मुजफ्फरपुर के काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र के आमगोला निवासी रिटायर्ड बैंककर्मी महेश गामी (66) साइबर अपराधियों के शिकार हो गए। पीड़ित के अनुसार, 26 मार्च 2026 को उनके व्हाट्सएप पर एक अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल पहलगाम से जुड़ी आतंकी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है। 5 करोड़ के केस में फंसाने की धमकी ठगों ने महेश गामी को बताया कि उनके नाम पर 5 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है और उन्हें 10 प्रतिशत का लाभार्थी बताया गया है। इसके बाद कार्रवाई से बचाने के नाम पर मानसिक दबाव बनाना शुरू कर दिया गया। 10 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा पीड़ित ने बताया कि 26 मार्च से 7 अप्रैल तक उन्हें लगातार व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा। उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने और किसी को जानकारी नहीं देने की सख्त हिदायत दी गई। इस दौरान दूसरे नंबर से खुद को ‘उच्च अधिकारी’ बताकर भी कॉल किए जाते रहे, जिससे डर का माहौल बना रहा। फर्जी सरकारी दस्तावेज भेजकर किया गुमराह अपराधियों ने सुप्रीम कोर्ट, आरबीआई, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के नाम से फर्जी दस्तावेज भेजे। इन दस्तावेजों में पीड़ित का आधार नंबर, बैंक खाता और उन पर मानव तस्करी (IPC 370), धोखाधड़ी (IPC 420), साजिश (IPC 120) जैसे गंभीर आरोप दर्शाए गए थे, जिससे वे पूरी तरह भयभीत हो गए। दो बार में 67 लाख की ठगी डर और दबाव में आकर महेश गामी ने दो किस्तों में कुल 67 लाख रुपए ठगों के बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। पहली बार 4 अप्रैल को 42 लाख और दूसरी बार 6 अप्रैल को 25 लाख रुपए भेजे गए। ठगी का एहसास होते ही साइबर थाने में शिकायत जब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने तत्काल साइबर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इसके आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। यह घटना एक बार फिर साइबर अपराधियों के नए और खतरनाक तरीकों को उजागर करती है, जिसमें डर और दबाव बनाकर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। मुजफ्फरपुर के काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र के आमगोला निवासी रिटायर्ड बैंककर्मी महेश गामी (66) साइबर अपराधियों के शिकार हो गए। पीड़ित के अनुसार, 26 मार्च 2026 को उनके व्हाट्सएप पर एक अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल पहलगाम से जुड़ी आतंकी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है। 5 करोड़ के केस में फंसाने की धमकी ठगों ने महेश गामी को बताया कि उनके नाम पर 5 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है और उन्हें 10 प्रतिशत का लाभार्थी बताया गया है। इसके बाद कार्रवाई से बचाने के नाम पर मानसिक दबाव बनाना शुरू कर दिया गया। 10 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा पीड़ित ने बताया कि 26 मार्च से 7 अप्रैल तक उन्हें लगातार व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा। उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने और किसी को जानकारी नहीं देने की सख्त हिदायत दी गई। इस दौरान दूसरे नंबर से खुद को ‘उच्च अधिकारी’ बताकर भी कॉल किए जाते रहे, जिससे डर का माहौल बना रहा। फर्जी सरकारी दस्तावेज भेजकर किया गुमराह अपराधियों ने सुप्रीम कोर्ट, आरबीआई, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के नाम से फर्जी दस्तावेज भेजे। इन दस्तावेजों में पीड़ित का आधार नंबर, बैंक खाता और उन पर मानव तस्करी (IPC 370), धोखाधड़ी (IPC 420), साजिश (IPC 120) जैसे गंभीर आरोप दर्शाए गए थे, जिससे वे पूरी तरह भयभीत हो गए। दो बार में 67 लाख की ठगी डर और दबाव में आकर महेश गामी ने दो किस्तों में कुल 67 लाख रुपए ठगों के बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। पहली बार 4 अप्रैल को 42 लाख और दूसरी बार 6 अप्रैल को 25 लाख रुपए भेजे गए। ठगी का एहसास होते ही साइबर थाने में शिकायत जब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने तत्काल साइबर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इसके आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। यह घटना एक बार फिर साइबर अपराधियों के नए और खतरनाक तरीकों को उजागर करती है, जिसमें डर और दबाव बनाकर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।


