राज्यसभा चुनावः कांग्रेस के 2 विधायक आउट ऑफ नेटवर्क:NDA के 3 MLA महागठबंधन के टच में, 5वीं सीट के लिए आधी रात को जोड़-तोड़

राज्यसभा चुनावः कांग्रेस के 2 विधायक आउट ऑफ नेटवर्क:NDA के 3 MLA महागठबंधन के टच में, 5वीं सीट के लिए आधी रात को जोड़-तोड़

बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए कल वोटिंग होनी है। उससे पहले NDA और महागठबंधन दल के नेता अपने विधायकों को एकजुट करने में जुट गए हैं। महागठबंधन के विधायकों को जहां पटना के होटल में बाड़ेबंदी की गई है तो NDA के विधायकों के साथ लगातार बैठक कर उन्हें एकजुट रखा जा रहा है। इस बीच भास्कर को सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस के दो विधायक आउट ऑफ नेटवर्क हो गए हैं। कांग्रेस के वाल्मीकिनगर के विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा से कांग्रेस नेता लगातार संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। भास्कर ने भी इनके आधिकारिक नंबर पर फोन किया, लेकिन वो लगातार ऑफ आ रहा है। वहीं, फारबिसगंज से विधायक मनोज विश्वास भी लगातार गायब हैं। हालाांकि, सूत्र की मानें तो उनके मान जाने की संभावना है और देर रात तक वे भी होटल पहुंच सकते हैं। लेकिन चुनाव में उनके भी क्रॉस वोटिंग करने की आशंका पार्टी आलाकमान को है। भास्कर ने इनके दो नंबर पर फोन किया, दोनों आउट ऑफ रीच हैं। NDA के तीन विधायक से डील कर रहे महागठबंधन के नेता ऐसी बात नहीं है कि क्रॉस वोटिंग का खतरा केवल महागठबंधन को है। महागठबंधन के नेता भी लगातार NDA के विधायकों के संपर्क में हैं। तीन विधायकों के साथ इनकी डील चल रही है। भास्कर को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इन्हें मोटी रकम का ऑफर दिया जा रहा है। इसके बदले में इन्हें दो विकल्प भी दिया गया है। पहला क्रॉस वोटिंग कर दें। अगर ऐसा नहीं कर पाते हैं तो वोटिंग की प्रक्रिया से दूर हो जाएं। NDA और महागठबंधन की कोशिश 41 के नंबर को कम किया जाए अभी राज्यसभा के एक कैंडिडेट को जीतने के लिए 41 विधायक की जरूरत है। महागठबंधन और NDA की पूरी कोशिश है कि इस संख्या को घटाकर 40 या इससे नीचे किया जाए। ऐसा कराने के लिए कम से कम 6 विधायक को एब्सेंट कराना होगा या इतने ही विधायक के वोट को रद्द कराना होगा। कांग्रेस के गायब 2 विधायकों के बारे में जानिए… सुरेंद्र प्रसादः पहली बार विधायक बने, NDA से लड़ चुके हैं चुनाव पाला बदलने के अटकलों के पीछे तर्कः सुरेंद्र प्रसाद को उपेंद्र कुशवाहा का काफी करीबी नेता माना जाता है। 2015 में सुरेंद्र को टिकट देने के लिए उपेंद्र ने यह सीट भाजपा से ली थी। मनोज विश्वासः JDU- RJD से पुराना नाता, चुनाव से पहले कांग्रेस में आए फारबिसगंज से पहली बार विधायक बने 38 साल के मनोज विश्वास RJD से कांग्रेस में आए हैं। केवट मतलब EBC समाज से आते हैं। पाला बदलने के अटकलों के पीछे तर्कः यह पहले भी पार्टी बदलते रहे हैं। इनका पॉलिटिकल करियर JDU से शुरू हुआ। 5 साल JDU में रहने के बाद 2018 में RJD में शामिल हुए। मतदान से एक दिन पहले NDA कैम्प में क्या हुआ? जदयू और भाजपा नेताओं के घर पर विधायकों की 5 बैठकें हुईं। वोटिंग से पहले रविवार को महागठबंधन में क्या हुआ? RJD ने अपने विधायकों को पटना के पनाश होटल में शिफ्ट कर दिया है। महागठबंधन की दूसरी पार्टियों के विधायकों को भी इसी होटल में ठहराया गया है। विधायक इसी होटल में रात भर रहेंगे। यहां से सीधे विधानसभा जाएंगे और वोट डालेंगे। तेजस्वी रविवार शाम को AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान की इफ्तार पार्टी में शामिल हुए। इस तरह उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी के 5 विधायकों को साधा है। क्या है राज्यसभा में जीत का समीकरण? राज्यसभा की 5 सीटें खाली हुई हैं। 