Republic Day 2026: कागज नहीं, कला का अजूबा… गणतंत्र दिवस पर मेहमानों को मिलेगा ‘अहिंसा सिल्क’ और बांस वाला शाही न्योता

Republic Day 2026: कागज नहीं, कला का अजूबा… गणतंत्र दिवस पर मेहमानों को मिलेगा ‘अहिंसा सिल्क’ और बांस वाला शाही न्योता

Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाला ‘एट होम’ कार्यक्रम इस बार केवल एक औपचारिक मिलन नहीं, बल्कि भारत की ‘अष्टलक्ष्मी’ यानी उत्तर-पूर्वी राज्यों की कला का महाकुंभ बनने जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस साल के निमंत्रण पत्र को उत्तर-पूर्व के उन गुमनाम कारीगरों को समर्पित किया है, जिनकी उंगलियां सदियों से भारत की सांस्कृतिक विरासत को बुन रही हैं।

​बांस का पिटारा और असम की चित्रकारी

​अहमदाबाद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) द्वारा तैयार यह निमंत्रण पत्र किसी अजूबे से कम नहीं है। मेहमानों को मिलने वाला कार्ड एक खास बॉक्स में होगा, जो त्रिपुरा की ट्रेडिशनल बैम्बू मैट (बांस की चटाई) से बना है। इसके कवर पर असम की ऐतिहासिक पांडुलिपि चित्रकला की झलक है, तो वहीं मेघालय के धुएं में पकाए गए बांस के आभूषण इसे एक शाही लुक दे रहे हैं।

​पीस सिल्क और दुर्लभ वन्यजीवों का संगम

​जब मेहमान राष्ट्रपति भवन पहुंचेंगे, तो उनका स्वागत एरी सिल्क के स्टोल से किया जाएगा। इसे अहिंसा सिल्क भी कहा जाता है क्योंकि इसको बनाने में रेशम के कीड़ों को मारा नहीं जाता। इस स्टोल पर उत्तर-पूर्व की जैव-विविधता को उकेरा गया है, जैसे:

  • ​नागालैंड- राजकीय पशु मिथुन और रोडोडेंड्रॉन फूल।
  • ​मणिपुर- दुर्लभ शिरुई लिली और संगाई हिरण।
  • ​मिजोरम व त्रिपुरा- रेड वांडा ऑर्किड और नागकेसर के फूलों की सुंदरता।

​एक स्क्रॉल में समाए आठ राज्य

​निमंत्रण के अंदर एक अष्टकोणीय (Octagonal) बांस का स्क्रॉल है। इसे खोलते ही उत्तर-पूर्व की आठ कलाएं जीवंत हो उठती हैं। इसमें अरुणाचल का मोन शुगु कागज, मणिपुर की प्रसिद्ध लॉन्गपी काली मिट्टी के बर्तन, सिक्किम की बिछुआ घास की कढ़ाई और मिजोरम का पुआन चेई वस्त्र शामिल है। यह पूरा डिजाइन महिलाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ‘लॉइन लूम’ (Loin Loom) से इंस्पायर्ड है।

​विरासत को सहेजने की अनूठी पहल

​राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे साझा करते हुए कहा कि यह निमंत्रण उन कारीगरों के प्रति सम्मान है जिन्होंने आधुनिकता के दौर में भी अपनी पारंपरिक तकनीकों को जीवित रखा है। यह केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक यादगार कलेक्टर आइटम है जिसे लोग उत्सव के बाद भी अपने घरों में सजाकर रख सकेंगे।

​इस बार का ‘एट होम’ कार्ड बताता है कि दिल्ली के गलियारों में अब उत्तर-पूर्व की गूंज और भी गहरी होने वाली है।

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