बाड़मेर-रामसर हाइवे से शहर से महज 5 किलोमीटर दूर एक फार्म हाउस ऐसा भी है जिसके आधे हिस्से में हाइटेंशन 400 केवी लाइट का पोल आया हुआ है। हाइवे के किनारे बाड़मेर से भीनमाल जाने वाली हाइटेंशन तार का पोल लगा हुआ है, लेकिन यहां नजदीक के भूखंड मालिक ने निर्माण के दौरान हाइटेंशन पोल का आधा हिस्सा बाउंड्री के अंदर है, आधा बाहर है। जबकि पोल लगाने के बाद अब बाउंड्री का निर्माण किया गया है। पोल वॉल्टेज करंट के बावजूद जान जोखिम में डाल कर पोल के अंदर से बाउंड्री का निर्माण करवाया गया है। बारिश के दिनों में यहां खतरा ओर बढ़ जाता है। यहां लोगों का आवागमन हर समय रहता है। विभाग की अनदेखी के कारण कभी भी यहां बड़ा हादसा हो सकता है। कानून: विभाग बिना मुआवजे निर्माण गिरा सकता है भारत सरकार के केंद्रीय इलेक्ट्रिसिटी ऑथिरिटी (CEA) के नियमों के अनुसार, हाईटेंशन टावर के एक निश्चित दायरे में किसी भी प्रकार का पक्का निर्माण, घर या बाउंड्री वॉल बनाना वर्जित है। टावर के दोनों तरफ लगभग 24 से 26 मीटर की जगह खाली छोड़ना अनिवार्य है। धारा 138 के तहत 3 साल तक की जेल, जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है। बिजली विभाग बिना किसी मुआवजे के ऐसे अवैध निर्माण को गिराने का अधिकार रखता है। “हाईटेंशन लाइन टॉवर के अंदर से निर्माण नहीं किया जा सकता। यह कानूनी रूप से अपराध है। इस तरह का निर्माण हमारे ध्यान में नहीं आया।”
-राजेश सोनी, एक्सईएन, प्रसारण निगम, बाड़मेर।


