- वस्त्रनगरी में सनातन संकल्प का दिव्य उद्घोष
- रामनाम की गूंज में जुड़ा राजस्थान-मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को वस्त्रनगरी में सनातन धर्म की ध्वजा को और ऊंचा करते हुए एक बड़ा संकल्प दोहराया। हरिशेवा धाम सनातन मंदिर में गुरुवार को आयोजित सनातन मंगल महोत्सव एवं दीक्षा दान समारोह में मुख्यमंत्री यादव ने संतों के सानिध्य में घोषणा की कि जिस तरह अयोध्या में प्रभु श्रीराम का धाम मुस्कुरा रहा है, उसी भव्यता के साथ जल्द ही भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा भी मुस्कुराएगी। समारोह में बड़ी संख्या में साधु संतों के साथ श्रद्धालु मौजूद थे।
भक्ति का सेतु, संतों को समर्पण का संदेश
समारोह में यादव ने साधु-संतों को नमन करते हुए कहा आज अगर हमारी सनातन संस्कृति अक्षुण्ण है और फल-फूल रही है, तो वह केवल संतों के तप की वजह से है। संतों के माध्यम से ही हमें ईश्वर के साक्षात दर्शन होते हैं। उन्होंने जय श्रीराम के जयकारे के बीच कहा कि ‘राम’ के रा से राजस्थान और म से मध्यप्रदेश को जोड़ता हूं। दोनों राज्यों के बीच राम’का अटूट संबंध है।
वर्ष 2028 में उज्जैन में होगा कुंभ
डॉ.यादव ने कहा कि कि वर्ष 2028 में महाकाल की नगरी उज्जैन में कुंभ होगा। जो कि साधु-संतों व दिव्य जनोें के सानिध्य में ही पूर्ण हो सकेगा।
मोदी सनातन संस्कृति की शक्ति
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सनातन संस्कृति की अलौकिक शक्ति बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश दुनिया में सनातन की धारा बह उठी है। ऐसे आयोजनों से हमारी सनातन संस्कृति का दुनिया में मान बढ़ा है। उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भी सराहना की। यादव ने जय श्री महाकाल, राम राम सा का भी जयकारा किया और दीक्षा लेने वाले संत ईशानराम उदासी, संत केशवराम उदासी व संत सुयज्ञराम उदासी का माल्यार्पण कर अभिनंदन किया।
भारतीयों का हुआ स्वप्न साकार
सहकारिता मंत्री गौतम दक ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण केवल ईंट-पत्थरों का मेल नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के सदियों पुराने स्वप्न का साकार स्वरूप है। भीलवाड़ा मात्र एक शहर नहीं, भक्ति की एक जीवंत नगरी है।
संत कभी याचक नहीं होता
महंत हंसराम उदासीन ने कहा कि संत कभी याचक नहीं होता, वह तो सदा दाता की भूमिका में रहता है। यदि आप संत को कुछ अर्पण करना चाहते हैं, तो वस्तुएं नहीं, बल्कि अपना ‘मन’ अर्पण करें। श्रद्धा और समर्पण ही संतत्व का असली सम्मान है।
सनातन परंपराओं की रक्षा की जरूरत
राज्यसभा सदस्य बाल योगी उमेशनाथ ने कहा कि यह समय आत्ममुग्धता का नहीं, बल्कि सनातन परंपराओं की रक्षा के लिए जागने का है। हमें अपनी जड़ों से जुड़कर देश को एक सूत्र में पिरोना होगा।
मील का पत्थर साबित होगा
सांसद दामोदर अग्रवाल ने विश्वास जताया कि, यह आयोजन सनातन धर्म के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। समाज को इन नव-दीक्षित संतों से अपेक्षा है कि वे अपने आचरण से राष्ट्र के समक्ष एक नई मिसाल पेश करेंगे।


