Ramanand Sagar Son On Ranbir Kapoor Ramayana: बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर की आने वाली फिल्म ‘रामायण’ इन दिनों लगातार चर्चा में बनी हुई है। हाल ही में फिल्म में भगवान राम के रूप में रणबीर कपूर का फर्स्ट लुक सामने आया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनके लुक की तारीफ की, तो वहीं कई यूजर्स ने इसकी तुलना रामायण से शुरू कर दी। अब इस तुलना पर मशहूर निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर के बेटे मोती सागर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
तुलना को बताया अनुचित (Ramanand Sagar Son On Ranbir Kapoor Ramayana)
मोती सागर का मानना है कि एक टीवी सीरियल और एक फीचर फिल्म के बीच तुलना करना सही नहीं है। उनका कहना है कि 1987 में प्रसारित ‘रामायण’ एक लंबा टेलीविजन प्रोजेक्ट था, जिसमें कहानी को विस्तार से दिखाने का भरपूर समय मिला था। वहीं दूसरी ओर नई फिल्म का समय सीमित होगा, इसलिए प्रस्तुति का तरीका अलग होना स्वाभाविक है।
PTI को दिए इंटरव्यू में उन्होंने ये भी कहा कि किसी भी फिल्म या किरदार को केवल टीज़र या शुरुआती झलक के आधार पर जज करना जल्दबाजी होगी। दर्शकों को पूरी फिल्म देखने के बाद ही कोई अंतिम राय बनानी चाहिए।
रणबीर कपूर की एक्टिंग पर जताया भरोसा
मोती सागर ने रणबीर कपूर की अभिनय क्षमता की भी खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि रणबीर उन कलाकारों में से हैं जो अपने किरदार की भावनाओं को गहराई से समझते हैं और स्क्रीन पर जीवंत तरीके से प्रस्तुत करते हैं। ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि फिल्म में भगवान राम के रूप में रणबीर का प्रदर्शन दर्शकों को प्रभावित करेगा।
उनका मानना है कि इस तरह के पौराणिक किरदार निभाने के लिए सिर्फ लुक ही नहीं, बल्कि भावनात्मक अभिव्यक्ति भी बेहद महत्वपूर्ण होती है, और रणबीर इस चुनौती को निभाने में सक्षम हैं।
सोशल मीडिया पर जारी है बहस
जैसे ही रणबीर कपूर का पहला लुक सामने आया, सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। कुछ दर्शकों ने विजुअल इफेक्ट्स और कास्टिंग को लेकर सवाल उठाए, जबकि कई लोगों ने पुराने ‘रामायण’ सीरियल से इसकी तुलना करते हुए अपनी राय रखी। हालांकि फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई लोगों का मानना है कि हर दौर की तकनीक और प्रस्तुति अलग होती है, इसलिए सीधे तुलना करना उचित नहीं है।
नई पीढ़ी के लिए नई प्रस्तुति
मोती सागर का ये भी कहना है कि हर पीढ़ी के लिए धार्मिक और पौराणिक कथाओं को नए तरीके से प्रस्तुत करना जरूरी होता है। जिस तरह उनके पिता की ‘रामायण’ ने अपने समय में दर्शकों के दिलों पर खास जगह बनाई थी, उसी तरह नई फिल्म भी आधुनिक तकनीक और नए दृष्टिकोण के साथ दर्शकों तक पहुंचेगी।
उन्होंने उम्मीद जताई कि फिल्म दर्शकों की अपेक्षाओं पर खरी उतरेगी और भारतीय पौराणिक कथाओं को एक नए अंदाज में प्रस्तुत करेगी। फिलहाल दर्शकों को फिल्म के रिलीज होने का इंतजार है, जिसके बाद ही यह तय हो पाएगा कि नई ‘रामायण’ दर्शकों के दिलों में कितनी जगह बना पाती है।


