मचारियों को उनके गृह जिले से दूर भेज दिया जाता है। मांग है कि उनका पदस्थापन गृह जिले में या उसके आसपास किया जाए। कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया है कि विभाग “असंवैधानिक फरमान” जारी कर रहा है और कर्मचारियों के साथ अन्याय हो रहा है। संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले आंदोलन और हड़ताल से होने वाली किसी भी परेशानी की पूरी जिम्मेदारी राजस्व और भूमि सुधार विभाग और बिहार सरकार की होगी। बिहार में राजस्व कर्मचारियों का गुस्सा देखने को मिला है। लंबे समय से लंबित मांगों और सरकार की उदासीनता से तंग आकर बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान कर दिया है। संघ ने जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर स्पष्ट कर दिया है कि यदि 10 फरवरी तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 11 फरवरी से पूरे प्रदेश में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो जाएगी। आंदोलन की शुरुआत हो चुकी है कर्मचारियों ने अपना विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है। 3 फरवरी को पूरे बिहार में राजस्व कर्मचारियों ने काला बिल्ला लगाकर काम किया। आज यानी 5 फरवरी को राज्य के सभी जिला मुख्यालय नालन्दा के साथ-साथ पटना के गर्दनीबाग में एक दिवसीय धरना दिया गया है। बिहार राज्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष राम प्रताप सिंह ने कहा कि यदि सरकार अब भी नहीं चेती, तो 11 फरवरी से हजारों राजस्व कर्मचारी सामूहिक रूप से काम बंद कर देंगे। इससे प्रदेश भर में राजस्व संबंधी कार्य ठप हो जाएंगे। आठ महीने बाद भी नहीं मानी गई बात राजस्व कर्मचारियों का आरोप है कि जून 2025 में अपर मुख्य सचिव और विभागीय अधिकारियों के साथ हुई वार्ता में कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी थी। हड़ताल अवधि का सामंजन, गृह जिले के पास स्थानांतरण, और मोबाइल खर्च की प्रतिपूर्ति जैसे वादे किए गए थे। लेकिन आठ महीने बीत जाने के बाद भी इन फैसलों को अमल में नहीं लाया गया। यही वजह है कि कर्मचारियों में भारी आक्रोश है और उन्हें लग रहा है कि सरकार उनकी समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है। राजस्व कर्मचारियों की मांगों की सूची लंबी है और उनका कहना है कि ये सभी न्यायसंगत हैं। कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग है कि उनका ग्रेड पे 1900 (लेवल-2) से बढ़ाकर 2800 (लेवल-5) किया जाए। साथ ही, उनका पदनाम बदलकर ‘सहायक राजस्व पदाधिकारी’ किया जाए, जैसा कि पहले निर्णय लिया जा चुका है। 15 साल से अधिक सेवा दे चुके कर्मचारियों को ACP/MACP का लाभ तक नहीं मिला है। एक कर्मचारी को दो-तीन हल्के या पंचायतों का प्रभार दे दिया जाता है, जो व्यावहारिक नहीं है। संघ की मांग है कि प्रत्येक कर्मचारी को केवल एक हल्का या पंचायत का प्रभार दिया जाए। संघ ने फैसला किया है कि यदि 10 फरवरी तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होती, तो 11 फरवरी से कर्मचारी स्वयं अतिरिक्त प्रभार छोड़ देंगे। सरकारी छुट्टी पर करते है काम कर्मचारियों को रविवार और सरकारी छुट्टियों में भी काम करना पड़ता है। उनकी मांग है कि कार्य अवधि सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित की जाए और छुट्टियों में काम न लिया जाए। बुनियादी सुविधाओं का अभाव यह शर्मनाक स्थिति है कि राजस्व कर्मचारियों के पास बैठने के लिए न तो अपना कार्यालय है, न कुर्सी-टेबल और न ही अलमारी। उन्हें पंचायत भवन या अन्य निर्धारित स्थानों पर कार्यालय और जरूरी संसाधन मुहैया कराए जाने की मांग है। ऑनलाइन काम के लिए इंटरनेट रिचार्ज, मॉडम और डोंगल की व्यवस्था नहीं है। क्षेत्र भ्रमण के लिए मोटरसाइकिल और ईंधन की भी कोई सुविधा नहीं दी जाती। नवनियुक्त कर्मचारियों को उनके गृह जिले से दूर भेज दिया जाता है। मांग है कि उनका पदस्थापन गृह जिले में या उसके आसपास किया जाए। कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया है कि विभाग “असंवैधानिक फरमान” जारी कर रहा है और कर्मचारियों के साथ अन्याय हो रहा है। संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले आंदोलन और हड़ताल से होने वाली किसी भी परेशानी की पूरी जिम्मेदारी राजस्व और भूमि सुधार विभाग और बिहार सरकार की होगी।


