Online Fraud पर RBI का सख्त शिकंजा, UPI यूजर्स के लिए आए ये 5 बड़े Security Rules

Online Fraud पर RBI का सख्त शिकंजा, UPI यूजर्स के लिए आए ये 5 बड़े Security Rules
डिजिटल लेनदेन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं, और अब इस पर सख्ती की तैयारी शुरू हो गई है। बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल भुगतान को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए कई नए सुझाव जारी किए हैं, जिन पर आम लोगों से 8 मई तक राय मांगी गई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ समय में फर्जी लिंक, नकली ग्राहक सेवा कॉल, फर्जी खाते और नई तकनीकों के जरिए ठगी के मामलों में तेजी आई है। ऐसे में तुरंत होने वाले डिजिटल लेनदेन को लेकर चिंता बढ़ी है, क्योंकि पैसा ट्रांसफर होते ही उसे वापस पाना मुश्किल हो जाता है।
गौरतलब है कि इसी खतरे को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने पांच बड़े बदलाव सुझाए हैं। सबसे अहम प्रस्ताव बड़े लेनदेन पर थोड़ी देरी लगाने का है। इसके तहत 10 हजार रुपये से ज्यादा की राशि भेजने पर करीब एक घंटे का समय रखा जा सकता है, ताकि किसी भी संदिग्ध लेनदेन को रोका जा सके।
इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों और ज्यादा जोखिम वाले लोगों के लिए “विश्वसनीय व्यक्ति” की मंजूरी का विकल्प देने की बात कही गई है। बता दें कि 70 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए 50 हजार रुपये से ज्यादा के लेनदेन पर इस अतिरिक्त पुष्टि की जरूरत हो सकती है, जिससे धोखाधड़ी के खतरे को कम किया जा सके।
एक और महत्वपूर्ण सुझाव “इमरजेंसी बंद सुविधा” को लेकर है। इसके जरिए ग्राहक एक ही बार में अपने सभी डिजिटल भुगतान माध्यमों को बंद कर सकेगा, ताकि किसी भी तरह के संदेह की स्थिति में तुरंत सुरक्षा मिल सके। इसे दोबारा चालू करने के लिए सख्त पहचान प्रक्रिया या बैंक शाखा में जाना जरूरी हो सकता है।
मौजूद प्रस्तावों में जोखिम के आधार पर लेनदेन सीमा तय करने की बात भी शामिल है। जिन खातों की पूरी जांच नहीं हुई है, उनमें सालाना जमा की सीमा तय की जा सकती है। संदिग्ध लेनदेन को अस्थायी रूप से रोका भी जा सकता है।
इसके साथ ही बैंकों को रियल टाइम निगरानी प्रणाली मजबूत करने के निर्देश दिए जा सकते हैं, जिसमें नई तकनीक और एआई की मदद से संदिग्ध गतिविधियों को तुरंत पकड़ा जा सके।
बताया जाता है कि इन सभी उपायों का मकसद डिजिटल भुगतान को सुरक्षित बनाना है, बिना आम उपयोगकर्ताओं को ज्यादा परेशानी दिए। कुल मिलाकर यह पहल दिखाती है कि तेजी के साथ-साथ सुरक्षा को भी बराबर प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि लोगों का भरोसा डिजिटल लेनदेन पर बना रहे।

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