रांची विश्वविद्यालय… अब नीड-बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर करा सकेंगे पीएचडी

रांची विश्वविद्यालय… अब नीड-बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर करा सकेंगे पीएचडी

पढ़ाई शुरू होने के एक माह के भीतर पहला मिड सेमेस्टर एग्जाम व इसके 15 दिन बाद दूसरी मिड परीक्षा होगी रांची यूनिवर्सिटी में रिसर्च और पीएचडी व्यवस्था को लेकर एक ऐसा फैसला लिया गया, जिससे आने वाले दिनों में विवि की अकादमिक दिशा ही बदल जाएगी। इसके तहत नीड-बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर (अनुबंध शिक्षक) भी पीएचडी रिसर्च कराने का अधिकार दिया जाएगा। सोमवार को मोरहाबादी कैंपस स्थित आईक्यूएसी कांफ्रेंस हॉल वीसी प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में एनईपी और परीक्षा सुधार को लेकर हुई हाई-लेवल बैठक में सहमति बनी है। इसके साथ ही रांची यूनिवर्सिटी झारखंड का पहला ऐसा विश्वविद्यालय बन गया है, जहां नीड-बेस्ड शिक्षकों को औपचारिक रूप से रिसर्च से जोड़ा जा रहा है। यह प्रस्ताव कुलपति प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह की ओर से रखा गया था, जिसे बैठक में चर्चा के बाद मंजूरी दे दी गई। इस फैसले को लागू करने के लिए विवि द्वारा राजभवन से अनुमति ली जाएगी। तीन घंटे चली यह बैठक एक घंटे टेक्निकल प्रॉब्लम के चलते बाधित रही। वीसी समेत दर्जन भर शिक्षक भी वर्चुअल मोड में शामिल हुए थे। इधर, मीटिंग शुरू होने से लॉ डीन डॉ. पंकज चतुर्वेदी को अन्य डीन की तरह कमेटी में शामिल कर लिया गया, इसके साथ ही उठा विवाद भी समाप्त हो गया। बैठक में डीएसडब्ल्यू डॉ. सुदेश कुमार साहू, साइंस डीन डॉ. वंदना, सोशल साइंस डीन डॉ. परवेज हसन, डॉ. अमर कुमार चौधरी, रजिस्ट्रार डॉ. जीसी साहू, परीक्षा नियंत्रक संजय कुमार सिंह, डॉ. स्मृति सिंह, डॉ. नीरज, डॉ. राजकुमार समेत अन्य सदस्य थे। अब ऑनलाइन कोर्स भी कर सकेंगे छात्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप छात्रों को यूजीसी-रिकॉग्नाइज्ड ऑनलाइन कोर्स के माध्यम से पढ़ाई करने की अनुमति दी गई। इसके लिए उपयुक्त कोर्स चिह्नित कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, ताकि स्टूडेंट्स को कोर्स चयन में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो।
पीएचडी की खाली सीटें होंगी सार्वजनिक पीएचडी एडमिशन को पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया गया। किस विभाग में कितनी पीएचडी सीटें खाली हैं, इसकी पूरी जानकारी विवि की वेबसाइट पर जारी की जाएगी। बैठक में पीएचडी कोर्स-वर्क के एडमिशन का शेड्यूल भी फाइनल कर दिया गया कि जुलाई में एक सत्र, जबकि दिसंबर माह में दूसरे सत्र का एडमिशन लिया जाएगा।
सेमे. परीक्षा होने के 3 दिन बाद ही क्लास बैठक में अकादमिक कैलेंडर को दुरुस्त करने के लिए भी निर्णय लिए गए। सेमेस्टर परीक्षा समाप्त होने के तीन दिन बाद ही अगले सेमेस्टर की कक्षाएं शुरू करने पर सहमति बनी। वहीं पहली मिड-सेमेस्टर परीक्षा कक्षा शुरू होने के एक महीने के भीतर आयोजित करने पर सहमति बनी। जबकि दूसरी मिड-सेमेस्टर परीक्षा पहले मिड सेमेस्टर के 15 दिन बाद कराने पर सहमति बनी। नियम यह है कि मिड ​परीक्षा के अंक पोस्ट होने के बाद ही सेमेस्टर एग्जाम का फॉर्म भर सकेंगे।
