धूमधाम से मनाया गया छत्तीसगढ़ कुंज में रंगोत्सव:चित्र विचित्र के भजनों ने बांधा समां,फूलों की होली खेल झूमे भक्त

धूमधाम से मनाया गया छत्तीसगढ़ कुंज में रंगोत्सव:चित्र विचित्र के भजनों ने बांधा समां,फूलों की होली खेल झूमे भक्त

वृंदावन के छत्तीसगढ़ कुंज में रंग पंचमी की देर शाम होली की अद्भुत छटा देखने को मिली। जहाँ भक्ति और रंगों के संगम ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। चित्र विचित्र ने होली के भजन गा कर समा बांध दिया। फूलों की होली खेल भक्त भजनों पर जमकर झूमे। इस दौरान तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आचार्य रामचंद्र महाराज ने कार्यक्रम में पहुंचे साधु संतों का स्वागत सत्कार किया। भगवान मथुरामल का किया आकर्षक श्रृंगार वृंदावन नगर की पंचकोसीय परिक्रमा स्थित छत्तीसगढ़ कुंज में रंगपंचमी के पावन मौके पर रंगोत्सव का दिव्य एवं भव्य आयोजन किया गया। जिसमें सर्वप्रथम आश्रम में विराजित ठाकुर मथुरामल जी महाराज का दिव्य नूतन श्रृंगार धारण किया गया। रंगोत्सव के पावन मौके पर तुलसी पीठ के उत्तराधिकारी एवं छत्तीसगढ़ कुंज के महंत आचार्य रामचंद्र दास महाराज ने रंगोत्सव में पधारे सभी साधु, संत एवं भागवत प्रवक्ताओं का परम्परागत तरीके से भव्य स्वागत प्रसादी गुलाल, शॉल, माला एवं पटका पहनाकर किया। गुलाल और फूलों की हुई बारिश रंगोत्सव के मौके पर प्रसिद्ध भजन गायक चित्र विचित्र महाराज ने होली के भजन गाकर समा बांध दिया। साथ ही होली के भक्ति गीतों पर आश्रम परिसर में मौजूद सभी भक्त झूम उठे। इस मौके पर गुलाल और पुष्प की वर्षा ने इस पल को और भी उत्साहित बना दिया। ब्रज में होली का है विशेष महत्व इस मौके पर युवराज आचार्य रामचंद्र दास महाराज ने बताया कि ब्रज में होली का पावन महोत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। ब्रज में होली का महोत्सव करीब डेढ़ माह तक अनेकों आयोजनों के साथ मनाया जाता है। बसंत पंचमी से शुरू हुआ यह उत्सव पूरे ब्रज मंडल में अलग ही उमंग और उत्साह की अलख जगा देता है। इस पल के साक्षी बनने के लिए दूर दराज से लाखों श्रद्धालु ब्रज में आते है। इसी क्रम में वृंदावन के छत्तीसगढ़ कुंज में बड़े ही धूमधाम के साथ भव्य रंगोत्सव का आयोजन किया है। जिसमें ब्रज के अनेकों साधु संत एवं भागवत प्रवक्ता मौजूद रहे है। जिनका गुलाल लगाकर भव्य स्वागत किया गया है। यह रहे मौजूद रंगोत्सव में मुख्य रूप से महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज, महंत मदन मोहन महाराज, महंत हरिशंकर दास महाराज, महामंडलेश्वर किशोरी शरण महाराज, महंत वेणु गोपाल दास, महंत सच्चिदानंद दास महाराज, महंत सुंदर दास महाराज, महंत लाडली दास महाराज, पुराण मनीषी आचार्य कौशिक महाराज, महंत ज्ञान प्रकाश महाराज, आचार्य मृदुल कांत शास्त्री,बिहारी लाल वशिष्ठ, भागवत प्रवक्ता यदुनंद आचार्य आदि मौजूद रहे।

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