6 कैंडिडेट हैं। इसके चलते वोटिंग होगी। एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के वोट की जरूरत है। NDA के पास 202 विधायक हैं। इसके 4 प्रत्याशी की जीत तय है। 5वें प्रत्याशी के लिए 3 वोट कम पड़ रहे हैं। 5वीं सीट के लिए NDA और महागठबंधन के बीच मुकाबला है। महागठबंधन के पास 35 वोट हैं। AIMIM और बसपा के विधायकों का साथ मिला तो राजद उम्मीदवार जीत सकते हैं। शिवेश राम और एडी सिंह के बीच पांचवीं सीट के लिए मुकाबला होना है। NDA के चार कैंडिडेट नीतीश कुमार, नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा की जीत तय है। कौन विधायक किस उम्मीदवार को वोट देगा यह तय किया गया है। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के विधायक नितिन नवीन को वोट देकर जिताएंगे। क्या है NDA की रणनीति? 1- महागठबंधन के विधायकों की क्रॉस वोटिंग- ‌‌BJP का पहला प्रयास है कि महागठबंधन के विधायकों की क्रॉस वोटिंग कराई जाए। BJP नेता दावा कर रहे हैं कि महागठबंधन के 3-4 विधायक उनके संपर्क में हैं। 2- महागठबंधन के विधायकों के वोट रद्द कराना- महागठबंधन के विधायकों के वोट रद्द होते हैं तो जीत के लिए जरूरी वोट की संख्या घटेगी। इससे NDA को पांचवीं सीट जीतने में मदद मिलेगी। विधायक के वोट कई तरीके से इनवैलिड हो सकते हैं। जैसे- -अगर विधायक अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट के अलावा किसी और एजेंट को वोट दिखाता है। -अगर विधायक अपनी पार्टी के एजेंट को मतपत्र नहीं दिखाता है। -अगर विधायक मतपत्र पर किसी दूसरे इंक का इस्तेमाल करता है। 3- महागठबंधन के विधायकों को एब्सेंट कराना- NDA की कोशिश इस बात की भी है कि महागठबंधन के विधायक वोटिंग में शामिल न हो। क्या है महागठबंधन की रणनीति? विपक्ष के सभी विधायकों को एकजुट रखना। इसके लिए राजद के विधायकों को रविवार को दिन भर होटल में रखा गया। कांग्रेस ने सभी विधायकों को पहले ही पटना बुला लिया। AIMIM के 5 विधायकों का साथ पाने के लिए तेजस्वी यादव AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान की इफ्तार पार्टी में पहुंचे। साथ खाना खाया। महागठबंधन की ओर से NDA के विधायकों को तोड़ने की कोशिश भी हो रही है। बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए कल वोटिंग होनी है। उससे पहले NDA और महागठबंधन दल के नेता अपने विधायकों को एकजुट करने में जुट गए हैं। महागठबंधन के विधायकों को जहां पटना के होटल में बाड़ेबंदी की गई है तो NDA के विधायकों के साथ लगातार बैठक कर उन्हें एकजुट रखा जा रहा है। इस बीच भास्कर को सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस के दो विधायक आउट ऑफ नेटवर्क हो गए हैं। कांग्रेस के वाल्मीकिनगर के विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा से कांग्रेस नेता लगातार संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। भास्कर ने भी इनके आधिकारिक नंबर पर फोन किया, लेकिन वो लगातार ऑफ आ रहा है। वहीं, फारबिसगंज से विधायक मनोज विश्वास भी लगातार गायब हैं। हालाांकि, सूत्र की मानें तो उनके मान जाने की संभावना है और देर रात तक वे भी होटल पहुंच सकते हैं। लेकिन चुनाव में उनके भी क्रॉस वोटिंग करने की आशंका पार्टी आलाकमान को है। भास्कर ने इनके दो नंबर पर फोन किया, दोनों आउट ऑफ रीच हैं। NDA के तीन विधायक से डील कर रहे महागठबंधन के नेता ऐसी बात नहीं है कि क्रॉस वोटिंग का खतरा केवल महागठबंधन को है। महागठबंधन के नेता भी लगातार NDA के विधायकों के संपर्क में हैं। तीन विधायकों के साथ इनकी डील चल रही है। भास्कर को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इन्हें मोटी रकम का