रिसर्च डायरेक्टर की होगी नियुक्ति रांची यूनिवर्सिटी में रिसर्च डायरेक्टर के पद पर नियुक्ति करने पर भी सहमति बनी। साइंस संकाय से डॉ. लाडली रानी, सोशल साइंस संकाय से डॉ. ज्योति प्रकाश के नाम सामने आए। लेकिन किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन सकी। इस मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए कुलपति को अधिकृत किया गया है। सभी पड़ोसी राज्यों के विवि में रिसर्च डायरेक्टर का पद है, लेकिन झारखंड के विवि में अभी तक नहीं है।
नीड बेस्ड शिक्षकों को इसलिए मिला अधिकार रांची यूनिवर्सिटी से यूजीसी-नेट और जेआरएफ क्वालीफाई करने वाले छात्रों की संख्या अधिक है। वहीं दूसरी ओर, विवि में पिछले सात वर्षों से नियमित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है। योग्य अभ्यर्थियों को पीएचडी रिसर्च कराने वाले गाइड नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में नीड-बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर को पीएचडी की अनुमति देना शिक्षक संकट और रिसर्च गैप दोनों से निपटने का रास्ता माना जा रहा है।
मूल्यांकन अवधि बढ़ेगी, गुणवत्ता पर जोर, डिप्लोमा-डिग्री का नया ब्लूप्रिंट भी मंजूर उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की अवधि बढ़ाने का भी फैसला लिया गया है। शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। पढ़ाई और मूल्यांकन दोनों की गुणवत्ता बनी रहे। बैठक में नई शिक्षा नीति के अनुसार अंक प्रमाण पत्र, सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री के नए ब्लूप्रिंट को भी मंजूरी दे दी गई। पढ़ाई शुरू होने के एक माह के भीतर पहला मिड सेमेस्टर एग्जाम व इसके 15 दिन बाद दूसरी मिड परीक्षा होगी रांची यूनिवर्सिटी में रिसर्च और पीएचडी व्यवस्था को लेकर एक ऐसा फैसला लिया गया, जिससे आने वाले दिनों में विवि की अकादमिक दिशा ही बदल जाएगी। इसके तहत नीड-बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर (अनुबंध शिक्षक) भी पीएचडी रिसर्च कराने का अधिकार दिया जाएगा। सोमवार को मोरहाबादी कैंपस स्थित आईक्यूएसी कांफ्रेंस हॉल वीसी प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में एनईपी और परीक्षा सुधार को लेकर हुई हाई-लेवल बैठक में सहमति बनी है। इसके साथ ही रांची यूनिवर्सिटी झारखंड का पहला ऐसा विश्वविद्यालय बन गया है, जहां नीड-बेस्ड शिक्षकों को औपचारिक रूप से रिसर्च से जोड़ा जा रहा है। यह प्रस्ताव कुलपति प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह की ओर से रखा गया था, जिसे बैठक में चर्चा के बाद मंजूरी दे दी गई। इस फैसले को लागू करने के लिए विवि द्वारा राजभवन से अनुमति ली जाएगी। तीन घंटे चली यह बैठक एक घंटे टेक्निकल प्रॉब्लम के चलते बाधित रही। वीसी समेत दर्जन भर शिक्षक भी वर्चुअल मोड में शामिल हुए थे। इधर, मीटिंग शुरू होने से लॉ डीन डॉ. पंकज चतुर्वेदी को अन्य डीन की तरह कमेटी में शामिल कर लिया गया, इसके साथ ही उठा विवाद भी समाप्त हो गया। बैठक में डीएसडब्ल्यू डॉ. सुदेश कुमार साहू, साइंस डीन डॉ. वंदना, सोशल साइंस डीन डॉ. परवेज हसन, डॉ. अमर कुमार चौधरी, रजिस्ट्रार