बोधगया में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार रात रिकॉर्ड संख्या में दर्शक पहुंचे। विदेशी और स्थानीय कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने पूरे पंडाल को उत्सवमय माहौल से भर दिया। 23 जनवरी को दर्शकों की संख्या 22 जनवरी की तुलना में काफी अधिक रही, जिससे आयोजन स्थल पर भारी उत्साह देखा गया। इस अवसर पर लाओस और श्रीलंका से आए कलाकारों ने अपने-अपने देशों की संस्कृति और परंपराओं को दर्शाते हुए मनमोहक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। उनके रंग-बिरंगे परिधानों, लयबद्ध संगीत और भावपूर्ण नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन विदेशी प्रस्तुतियों को लोगों ने खूब सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट से पंडाल गूंज उठा। इसके बाद एक बॉलीवुड गायक की मधुर प्रस्तुतियों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। लोकप्रिय गीतों की धुन पर युवा, बुजुर्ग और पर्यटक सभी थिरकते नजर आए। कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने लोक संगीत, झूमर नृत्य और क्षेत्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी मिट्टी की खुशबू और परंपरा की झलक दिखाई, जिससे दर्शकों का जुड़ाव और भी गहरा हो गया। कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध महोत्सव का यह दिन कला, संस्कृति और सौहार्द का एक जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। उपस्थित लोगों ने इस यादगार आयोजन का भरपूर आनंद लिया। बोधगया में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार रात रिकॉर्ड संख्या में दर्शक पहुंचे। विदेशी और स्थानीय कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने पूरे पंडाल को उत्सवमय माहौल से भर दिया। 23 जनवरी को दर्शकों की संख्या 22 जनवरी की तुलना में काफी अधिक रही, जिससे आयोजन स्थल पर भारी उत्साह देखा गया। इस अवसर पर लाओस और श्रीलंका से आए कलाकारों ने अपने-अपने देशों की संस्कृति और परंपराओं को दर्शाते हुए मनमोहक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। उनके रंग-बिरंगे परिधानों, लयबद्ध संगीत और भावपूर्ण नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन विदेशी प्रस्तुतियों को लोगों ने खूब सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट से पंडाल गूंज उठा। इसके बाद एक बॉलीवुड गायक की मधुर प्रस्तुतियों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। लोकप्रिय गीतों की धुन पर युवा, बुजुर्ग और पर्यटक सभी थिरकते नजर आए। कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने लोक संगीत, झूमर नृत्य और क्षेत्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी मिट्टी की खुशबू और परंपरा की झलक दिखाई, जिससे दर्शकों का जुड़ाव और भी गहरा हो गया। कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध महोत्सव का यह दिन कला, संस्कृति और सौहार्द का एक जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। उपस्थित लोगों ने इस यादगार आयोजन का भरपूर आनंद लिया।


