राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अपने संगठनात्मक ढांचे (स्ट्रक्चर) में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। इस नए बदलाव के तहत दशकों पुरानी ‘प्रांत’ और ‘क्षेत्र’ की व्यवस्था को बदलकर ‘राज्य’ और ‘संभाग’ आधारित बनाया जा रहा है। इस व्यवस्था बदलाव के तहत राजस्थान में अब क्षेत्रीय प्रचारक की जगह राज्य प्रचारक का पद गठित होगा। यह तय माना जा रहा है कि दिल्ली और राजस्थान का एक ही राज्य प्रचारक का पद बनाया जाएगा। उधर राजस्थान में पहले तीन प्रांत थे—जयपुर, जोधपुर और कोटा—अब इसे बदलकर संभाग व्यवस्था में लाया जा रहा है। इसमें पांच संभागों का गठन होगा, जिसमें कोटा, जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर के गठन की संभावना है। यानी तीन प्रांत की जगह पांच संभाग बन जाएंगे। गौरतलब है कि हरियाणा में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठकें चल रही हैं। इन बैठकों के बाद इस दिशा में घोषणा हो सकती है। पिछले साल की एक रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में आरएसएस की सक्रिय शाखाओं की संख्या बढ़कर 10,500 हो गई है। साथ ही इसी सरकार में सरकारी कर्मचारियों के आरएसएस की गतिविधियों और शाखाओं में शामिल होने पर लगा 52 साल पुराना प्रतिबंध हटाया गया था। विकेंद्रीकरण और जमीनी स्तर को और मजबूत करना उद्देश्य इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर के कार्यकर्ताओं को अधिक अधिकार देना और जमीनी स्तर तक पहुंच को और मजबूत करना है। सालभर लगेगा व्यवस्था बदलने में माना जा रहा है कि ये बदलाव 2026-27 के बीच पूर्ण रूप से व्यवस्था परिवर्तन के तहत देखने को मिलेगा। इस दौरान नए दायित्व देने और पुराने सिस्टम को बदलने के लिए साल-छह महीने का समय लग सकता है। पहले ये स्ट्रक्चर था क्षेत्रीय प्रचारक राजस्थान का दायित्व था। इनके नीचे जयपुर, कोटा और जोधपुर प्रांत के प्रचारक थे। इसके बाद इन तीनों के नीचे विभाग प्रचारक और जिला प्रचारक काम कर रहे थे। अब ये स्ट्रक्चर रहेगा राज्य प्रचारक का पद प्रमुख की तरह रहेगा। इन्हें संभाग रिपोर्ट करेंगे। जैसे कोटा, जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर संभाग इन्हें रिपोर्ट करेंगे। इन संभागों के लिए विभाग प्रचारकों और जिला प्रचारकों की वर्किंग रहेगी।


