स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मिली जान से मारने की धमकी के मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। शंकराचार्य के खिलाफ पहले से मुकदमा दायर करने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने भी इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज, जो पहले अविमुक्तेश्वरानंद के विरोध में कानूनी कार्रवाई कर चुके हैं, ने इस मामले को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह का वैचारिक मतभेद अपनी जगह है, लेकिन इस प्रकार की जान से मारने की धमकी देना पूरी तरह गलत है और इससे समाज में भय का माहौल बनता है।
आशुतोष महाराज ने कहा- वैचारिक मतभेद अलग, धमकी स्वीकार नहीं शंकराचार्य पर पूर्व में बटुकों के यौन शोषण का केस दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, यह घटना बेहद चिंताजनक है और इससे समाज में भय का माहौल बन सकता है। जिस जिले और राज्य से धमकी दी गई है, वहां की पुलिस को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। धमकी देने वाले व्यक्ति या संबंधित मोबाइल नंबर के खिलाफ कानून सम्मत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जल्द गिरफ्तारी की जाए। आशुतोष ने कहा, वैचारिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन किसी को भी कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। लोकतंत्र में संविधान और कानून सर्वोपरि हैं, और हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। शासन-प्रशासन से मांग की कि मामले में त्वरित और कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही संबंधित व्यक्ति को सुरक्षा प्रदान की जाए, ताकि समाज में शांति और कानून व्यवस्था बनी रहे। अतीक की तरह मारने की मिली धमकी शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को भेजे गए ऑडियो मैसेज में उन्हें अतीक अहमद की तरह मारने की धमकी दी गई है। साथ ही उनकी आगामी यात्रा के दौरान हमले की चेतावनी भी दी गई है। यह ऑडियो 6 अप्रैल की रात ज्योतिष्पीठ के आधिकारिक नंबर पर भेजे गए थे, जबकि 1 अप्रैल को भी एक धमकी भरा मैसेज आया था। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद “गोमाता-राष्ट्रमाता” अभियान चला रहे हैं और 3 मई से उत्तर प्रदेश में “गविष्ठी यात्रा” शुरू करने वाले हैं। शंकराचार्य के वकील को भी मिल चुकी है धमकी शंकराचार्य के वकील और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य श्रीनाथ त्रिपाठी को भी एक महीने पहले जान से मारने की धमकी मिली थी। यह धमकी उनके मोबाइल पर भेजे गए SMS से दी गई थी। इसमें वाराणसी कचहरी को भी बम से उड़ाने की धमकी भी दी गई थी। शंकराचार्य माघ मेले से विवादों में आए प्रयागराज माघ मेले में 18 जनवरी, 2025 को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद हुआ था। इसके 8 दिन बाद 24 जनवरी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की थी। इसमें माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों से यौन शोषण के आरोप लगाए थे। पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 13 फरवरी को 2 बच्चों को कोर्ट में पेश किया था। 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज हुए थे। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई थी। FIR में शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात आरोपी बनाए गए थे। 24 फरवरी को शंकराचार्य ने प्रयागराज एडिशनल कमिश्नर अजय पाल शर्मा पर साजिश रचने का आरोप लगाया था। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। 26 फरवरी को शंकराचार्य के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट आई थी। पुलिस सूत्रों का दावा है कि बच्चों के साथ कुकर्म की पुष्टि हुई है। इधर, एक पीड़ित बटुक पहली बार मीडिया के सामने आया था। एक चैनल को दिए इंटरव्यू में उसने दावा किया था- मैं अध्ययन के लिए गया था, तभी मेरा शोषण किया गया। हालांकि, शंकराचार्य के खिलाफ बटुकों से यौन उत्पीड़न केस में हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए 25 मार्च को उनकी अग्रिम जमानत मंजूर कर ली थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- चार्जशीट दाखिल होने तक शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी नहीं होगी। कोर्ट ने शंकरचार्य के अलावा आशुतोष महाराज को भी मीडिया इंटरव्यू या बयानबाजी से रोक दिया था है। उधर, हाईकोर्ट से शंकराचार्य को मिली अग्रिम जमानत के बाद आशुतोष ब्रह्मचारी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने उनकी गिरफ्तारी की मांग करते हुए एक याचिका दायर की थी।


