भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट और रामराजा की नगरी ओरछा में रामनवमी जन्मोत्सव की भव्य तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। चित्रकूट में इस वर्ष रामनवमी को ‘चित्रकूट गौरव दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है, जहां 27 मार्च को 22 लाख दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। वहीं, ओरछा के रामराजा मंदिर में शुक्रवार से पांच दिवसीय विशेष अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू होगी। चित्रकूट के रामघाट पर होगा भव्य दीपदान शुक्रवार शाम मंदाकिनी नदी के रामघाट, भरतघाट और श्री कामदगिरि परिक्रमा मार्ग को दीपों से रोशन किया जाएगा। इस अवसर पर बुंदेलखंड का पारंपरिक दीवारी नृत्य मुख्य आकर्षण होगा। इस दौरान स्थानीय कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। रात में आतिशबाजी की जाएगी। प्रशासन ने पूरे मार्ग पर आकर्षक रंगोली और सजावट की है। ओरछा में कुश नगर से निकलेगी शोभायात्रा रामराजा मंदिर में जन्मोत्सव का शुभारंभ 27 मार्च को सुबह 8:30 बजे कुश नगर से निकलने वाली शोभायात्रा से होगा। दोपहर 12 बजे मुख्य पूजन और आरती के बाद मंदिर प्रांगण में बुंदेली बधाई गीत गूंजेंगे। रात 8 बजे भगवान रामराजा सरकार दालान में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। संस्कृति विभाग के सहयोग से छतरपुर की मुस्कान प्रजापति बुंदेली गायन और भोपाल की माण्डवी अजय नृत्य नाटिका प्रस्तुत करेंगी। अयोध्या से पैदल चलकर ओरछा आए थे रामलला ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, वर्ष 1574 में महारानी कुंवरी गणेश अयोध्या से श्री राम के विग्रह को पैदल पदयात्रा कर ओरछा लाई थीं। रानी की कठिन तपस्या के बाद सरयू नदी से प्राप्त इस विग्रह को पुष्य नक्षत्र में ओरछा लाया गया था। भगवान ने शर्त रखी थी कि वे जहां बैठेंगे, वहीं राजा के रूप में स्थापित हो जाएंगे। इसी कारण ओरछा में भगवान श्रीराम को राजा के रूप में पूजा जाता है और उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया जाता है। ओरछा में 25 करोड़ की लागत से पर्यटन विकास कार्य जारी मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ योजना के तहत ओरछा में 25 करोड़ रुपए खर्च कर रहा है। यहां ‘श्री रामराजा लोक’ के निर्माण का प्रथम चरण पूर्ण हो चुका है। इस लोक में महारानी कुंवरी गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाएगी और भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों को आधुनिक माध्यमों से दर्शाया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि इसका उद्देश्य ओरछा को वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करना है।


