3 KM तक दौड़ाया, फिर 10 फीट गहरे नाले में कूदा, भरतपुर में घूसखोर JEN का हाई वोल्टेज ड्रामा, डिक्की में थे 50 हजार

3 KM तक दौड़ाया, फिर 10 फीट गहरे नाले में कूदा, भरतपुर में घूसखोर JEN का हाई वोल्टेज ड्रामा, डिक्की में थे 50 हजार

राजस्थान के भरतपुर जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने फिल्मी स्टाइल में कार्रवाई करते हुए बिजली विभाग के दो बड़े अधिकारियों को रिश्वत लेते दबोचा है। घूसखोर JEN (कनिष्ठ अभियंता) ने पकड़े जाने के डर से अपनी जान जोखिम में डालकर 10 फीट गहरे नाले में छलांग लगा दी, लेकिन एसीबी के शिकंजे से बच नहीं सका।

पीएम सूर्य घर योजना की फाइलों के बदले मांगी घूस

जानकारी के अनुसार, उच्चैन में तैनात एईएन (AEN) मोहित कटियार और जेईएन (JEN) अभिषेक गुप्ता ने एक परिवादी से सोलर प्लांट की फाइलों को पास करने के एवज में रिश्वत की डिमांड की थी। परिवादी प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सोलर पैनल लगाने का काम करता है। इन अधिकारियों ने प्रति फाइल 5 हजार रुपए के हिसाब से 18 फाइलों के लिए कुल 90 हजार रुपए मांगे थे।

स्कूटी लेकर भागा और नाले में लगा दी छलांग

शुक्रवार शाम को जब परिवादी रिश्वत की पहली किश्त के तौर पर 50 हजार रुपए लेकर जेईएन अभिषेक के घर पहुंचा, तो आरोपी ने पैसे लेकर स्कूटी की डिक्की में रख दिए। इसी दौरान उसे एसीबी की मौजूदगी का अहसास हो गया। खुद को फंसता देख जेईएन स्कूटी लेकर भागने लगा।

एसीबी की टीम ने करीब 3 किलोमीटर तक उसका पीछा किया। जब आरोपी को लगा कि टीम उसे घेर लेगी, तो उसने स्कूटी छोड़ दी और पास ही स्थित 10 फीट गहरे नाले में कूद गया। नाले के कीचड़ में फंसने के कारण वह भाग नहीं सका और टीम ने उसे दबोच लिया। कूदने की वजह से आरोपी के पैरों और घुटनों में चोट भी आई है।

एईएन को यूपी से पकड़ा

मामले में शामिल एईएन मोहित कटियार उस वक्त यूपी के आगरा (किरावली) में थे। एसीबी ने सत्यापन के बाद उन्हें भी हिरासत में ले लिया है। एसीबी एएसपी अमित सिंह ने बताया कि दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि वे अब तक कितने लोगों को इस तरह प्रताड़ित कर चुके हैं।

जिंदगी भर की मेहनत चंद रुपयों के लिए दांव पर

एक सरकारी नौकरी पाने के लिए युवा सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन इन दोनों अधिकारियों ने चंद हजार रुपयों के लालच में न सिर्फ अपना करियर बर्बाद किया बल्कि विभाग की छवि भी धूमिल की है। अब दोनों सलाखों के पीछे हैं।

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