इंदौर में वीर बाल दिवस के मौके पर शुक्रवार को सुखमनी साहिब का पाठ, कथा-कीर्तन और लंगर का आयोजन किया। भाजपा कार्यालय में हुए आयोजन में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी समेत भाजपा नेता शामिल हुए। इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा कि इंदौर की पावन धरती पर गुरुओं को याद किया जा रहा है। इंदौर की धरती मां अहिल्याबाई होल्कर जैसी विरासत से जुड़ी है, जिन्होंने महिला होते हुए भी अपने धर्म, समाज और प्रजा के लिए सदैव तत्पर रहकर कार्य किया। मीनाक्षी लेखी ने कहा- जब-जब विदेशी आक्रांताओं ने आक्रमण किया, तब-तब वीर बलिदानी पुरुषों और महिलाओं ने जन्म लिया और समाज एकजुट होकर लड़ा, तभी विजय मिली। लेखी ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी के नन्हे साहिबजादों को दादी जी के साथ ठंडे बुर्ज में भूखे-प्यासे कैद रखा गया। जो मेहर जी चोरी-छिपे बच्चों को दूध पिलाते थे, उनके पूरे परिवार को कोल्हू में पीस दिया गया। देश को एक करने के लिए बड़ी-बड़ी शहादतें हुई हैं। हमें उस शहादत के प्रति नतमस्तक रहते हुए समाज को एकजुट रखकर देश और मां भारती के सम्मान को बढ़ाने का कार्य करना चाहिए। विजयवर्गीय बोले- न एक सिख होता और न एक हिंदू
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने भाजपा कार्यालय को पंजाब जैसा स्वरूप दे दिया है। चारों तरफ सिंह ही सिंह नजर आ रहे हैं और सभी को साफा पहनाकर अच्छा कार्य किया है। अगर नवम और दशमेश गुरु नहीं होते तो न एक सिख होता और न एक हिंदू। गुरु गोविंद सिंह जी के पूरे परिवार ने राष्ट्र और धर्म के लिए अपना बलिदान दे दिया। मंत्री ने पीएम नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि वीर बाल दिवस के माध्यम से वीर साहिबजादों और उनके परिवार की महान शहादत के इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया गया है। साहिबजादों का बलिदान दबाकर रखा गया
भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आह्वान किया था कि वीर साहिबजादों का जो देश के लिए बलिदान है, उसे लंबे समय तक छुपाकर रखा गया। उनके बलिदान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रत्येक समाज को कुछ न कुछ करना चाहिए, क्योंकि पूरे हिंदू समाज पर गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादों का कर्ज है। शहादत से संघर्ष तक की चित्र प्रदर्शनी
कार्यक्रम के दौरान सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादे बाबा अजित सिंह जी, बाबा जुझार सिंह जी, बाबा जोरावर सिंह जी, बाबा फतेह सिंह जी और दादी जी के 21 दिसंबर से 28 दिसंबर तक संघर्ष से शहादत तक के प्रसंगों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई।