ऑफर दिया जा रहा है। इसके बदले में इन्हें दो विकल्प भी दिया गया है। पहला क्रॉस वोटिंग कर दें। अगर ऐसा नहीं कर पाते हैं तो वोटिंग की प्रक्रिया से दूर हो जाएं। NDA और महागठबंधन की कोशिश 41 के नंबर को कम किया जाए अभी राज्यसभा के एक कैंडिडेट को जीतने के लिए 41 विधायक की जरूरत है। महागठबंधन और NDA की पूरी कोशिश है कि इस संख्या को घटाकर 40 या इससे नीचे किया जाए। ऐसा कराने के लिए कम से कम 6 विधायक को एब्सेंट कराना होगा या इतने ही विधायक के वोट को रद्द कराना होगा। कांग्रेस के गायब 2 विधायकों के बारे में जानिए… सुरेंद्र प्रसादः पहली बार विधायक बने, NDA से लड़ चुके हैं चुनाव पाला बदलने के अटकलों के पीछे तर्कः सुरेंद्र प्रसाद को उपेंद्र कुशवाहा का काफी करीबी नेता माना जाता है। 2015 में सुरेंद्र को टिकट देने के लिए उपेंद्र ने यह सीट भाजपा से ली थी। मनोज विश्वासः JDU- RJD से पुराना नाता, चुनाव से पहले कांग्रेस में आए फारबिसगंज से पहली बार विधायक बने 38 साल के मनोज विश्वास RJD से कांग्रेस में आए हैं। केवट मतलब EBC समाज से आते हैं। पाला बदलने के अटकलों के पीछे तर्कः यह पहले भी पार्टी बदलते रहे हैं। इनका पॉलिटिकल करियर JDU से शुरू हुआ। 5 साल JDU में रहने के बाद 2018 में RJD में शामिल हुए। मतदान से एक दिन पहले NDA कैम्प में क्या हुआ? जदयू और भाजपा नेताओं के घर पर विधायकों की 5 बैठकें हुईं। वोटिंग से पहले रविवार को महागठबंधन में क्या हुआ? RJD ने अपने विधायकों को पटना के पनाश होटल में शिफ्ट कर दिया है। महागठबंधन की दूसरी पार्टियों के विधायकों को भी इसी होटल में ठहराया गया है। विधायक इसी होटल में रात भर रहेंगे। यहां से सीधे विधानसभा जाएंगे और वोट डालेंगे। तेजस्वी रविवार शाम को AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान की इफ्तार पार्टी में शामिल हुए। इस तरह उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी के 5 विधायकों को साधा है। क्या है राज्यसभा में जीत का समीकरण? राज्यसभा की 5 सीटें खाली हुई हैं। 6 कैंडिडेट हैं। इसके चलते वोटिंग होगी। एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के वोट की जरूरत है। NDA के पास 202 विधायक हैं। इसके 4 प्रत्याशी की जीत तय है। 5वें प्रत्याशी के लिए 3 वोट कम पड़ रहे हैं। 5वीं सीट के लिए NDA और महागठबंधन के बीच मुकाबला है। महागठबंधन के पास 35 वोट हैं। AIMIM और बसपा के विधायकों का साथ मिला तो राजद उम्मीदवार जीत सकते हैं। शिवेश राम और एडी सिंह के बीच पांचवीं सीट के लिए मुकाबला होना है। NDA के चार कैंडिडेट नीतीश कुमार, नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा की जीत तय है। कौन विधायक किस उम्मीदवार को वोट देगा यह तय किया गया है। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के विधायक नितिन नवीन को वोट देकर जिताएंगे। क्या है NDA की रणनीति? 1- महागठबंधन के विधायकों की क्रॉस वोटिंग- ‌‌BJP का पहला प्रयास है कि महागठबंधन के विधायकों की क्रॉस वोटिंग कराई जाए। BJP नेता दावा कर रहे हैं कि महागठबंधन के 3-4 विधायक उनके संपर्क में हैं। 2- महागठबंधन के विधायकों के वोट रद्द कराना- महागठबंधन के विधायकों के वोट रद्द होते हैं तो जीत के लिए जरूरी वोट की संख्या घटेगी। इससे NDA को पांचवीं सीट जीतने में मदद मिलेगी। विधायक के वोट कई तरीके से इनवैलिड हो सकते हैं। जैसे- -अगर विधायक अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट के अलावा किसी और एजेंट को वोट दिखाता है। -अगर विधायक अपनी पार्टी के एजेंट को मतपत्र नहीं दिखाता है। -अगर विधायक मतपत्र पर किसी दूसरे इंक का इस्तेमाल करता है। 3- महागठबंधन के विधायकों को एब्सेंट कराना- NDA की कोशिश इस बात की भी है कि महागठबंधन के विधायक वोटिंग में शामिल न हो। क्या है महागठबंधन की रणनीति? विपक्ष के सभी विधायकों को एकजुट रखना। इसके लिए राजद के विधायकों को रविवार को दिन भर होटल में रखा गया। कांग्रेस ने सभी विधायकों को पहले ही पटना बुला लिया। AIMIM के 5 विधायकों का साथ पाने के लिए तेजस्वी यादव AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान की इफ्तार पार्टी में पहुंचे। साथ खाना खाया। महागठबंधन की ओर से NDA के विधायकों को तोड़ने की कोशिश भी हो रही है।  

