राजस्व शिविरों की हकीकत: कुछ वार्ड चमके, कई रहे पीछे

राजस्व शिविरों की हकीकत: कुछ वार्ड चमके, कई रहे पीछे

-33 वार्डों में 27.55 लाख की वसूली, आंकड़े बता रहे, शहर में कर अदायगी और प्रशासनिक पकड़ दोनों असमान।

बैतूल। नगर पालिका परिषद द्वारा शहर के 33 वार्डों में राजस्व वसूली बढ़ाने के उद्देश्य से 16 दिसंबर 2025 से 7 जनवरी 2026 तक विशेष शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों के माध्यम से नगर पालिका को कुल 27 लाख 55 हजार 26 रुपए की राजस्व वसूली हुई। इसमें 17 लाख 30 हजार 125 रुपए संपत्तिकर, 7 लाख 81 हजार 784 रुपए जलकर तथा 2 लाख 43 हजार 117 रुपए किराया/अन्य मद से प्राप्त हुए। आंकड़ों के अनुसार कुछ वार्डों में वसूली सराहनीय रही। भगतसिंह वार्ड से सबसे अधिक 2.57 लाख रुपए, चंद्रशेखर वार्ड से 2.29 लाख रुपए और शास्त्री वार्ड से 1.50 लाख रुपए की संपत्तिकर वसूली दर्ज की गई। वहीं अंबेडकर वार्ड, विनोबा वार्ड, मोटी वार्ड और शंकर-विनोबा वार्ड में भी अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला। इसके उलट तिलक, रामनगर, जयप्रकाश, किदवई जैसे वार्डों में वसूली का आंकड़ा 10 से 20 हजार रुपए के बीच ही सिमट गया। सवाल यह है कि क्या इन वार्डों में बकाया नहीं है, या फिर वहां वसूली को लेकर न तो गंभीर प्रयास किए गए और न ही पर्याप्त जागरूकता फैलाई गई? यह असमानता नगर पालिका की वसूली नीति पर सवाल खड़े करती है। आंकड़ों से यह भी सामने आया है कि वसूली का यह तरीका तात्कालिक रूप से राजस्व बढ़ा सकता है, लेकिन दीर्घकालीन समाधान नहीं माना जा सकता।
नगर पालिका के लिए चिंता की बात यह भी है कि कुल वसूली का बड़ा हिस्सा गिने-चुने वार्डों से आया है। यदि इन्हें अलग कर दिया जाए तो बाकी वार्डों की औसत वसूली बेहद कम बैठती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि शहर के बड़े हिस्से में कर अदायगी को लेकर या तो उदासीनता है या फिर लोगों में यह भावना मजबूत है कि टैक्स देने के बावजूद उन्हें मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रहीं। वरिष्ठ राजस्व शाखा प्रभारी सुभाष प्रजापति द्वारा 10 जनवरी से कॉलोनियों में शिविर लगाने के निर्देश के बाद यह उम्मीद जगी है कि अब ज्यादा बकाया वाले क्षेत्रों पर फोकस किया जाएगा। लेकिन सवाल यही है कि क्या यह प्रक्रिया भी कुछ चुनिंदा इलाकों तक सीमित रहेगी या वास्तव में पूरे शहर में संतुलित वसूली का मॉडल अपनाया जाएगा?। देखा जाए तो 27.55 लाख की कुल वसूली नगर पालिका के लिए राहत जरूर है, लेकिन वार्डवार आंकड़े यह भी बताते हैं कि व्यवस्था में समानता और पारदर्शिता की कमी है। यदि नगर पालिका इस डेटा का सही विश्लेषण कर कमजोर वार्डों पर विशेष रणनीति बनाए और टैक्स के बदले ठोस सुविधाएं सुनिश्चित करे, तभी यह राजस्व वसूली अभियान सफल हो सकेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *