मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक अहम फैसले में 30 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता विधवा महिला को गर्भपात की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी भी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भ जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। पीड़िता को 19 माह का गर्भ है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि महिला की शारीरिक और मानसिक सेहत सर्वोपरि है। ऐसे मामलों में उसकी इच्छा के खिलाफ गर्भ जारी रखना उसके अधिकारों का उल्लंघन होगा। अदालत के आदेश के अनुसार गर्भपात की प्रक्रिया 11 अप्रैल को कराई जाएगी। पीड़िता दिव्यांग है और सुनने व बोलने में असमर्थ है, जिससे उसकी स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है। मामले में पीड़िता की ओर से उसके भाई ने याचिका दायर कर गर्भपात की अनुमति मांगी थी। याचिका में बताया गया कि गर्भावस्था यौन शोषण का परिणाम है, जिससे महिला को गंभीर मानसिक आघात और शारीरिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है। कोर्ट के निर्देश, डॉक्टरों की निगरानी में सुरक्षित तरीके से हो प्रक्रिया हाईकोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट और पीड़िता की स्थिति को ध्यान में रखते हुए गर्भपात की अनुमति दी। साथ ही मेडिकल कॉलेज के डीन को निर्देश दिया गया कि अनुभवी डॉक्टरों की विशेष टीम गठित की जाए, जिसमें मेडिसिन और कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ भी शामिल हों, ताकि पूरी प्रक्रिया सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट अहम कोर्ट के निर्देश पर गजराराजा मेडिकल कॉलेज और कमलाराजा अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने पीड़िता की जांच की। रिपोर्ट में गर्भ लगभग 19 सप्ताह का पाया गया और विशेषज्ञों ने उचित चिकित्सा सुविधाओं के साथ सुरक्षित गर्भपात संभव बताया। ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग को गर्भपात की परमिशन दी, कहा- किसी महिला को प्रेग्नेंसी जारी रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकते सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 17 साल की एक नाबालिग लड़की की 30 हफ्ते की प्रेग्नेंसी को मेडिकल टर्मिनेट करने की परमिशन दी। कोर्ट ने कहा कि किसी महिला, खासकर नाबालिग को, उसकी इच्छा के खिलाफ प्रेग्नेंसी जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। पूरी खबर पढ़ें…