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राज्यसभा चुनावः कांग्रेस के 2 विधायक आउट ऑफ नेटवर्क:NDA के 3 MLA महागठबंधन के टच में, 5वीं सीट के लिए आधी रात को जोड़-तोड़

राज्यसभा चुनावः कांग्रेस के 2 विधायक आउट ऑफ नेटवर्क:NDA के 3 MLA महागठबंधन के टच में, 5वीं सीट के लिए आधी रात को जोड़-तोड़

बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए कल वोटिंग होनी है। उससे पहले NDA और महागठबंधन दल के नेता अपने विधायकों को एकजुट करने में जुट गए हैं। महागठबंधन के विधायकों को जहां पटना के होटल में बाड़ेबंदी की गई है तो NDA के विधायकों के साथ लगातार बैठक कर उन्हें एकजुट रखा जा रहा है। इस बीच भास्कर को सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस के दो विधायक आउट ऑफ नेटवर्क हो गए हैं। कांग्रेस के वाल्मीकिनगर के विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा से कांग्रेस नेता लगातार संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। भास्कर ने भी इनके आधिकारिक नंबर पर फोन किया, लेकिन वो लगातार ऑफ आ रहा है। वहीं, फारबिसगंज से विधायक मनोज विश्वास भी लगातार गायब हैं। हालाांकि, सूत्र की मानें तो उनके मान जाने की संभावना है और देर रात तक वे भी होटल पहुंच सकते हैं। लेकिन चुनाव में उनके भी क्रॉस वोटिंग करने की आशंका पार्टी आलाकमान को है। भास्कर ने इनके दो नंबर पर फोन किया, दोनों आउट ऑफ रीच हैं। NDA के तीन विधायक से डील कर रहे महागठबंधन के नेता ऐसी बात नहीं है कि क्रॉस वोटिंग का खतरा केवल महागठबंधन को है। महागठबंधन के नेता भी लगातार NDA के विधायकों के संपर्क में हैं। तीन विधायकों के साथ इनकी डील चल रही है। भास्कर को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इन्हें मोटी रकम का ऑफर दिया जा रहा है। इसके बदले में इन्हें दो विकल्प भी दिया गया है। पहला क्रॉस वोटिंग कर दें। अगर ऐसा नहीं कर पाते हैं तो वोटिंग की प्रक्रिया से दूर हो जाएं। NDA और महागठबंधन की कोशिश 41 के नंबर को कम किया जाए अभी राज्यसभा के एक कैंडिडेट को जीतने के लिए 41 विधायक की जरूरत है। महागठबंधन और NDA की पूरी कोशिश है कि इस संख्या को घटाकर 40 या इससे नीचे किया जाए। ऐसा कराने के लिए कम से कम 6 विधायक को एब्सेंट कराना होगा या इतने ही विधायक के वोट को रद्द कराना होगा। कांग्रेस के गायब 2 विधायकों के बारे में जानिए… सुरेंद्र प्रसादः पहली बार विधायक बने, NDA से लड़ चुके हैं चुनाव पाला बदलने के अटकलों के पीछे तर्कः सुरेंद्र प्रसाद को उपेंद्र कुशवाहा का काफी करीबी नेता माना जाता है। 2015 में सुरेंद्र को टिकट देने के लिए उपेंद्र ने यह सीट भाजपा से ली थी। मनोज विश्वासः JDU- RJD से पुराना नाता, चुनाव से पहले कांग्रेस में आए फारबिसगंज से पहली बार विधायक बने 38 साल के मनोज विश्वास RJD से कांग्रेस में आए हैं। केवट मतलब EBC समाज से आते हैं। पाला बदलने के अटकलों के पीछे तर्कः यह पहले भी पार्टी बदलते रहे हैं। इनका पॉलिटिकल करियर JDU से शुरू हुआ। 