DDU में रिसर्च एक्सीलेंस अवार्ड:111 रिसर्चर सम्मानित हुए, डॉ. अंबरीश दूसरी बार बने बेस्ट रिसर्चर

DDU में रिसर्च एक्सीलेंस अवार्ड:111 रिसर्चर सम्मानित हुए, डॉ. अंबरीश दूसरी बार बने बेस्ट रिसर्चर

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में रविवार को रिसर्च एक्सीलेंस अवार्ड का आयोजन किया गया। इस दौरान रिसर्च में बेहतरीन कार्य करने वाले 111 लोगों को सम्मानित किया गया। कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने अपने हाथों से सभी सिलेक्टेड कैंडिडेट्स को यह अवार्ड दिया। वहीं बेस्ट रिसर्चर अवार्ड फिजिक्स डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. अंबरीश को मिला। इस दौरान मुख्य अतिथि लखनऊ और मदन मोहन मालवीय प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जय प्रकाश सैनी की भी मौजूद थे। क्वारटाइल रैंकिंग के आधार पर हुआ सिलेक्शन विश्व विद्यालय प्रबंधन के अनुसार यह अवार्ड मुख्य रूप से शोधार्थियों द्वारा स्कोपस या वेब ऑफ साइंस में लिस्टेड और क्वारटाइल रैंकिंग (Q1-Q4) जर्नल्स में किए गए प्रकाशनों के मूल्यांकन के आधार पर इस अवार्ड के लिए सिलेक्शन हुआ। इनका उद्देश्य उच्च प्रभाव वाले अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशन को प्रोत्साहित करना और गोरखपुर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिष्ठा और शोध अभिवृति को बढ़ाना है। 111 रिसर्चर और प्रोफेसर को मिला अवार्ड
ये पुरस्कार प्लेटिनम, डायमंड, गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज श्रेणियों में विभाजित किए गए थे, जो जर्नल की रैंकिंग के आधार पर विभिन्न स्तरों की सफलता को दर्शाते हैं। इसमें भौतिकी विभाग के 40, रसायन विज्ञान के 27, वनस्पति विज्ञान के 20, गणित और सांख्यिकी के 9, जैवप्रौद्योगिकी के 4, प्राणि विज्ञान के 3, मनोवैज्ञान के 3 समेत इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक सूक्ष्मजैविकी, भूगोल, फार्मेसी, इंजीनियरिंग सहित कुल 111 शोधकर्ता शामिल हैं। इन्हें मिली 10 हजार की प्राइज मनी इनमें 10,000 रुपए या उससे अधिक पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों में भौतिकी के डॉ. विनीत कुमार सिंह, डॉ. अम्बरीश कुमार श्रीवास्तव, गणित के डॉ. राजेश कुमार, भौतिकी के डॉ. सिंटू कुमार, रसायन के डॉ. आनन्द रत्नम, वनस्पति विज्ञान की डॉ. स्मृति मल्ल, जैवप्रौद्योगिकी विभाग के प्रो. राजर्षि गौर, वनस्पति विज्ञान के डॉ. रामवंत गुप्ता, इलेक्ट्रॉनिक्स की डॉ. कुसुम रावत, रसायन के डॉ. आलोक कुमार सिंह, जैवप्रौद्योगिकी के प्रो. दिनेश यादव, रसायन विज्ञान विभाग के डॉ. सचिन कुमार सिंह, भौतिकी के डॉ. दीपाश शेखर सैनी, वनस्पति विज्ञान की प्रो. पूजा सिंह, भौतिकी के डॉ. कृपा मणि मिश्रा शामिल हैं। वहीं 7000 या इससे अधिक पुरस्कार राशि प्राप्त करने वाले शोध छात्रों में भौतिकी विभाग की हर्षिता श्रीवास्तव, रसायन विज्ञान के अमित चौहान, भौतिकी के सतीश कुमार यादव, रसायन विज्ञान के मनोज कुमार, जंतु विज्ञान की नंदिनी सिंह, भौतिकी की वंदना मिश्रा तथा रसायन विज्ञान की दिव्याक्षी आर्य शामिल हैं। फिजिक्स डिपार्टमेंट को सबसे ज्यादा अवार्ड मिले
इनमें सर्वाधिक पुरस्कार भौतिकी विभाग के शोधकर्ताओं ने हासिल किए हैं। वहीं भौतिकी विभाग के ही डॉ. अम्बरीश कुमार श्रीवास्तव की शोध गतिविधियों के व्यापक विश्लेषण के आधार पर, जिसमें Q1/Q2/Q3/Q4 जर्नल्स में प्रकाशन, पेटेंट (प्रकाशित या स्वीकृत), प्रकाशित पुस्तकें और परियोजनाएं (स्वीकृत और जारी) शामिल हैं, “सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता पुरस्कार” दिया गया है। इसमें ₹ 21,000/- की नकद राशि, स्मृति चिन्ह और एक विशेष मान्यता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। इस पुरस्कार के लिए कुल 21 प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं। जिसमें भौतिकी विभाग के डॉ. अम्बरीश कुमार श्रीवास्तव को सर्वाधिक 218 अंक मिले। वहीं दूसरे पर रसायन विज्ञान के डॉ. आनन्द रत्नम और तीसरे स्थान पर जैवप्रौद्योगिकी के प्रो दिनेश यादव रहे। ज्ञात हो पिछले वर्ष भी डॉ. अम्बरीश कुमार श्रीवास्तव को ही सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता का पुरस्कार प्राप्त हुआ था। कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने दी बधाई सभी पुरस्कृत शोधकर्ताओं को बधाई देते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान उनके शोधकर्ताओं, जिनमें शिक्षक और छात्र दोनों शामिल हैं, से होती है। हमें आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि इस पहल से विश्वविद्यालय के शोध वातावरण में नई ऊर्जा का संचार होगा। आने वाले समय में विश्वविद्यालय की वैश्विक छवि एवं रैंकिंग में बढ़ोत्तरी होगी। बहुविषयी, अंतर्विषयी शोधों पर दे जोर- प्रो. जे पी सैनी
मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सैनी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इससे विश्वविद्यालय की रैंकिंग में बहुत सुधार होगा। उन्होंने शोधकर्ताओं से अपने शोध पत्रों में सतत विकास लक्ष्यों का ध्यान रखने का आवाहन किया। इसके साथ ही उन्होंने कला संकाय के शोधकर्ताओं को सोशल साइंस साइटेशन इंडेक्स्ड जर्नल्स में प्रकाशन कराने पर जोर दिया।

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