गिद्धों के लिए प्राकृतिक घर बना रिजर्व एरिया का दमोह झरना,
दिखा झुण्ड विभाग ने बढ़ाई निगरानी, खाना जांचने खोली जाएगी लैब
विभाग अब गिद्धों की आबादी बढ़ाने पर दे रहा जोर
धौलपुर. धौलपुर करौली टाइगर रिजर्व एरिया में लंबी गर्दन के विलुप्त गिद्धों की पांच प्रजातियां मिली हैं। जिससे वाइल्ड लाइफ विभाग में खुशी की लहर दौड़ रही है। विभाग ने आनन-फानन में गिद्धों की निगरानी शुरू कर दी है। देखा जाए तो टाइगर रिजर्व एरिया गिद्धों के लिए बेहतर हैबिटेट बनता जा रहा है। विभाग भी अब गिद्धों के संरक्षण सहित इसको विकसित करने पर जोर दे रहा है।अगर सब सही रहा तो आने वाले दिनों में जिले के सरमथुरा उपखंड क्षेत्र के दमोह क्षेत्र में गिद्धों के झुंड मिलने से धौलपुर करौली टाइगर रिजर्व एरिया राजस्थान के अन्य टाइगर रिजर्व और सेंचुरियों में मॉडल बन कर सामने आएगा, क्योंकि दमोह क्षेत्र में गिद्धों का कुनबा बढ़ रहा है। 90 के दशक में गिद्ध नजर नहीं आने के बाद भरतपुर जिले के केवलादेव घना पक्षी विहार में सबसे पहले यह बात सामने आई थी कि गिद्धों का खात्मा हो गया है। इससे देश दुनियां में चिंता की लहर पैदा हो गई थी, लेकिन धौलपुर जिले के दमोह क्षेत्र में गिद्धों का कुनबा लगातार बढ़ता जा रहा है, जो कि सुखद समाचार है।
गिद्धों की यह प्रजातियां मिलीं
दमोह क्षेत्र में इंडियन वल्चर, यूरेसियन ग्रिफ्फिन, हिमालयन ग्रिफ्फिन, व्हाइट रम्पड वल्चर, रेड हेडेड वल्चर, इजप्टियन वल्चर, सिनेरियस वल्चर की प्रजातियां मिली हैं। इनमें से इंडियन वल्चर और इजप्टियन वल्चर ने अपना यही बसेरा कर लिया है और यही नेस्टिंग भी कर रहे हैं। कजाकिस्तान से यूरेसियन ग्रिफ्फिन वल्चर भी यहां पहुंचे हैं। हिमालयन ग्रिफ्फिन के साथ अन्य वल्चर के झुंड यहां मिले हैं और काफी समय से यहां अपना बसेरा बनाए हुए हैं, जो वन्यजीव प्रेमियों के लिए सुखद खबर है।
दमोह झरना सबसे बड़ी वजह
धौलपुर जिले के टाइगर रिजर्व एरिया में जानवरों के संरक्षण को लेकर लगातार कार्य किए जा रहे हैं। जिसका ही परिणाम है कि सुखद समाचार भी सामने आ रहे हैं। देखा जाए तो टाइगर रिजर्व एरिया के दमोह क्षेत्र में एक प्राकृतिक झरना है। जिस कारण यह स्थल गिद्धों का एक अच्छा हैबिटॉट यानी प्राकृतिक घर बनता जा रहा है। यहां प्रवासी और रेसिडेंसियल गिद्ध मिले हैं।
विभाग कर रहा लगातार निगरानी
प्रवासी गिद्धों में यूरेसियन ग्रिफ्फिन, हिमालयन ग्रिफ्फिन, सिनेरियस वल्चर, रेड हेडेड वल्चर के साथ इंडियन वल्चर, इजप्टियन वल्चर बसेरा कर रहे हैं। दमोह और उसके आस-पास का एरिया गिद्धों के लिए बहुत ही अच्छा हैबिटॉट (प्राकृतिक घर) बन गया है और नेस्टिंग भी कर रहे हैं। गिद्धों की सुरक्षा के लिए स्टाफ वहां लगातार निगरानी कर रहा है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की अड़चन नहीं हो और गिद्धों को पूरी सुरक्षा मिले।
गिद्धों को उपलब्ध कराया जाएगा भोजन
वाइल्ड लाइफ विभाग अब गिद्धों के भोजन के लिए मृत जानवरों की जांच के लिए लैब खोलने पर विचार कर रहा है। जिससे गिद्धों का सुरक्षित भोजन स्थल के लिए योजना के तहत इसमें पशुओं में प्रतिबंधित दवा रहित भोजन आसानी से गिद्धों को उपलब्ध कराया जाएगा। दमोह क्षेत्र में सात प्रकार के माइग्रेटरी और स्थानीय वल्चरों की आबादी मिल रही है, जो प्रकृति व पर्यावरण के लिए अच्छे संकेत माने जा रहे हैं।
टाइगर रिजर्व एरिया के दमोह क्षेत्र में विलुप्त गिद्धों की पांच प्रजातियां मिली हैं। जिनका संरक्षण किया जा रहा है। गिद्धों की संख्या विकसित करने उनके खाने की जांच करने लैब भी विकसित की जाएगी।
-डॉ. आशीष व्यास, उपवन संरक्षक


