राज्यसभा चुनाव: पवार की राष्ट्रवादी को किनारे कर कांग्रेस-ठाकरे आएंगे साथ? दिल्ली में बड़ी हलचल

राज्यसभा चुनाव: पवार की राष्ट्रवादी को किनारे कर कांग्रेस-ठाकरे आएंगे साथ? दिल्ली में बड़ी हलचल

महाराष्ट्र के बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही राज्यसभा की सात सीटों पर होने वाले चुनाव ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। आंकड़ों को देखें तो महाराष्ट्र की सात में से छह सीटें सत्तारूढ़ महायुति के खाते में जा सकती हैं, लेकिन एक सीट को लेकर महाविकास आघाड़ी (एमवीए) में जबरदस्त खींचतान देखने को मिल रही है।

कभी शिवसेना (उद्धव गुट) तो कभी कांग्रेस की ओर से इस एक सीट पर दावा किया जा रहा है। वहीं, शरद पवार के नाम को लेकर भी एकमत नहीं बन पा रहा है। इन तमाम घटनाक्रमों ने विपक्षी गठबंधन एमवीए के भीतर की राजनीति पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

‘प्लान बी’ की चर्चा, कांग्रेस हाईकमान से संपर्क?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्यसभा की इस एकमात्र सीट को लेकर उद्धव ठाकरे गुट की कांग्रेस हाईकमान से सीधी बातचीत चल रही है। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं शरद पवार को किनारे रखकर ठाकरे-कांग्रेस कोई अलग रणनीति तो नहीं बना रहे।

दूसरी ओर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने साफ कहा है कि राज्यसभा सीट को लेकर एमवीए में अभी तक कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है और इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के तौर पर पार्टी इस सीट पर दावा पेश करती है और भाजपा के खिलाफ संयुक्त लड़ाई के लिए यह जरूरी है।

संजय राउत के बदले सुर

अब तक शरद पवार को राज्यसभा भेजने की खुलकर वकालत करने वाले संजय राउत के सुर भी बदले हुए नजर आ रहे हैं। पहले वे कहते थे कि महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता शरद पवार की आवाज राज्यसभा में गूंजनी चाहिए, लेकिन अब उनका कहना है कि इस मुद्दे पर सभी मिलकर बैठकर निर्णय लेंगे।

यह बदलाव अपने आप में कई राजनीतिक संकेत दे रहा है। क्या यह महज रणनीतिक बयान है या अंदरखाने समीकरण बदल रहे हैं, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

बैठक में शरद गुट की गैरमौजूदगी ने बढ़ाए सवाल

महाराष्ट्र में बजट सत्र की पूर्व संध्या पर हुई एमवीए की बैठक में ठाकरे गुट के चार और कांग्रेस के तीन नेता मौजूद थे, लेकिन शरद पवार की एनसीपी का कोई भी नेता बैठक में नजर नहीं आया।

इतना ही नहीं, सरकार को भेजे गए पत्र में भी एस्निपी के किसी नेता का नाम नहीं था और आखिरी समय में एक पूर्व विधायक का नाम पेन से जोड़ा गया। इन घटनाओं ने गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए। हालांकि, एमवीए नेताओं ने इसे गलतफहमी बताते हुए कहा कि गठबंधन में सब थीं ठीक चल रहा है।

आंकड़ों का खेल समझें

महाराष्ट्र से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 37 विधायकों की आवश्यक है। अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के पास 20 और कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं। दोनों का कुल आंकड़ा 36 तक पहुंचता है। ऐसे में यदि किसी एक निर्दलीय विधायक का समर्थन मिल जाता है तो ठाकरे-कांग्रेस मिलकर एनसीपी (शरद पवार) के बिना भी एक सीट जीत सकते हैं। यही वजह है कि इस सीट को लेकर भीतरखाने रणनीति बन रही है और दावेदारी के सुर तेज हो गए हैं।

शरद पवार पर सस्पेंस, भाजपा का हमला

पहले माना जा रहा था कि एमवीए से शरद पवार को राज्यसभा भेजा जा सकता है। लेकिन दोनों एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय की चर्चाओं ने समीकरण बदल दिए हैं। शरद पवार राज्यसभा के उन 37 सदस्यों में शामिल हैं, जिनका कार्यकाल अप्रैल 2026 में खत्म होने वाला है।

इधर भाजपा ने भी इस विवाद पर निशाना साधा है। पार्टी के मीडिया प्रमुख नवनाथ बन ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सत्ता दिखते ही अपने साथियों को भूल जाना उनकी परंपरा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ठाकरे गुट के भीतर ही राजनीतिक चालें चल रही हैं।

महाराष्ट्र से रिटायर हो रहे ये सांसद

महाराष्ट्र से जिन नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें शरद पवार (NCP शरद गुट), रामदास अठावले (RPI), रजनी पाटिल (कांग्रेस), प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना उद्धव गुट), धैर्यशील पाटिल (भाजपा), फौजिया खान (NCP शरद गुट) और भगवत कराड (भाजपा) शामिल हैं।

महायुति का पलड़ा भारी

महाराष्ट्र विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के आधार पर महायुति की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। वर्तमान में 288 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 131, शिवसेना शिंदे गुट के 57 और एनसीपी अजित पवार गुट के 40 विधायक मिलाकर कुल 228 विधायक होते हैं। सात निर्दलीय और सहयोगी विधायकों के समर्थन से यह संख्या 235 तक पहुंचती है। जबकि अजित पवार और भाजपा के शिवाजीराव कार्डिले के निधन के कारण दो सीटें रिक्त हैं। 37 विधायकों के हिसाब से महायुति के छह उम्मीदवारों का जीतना तय है।

वहीं, राज्य के विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी (एमवीए) की बात करें तो शरद पवार गुट के 10, कांग्रेस के 16 और उद्धव ठाकरे गुट के 20 विधायक हैं। इसके अलावा माकपा और शेकाप के एक-एक विधायक का समर्थन है। कुल मिलाकर यह आंकड़ा 46 तक पहुंचता है।

फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एमवीए की एकजुटता की परीक्षा इसी एक सीट पर होने वाली है। क्या शरद पवार सर्वसम्मति से उम्मीदवार बनेंगे या ठाकरे-कांग्रेस अलग राह चुनेंगे, यह फैसला आने वाले दिनों में होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *