जम्मू यूनिवर्सिटी में जिन्ना से जुड़े टॉपिक्स हटाने की सिफारिश:अल्पसंख्यकों का नेता बताया; नए सिलेबस में जिन्ना, सर सैयद और इकबाल को जोड़ा था

जम्मू यूनिवर्सिटी में जिन्ना से जुड़े टॉपिक्स हटाने की सिफारिश:अल्पसंख्यकों का नेता बताया; नए सिलेबस में जिन्ना, सर सैयद और इकबाल को जोड़ा था

जम्मू यूनिवर्सिटी में एमए पॉलिटिकल साइंस के सिलेबस से मोहम्मद अली जिन्ना, सर सैयद अहमद खान और मोहम्मद इकबाल से जुड़े टॉपिक्स हटाने की सिफारिश की गई है। यह सिफारिश विभागीय मामलों की समिति (DAC) ने की है। अब इस पर अंतिम फैसला 24 मार्च को बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में होगा। यूनिवर्सिटी के मुताबिक, 22 मार्च को HOD ऑफिश में DAC की बैठक हुई। इसमें वन-ईयर और टू-ईयर एमए पॉलिटिकल साइंस प्रोग्राम के सिलेबस पर चर्चा की गई। बैठक में सर्वसम्मति से जिन्ना, सर सैयद और इकबाल से जुड़े टॉपिक्स हटाने की सिफारिश की गई। अब यह प्रस्ताव बोर्ड ऑफ स्टडीज को भेजा गया है, जिसकी बैठक 24 मार्च को सुबह 11:30 बजे ऑनलाइन होगी। सिलेबस में जिन्ना को जोड़ने के बाद हुआ विवाद पॉलिटिकल साइंस के सिलेबस में ‘माइनॉरिटीज एंड द नेशन’ पेपर के तहत जिन्ना के राजनीतिक विचार शामिल किए गए थे, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने शनिवार को यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन कर इन टॉपिक्स को तुरंत हटाने की मांग की थी। संगठन ने कहा कि अकादमिक स्वतंत्रता के नाम पर राष्ट्रीय भावनाओं और ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी नहीं हो सकती। ABVP के जम्मू-कश्मीर राज्य सचिव सन्नक श्रीवत्स ने बताया कि पहले जिन्ना का जिक्र ‘टू-नेशन थ्योरी’ के संदर्भ में होता था, जहां उन्हें विभाजन की सोच से जोड़ा जाता था। अब संशोधित सिलेबस में उन्हें ‘माइनॉरिटीज एंड the Nation’ के तहत अल्पसंख्यकों के नेता के रूप में पेश किया गया है, जिस पर आपत्ति जताई जा रही है। कांग्रेस नेता बोलीं- विवाद जानबूझकर खड़ा किया जा रहा कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और JKPCC महासचिव नम्रता शर्मा ने कहा कि सिलेबस को लेकर विवाद जानबूझकर खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन्ना, सावरकर और गोलवलकर से जुड़ा यह हिस्सा 2025 में तैयार किए गए ड्राफ्ट सिलेबस में शामिल था, लेकिन 11-12 महीने तक इस पर कोई सवाल नहीं उठा। अब अचानक इसे मुद्दा बनाया जा रहा है। नम्रता शर्मा ने यह भी सवाल उठाया कि जब सिलेबस तैयार किया गया था, तब क्या यूनिवर्सिटी प्रशासन और वाइस चांसलर उमेश राय की अगुवाई वाली अकादमिक टीम ने इसकी ठीक से जांच नहीं की थी।

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