डॉ. जीसी साहू, परीक्षा नियंत्रक संजय कुमार सिंह, डॉ. स्मृति सिंह, डॉ. नीरज, डॉ. राजकुमार समेत अन्य सदस्य थे। अब ऑनलाइन कोर्स भी कर सकेंगे छात्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप छात्रों को यूजीसी-रिकॉग्नाइज्ड ऑनलाइन कोर्स के माध्यम से पढ़ाई करने की अनुमति दी गई। इसके लिए उपयुक्त कोर्स चिह्नित कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, ताकि स्टूडेंट्स को कोर्स चयन में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो।
पीएचडी की खाली सीटें होंगी सार्वजनिक पीएचडी एडमिशन को पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया गया। किस विभाग में कितनी पीएचडी सीटें खाली हैं, इसकी पूरी जानकारी विवि की वेबसाइट पर जारी की जाएगी। बैठक में पीएचडी कोर्स-वर्क के एडमिशन का शेड्यूल भी फाइनल कर दिया गया कि जुलाई में एक सत्र, जबकि दिसंबर माह में दूसरे सत्र का एडमिशन लिया जाएगा।
सेमे. परीक्षा होने के 3 दिन बाद ही क्लास बैठक में अकादमिक कैलेंडर को दुरुस्त करने के लिए भी निर्णय लिए गए। सेमेस्टर परीक्षा समाप्त होने के तीन दिन बाद ही अगले सेमेस्टर की कक्षाएं शुरू करने पर सहमति बनी। वहीं पहली मिड-सेमेस्टर परीक्षा कक्षा शुरू होने के एक महीने के भीतर आयोजित करने पर सहमति बनी। जबकि दूसरी मिड-सेमेस्टर परीक्षा पहले मिड सेमेस्टर के 15 दिन बाद कराने पर सहमति बनी। नियम यह है कि मिड ​परीक्षा के अंक पोस्ट होने के बाद ही सेमेस्टर एग्जाम का फॉर्म भर सकेंगे।
रिसर्च डायरेक्टर की होगी नियुक्ति रांची यूनिवर्सिटी में रिसर्च डायरेक्टर के पद पर नियुक्ति करने पर भी सहमति बनी। साइंस संकाय से डॉ. लाडली रानी, सोशल साइंस संकाय से डॉ. ज्योति प्रकाश के नाम सामने आए। लेकिन किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन सकी। इस मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए कुलपति को अधिकृत किया गया है। सभी पड़ोसी राज्यों के विवि में रिसर्च डायरेक्टर का पद है, लेकिन झारखंड के विवि में अभी तक नहीं है।
नीड बेस्ड शिक्षकों को इसलिए मिला अधिकार रांची यूनिवर्सिटी से यूजीसी-नेट और जेआरएफ क्वालीफाई करने वाले छात्रों की संख्या अधिक है। वहीं दूसरी ओर, विवि में पिछले सात वर्षों से नियमित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है। योग्य अभ्यर्थियों को पीएचडी रिसर्च कराने वाले गाइड नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में नीड-बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर को पीएचडी की अनुमति देना शिक्षक संकट और रिसर्च गैप दोनों से निपटने का रास्ता माना जा रहा है।
मूल्यांकन अवधि बढ़ेगी, गुणवत्ता पर जोर, डिप्लोमा-डिग्री का नया ब्लूप्रिंट भी मंजूर उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की अवधि बढ़ाने का भी फैसला लिया गया है। शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। पढ़ाई और मूल्यांकन दोनों की गुणवत्ता बनी रहे। बैठक में नई शिक्षा नीति के अनुसार अंक प्रमाण पत्र, सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री के नए ब्लूप्रिंट को भी मंजूरी दे दी गई।  

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