बिहार में हॉकी के भविष्य को लेकर चल रही कानूनी उठापटक के बीच खिलाड़ियों के लिए राहत भरी खबर आई है। दिल्ली की साकेत कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आगामी नेशनल चैंपियनशिप में बिहार की टीम की भागीदारी का रास्ता साफ कर दिया है। न्यायालय के आदेश के बाद अब हॉकी बिहार के बजाय ‘बिहार राज्य खेल प्राधिकरण’ (BSSA) राज्य की टीमों का चयन और संचालन करेगा। यह निर्णय हॉकी बिहार के निबंधन (रजिस्ट्रेशन) के रद्द होने और उससे जुड़ी कानूनी जटिलताओं को देखते हुए खिलाड़ियों के हितों की रक्षा के लिए लिया गया है। दरअसल, 25 फरवरी 2026 को बिहार सरकार के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने अनिवार्य नियमों के उल्लंघन के कारण हॉकी बिहार के निबंधन को रद्द कर दिया था। निबंधन रद्द होने के बाद तकनीकी रूप से यह संस्था किसी भी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में टीम भेजने के लिए पात्र नहीं रह गई थी। हॉकी इंडिया ने साकेत कोर्ट में दलील दी थी कि उनकी नियमावली के अनुसार केवल एक पंजीकृत संस्था ही स्थायी सदस्यता बनाए रख सकती है और चूंकि हॉकी बिहार अब एक वैध पंजीकृत इकाई नहीं है, इसलिए वह राज्य का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण टीम चुनने की जिम्मेदारी न्यायालय में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश अतुल अहलावत ने खिलाड़ियों के भविष्य पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकप्रिय धारणा के विपरीत हॉकी भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय खेल नहीं है, फिर भी यह देश के सबसे गौरवशाली और प्रतिष्ठित खेलों में से एक है। जिसने ओलंपिक और विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। अदालत ने कहा कि प्रशासनिक और कानूनी लड़ाइयों की सजा उन युवा खिलाड़ियों को नहीं मिलनी चाहिए जो देश का प्रतिनिधित्व करने का सपना देख रहे हैं। इसी भावना को देखते हुए अदालत ने दोनों पक्षों की सहमति से बिहार राज्य खेल प्राधिकरण को इन प्रतियोगिताओं के लिए टीम चुनने की जिम्मेदारी सौंपी है।
बिहार के खिलाड़ी बिना किसी बाधा के खेल सकेंगे अदालती आदेश के तुरंत बाद, हॉकी इंडिया के महासचिव भोला नाथ सिंह ने बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक सह सीईओ रवींद्रन संकरण को पत्र लिखकर इस संबंध में आधिकारिक अनुरोध भी कर दिया है। इस फैसले का सीधा असर अप्रैल में होने वाली दो बड़ी प्रतियोगिताओं पर पड़ेगा। इसमें रांची में आयोजित होने वाली 16वीं सब जूनियर महिला नेशनल चैंपियनशिप और बिहार के राजगीर में होने वाली 16वीं सब जूनियर पुरुष नेशनल चैंपियनशिप शामिल है। अब इन दोनों महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों में बिहार के खिलाड़ी बिना किसी बाधा के खेल सकेंगे। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी सख्त निर्देश दिया है कि चयन प्रक्रिया में किसी भी खिलाड़ी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। चाहे खिलाड़ी पहले हॉकी बिहार से जुड़ा रहा हो या नहीं, प्रत्येक योग्य एथलीट को समान अवसर मिलना अनिवार्य है। बिहार में हॉकी के भविष्य को लेकर चल रही कानूनी उठापटक के बीच खिलाड़ियों के लिए राहत भरी खबर आई है। दिल्ली की साकेत कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आगामी नेशनल चैंपियनशिप में बिहार की टीम की भागीदारी का रास्ता साफ कर दिया है। न्यायालय के आदेश के बाद अब हॉकी बिहार के बजाय ‘बिहार राज्य खेल प्राधिकरण’ (BSSA) राज्य की टीमों का चयन और संचालन करेगा। यह निर्णय हॉकी बिहार के निबंधन (रजिस्ट्रेशन) के रद्द होने और उससे जुड़ी कानूनी जटिलताओं को देखते हुए खिलाड़ियों के हितों की रक्षा के लिए लिया गया है। दरअसल, 25 फरवरी 2026 को बिहार सरकार के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने अनिवार्य नियमों के उल्लंघन के कारण हॉकी बिहार के निबंधन को रद्द कर दिया था। निबंधन रद्द होने के बाद तकनीकी रूप से यह संस्था किसी भी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में टीम भेजने के लिए पात्र नहीं रह गई थी। हॉकी इंडिया ने साकेत कोर्ट में दलील दी थी कि उनकी नियमावली के अनुसार केवल एक पंजीकृत संस्था ही स्थायी सदस्यता बनाए रख सकती है और चूंकि हॉकी बिहार अब एक वैध पंजीकृत इकाई नहीं है, इसलिए वह राज्य का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण टीम चुनने की जिम्मेदारी न्यायालय में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश अतुल अहलावत ने खिलाड़ियों के भविष्य पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकप्रिय धारणा के विपरीत हॉकी भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय खेल नहीं है, फिर भी यह देश के सबसे गौरवशाली और प्रतिष्ठित खेलों में से एक है। जिसने ओलंपिक और विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। अदालत ने कहा कि प्रशासनिक और कानूनी लड़ाइयों की सजा उन युवा खिलाड़ियों को नहीं मिलनी चाहिए जो देश का प्रतिनिधित्व करने का सपना देख रहे हैं। इसी भावना को देखते हुए अदालत ने दोनों पक्षों की सहमति से बिहार राज्य खेल प्राधिकरण को इन प्रतियोगिताओं के लिए टीम चुनने की जिम्मेदारी सौंपी है।
बिहार के खिलाड़ी बिना किसी बाधा के खेल सकेंगे अदालती आदेश के तुरंत बाद, हॉकी इंडिया के महासचिव भोला नाथ सिंह ने बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक सह सीईओ रवींद्रन संकरण को पत्र लिखकर इस संबंध में आधिकारिक अनुरोध भी कर दिया है। इस फैसले का सीधा असर अप्रैल में होने वाली दो बड़ी प्रतियोगिताओं पर पड़ेगा। इसमें रांची में आयोजित होने वाली 16वीं सब जूनियर महिला नेशनल चैंपियनशिप और बिहार के राजगीर में होने वाली 16वीं सब जूनियर पुरुष नेशनल चैंपियनशिप शामिल है। अब इन दोनों महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों में बिहार के खिलाड़ी बिना किसी बाधा के खेल सकेंगे। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी सख्त निर्देश दिया है कि चयन प्रक्रिया में किसी भी खिलाड़ी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। चाहे खिलाड़ी पहले हॉकी बिहार से जुड़ा रहा हो या नहीं, प्रत्येक योग्य एथलीट को समान अवसर मिलना अनिवार्य है।