5 साल JDU में रहने के बाद 2018 में RJD में शामिल हुए। मतदान से एक दिन पहले NDA कैम्प में क्या हुआ? जदयू और भाजपा नेताओं के घर पर विधायकों की 5 बैठकें हुईं। वोटिंग से पहले रविवार को महागठबंधन में क्या हुआ? RJD ने अपने विधायकों को पटना के पनाश होटल में शिफ्ट कर दिया है। महागठबंधन की दूसरी पार्टियों के विधायकों को भी इसी होटल में ठहराया गया है। विधायक इसी होटल में रात भर रहेंगे। यहां से सीधे विधानसभा जाएंगे और वोट डालेंगे। तेजस्वी रविवार शाम को AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान की इफ्तार पार्टी में शामिल हुए। इस तरह उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी के 5 विधायकों को साधा है। क्या है राज्यसभा में जीत का समीकरण? राज्यसभा की 5 सीटें खाली हुई हैं। 6 कैंडिडेट हैं। इसके चलते वोटिंग होगी। एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के वोट की जरूरत है। NDA के पास 202 विधायक हैं। इसके 4 प्रत्याशी की जीत तय है। 5वें प्रत्याशी के लिए 3 वोट कम पड़ रहे हैं। 5वीं सीट के लिए NDA और महागठबंधन के बीच मुकाबला है। महागठबंधन के पास 35 वोट हैं। AIMIM और बसपा के विधायकों का साथ मिला तो राजद उम्मीदवार जीत सकते हैं। शिवेश राम और एडी सिंह के बीच पांचवीं सीट के लिए मुकाबला होना है। NDA के चार कैंडिडेट नीतीश कुमार, नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा की जीत तय है। कौन विधायक किस उम्मीदवार को वोट देगा यह तय किया गया है। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के विधायक नितिन नवीन को वोट देकर जिताएंगे। क्या है NDA की रणनीति? 1- महागठबंधन के विधायकों की क्रॉस वोटिंग- ‌‌BJP का पहला प्रयास है कि महागठबंधन के विधायकों की क्रॉस वोटिंग कराई जाए। BJP नेता दावा कर रहे हैं कि महागठबंधन के 3-4 विधायक उनके संपर्क में हैं। 2- महागठबंधन के विधायकों के वोट रद्द कराना- महागठबंधन के विधायकों के वोट रद्द होते हैं तो जीत के लिए जरूरी वोट की संख्या घटेगी। इससे NDA को पांचवीं सीट जीतने में मदद मिलेगी। विधायक के वोट कई तरीके से इनवैलिड हो सकते हैं। जैसे- -अगर विधायक अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट के अलावा किसी और एजेंट को वोट दिखाता है। -अगर विधायक अपनी पार्टी के एजेंट को मतपत्र नहीं दिखाता है। -अगर विधायक मतपत्र पर किसी दूसरे इंक का इस्तेमाल करता है। 3- महागठबंधन के विधायकों को एब्सेंट कराना- NDA की कोशिश इस बात की भी है कि महागठबंधन के विधायक वोटिंग में शामिल न हो। क्या है महागठबंधन की रणनीति? विपक्ष के सभी विधायकों को एकजुट रखना। इसके लिए राजद के विधायकों को रविवार को दिन भर होटल में रखा गया। कांग्रेस ने सभी विधायकों को पहले ही पटना बुला लिया। AIMIM के 5 विधायकों का साथ पाने के लिए तेजस्वी यादव AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान की इफ्तार पार्टी में पहुंचे। साथ खाना खाया। महागठबंधन की ओर से NDA के विधायकों को तोड़ने की कोशिश भी हो रही है। बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए कल वोटिंग होनी है। उससे पहले NDA और महागठबंधन दल के नेता अपने विधायकों को एकजुट करने में जुट गए हैं। महागठबंधन के विधायकों को जहां पटना के होटल में बाड़ेबंदी की गई है तो NDA के विधायकों के साथ लगातार बैठक कर उन्हें एकजुट रखा जा रहा है। इस बीच भास्कर को सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस के दो विधायक आउट ऑफ नेटवर्क हो गए हैं। कांग्रेस के वाल्मीकिनगर के विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा से कांग्रेस नेता लगातार संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। भास्कर ने भी इनके आधिकारिक नंबर पर फोन किया, लेकिन वो लगातार ऑफ आ रहा है। वहीं, फारबिसगंज से विधायक मनोज विश्वास भी लगातार गायब हैं। हालाांकि, सूत्र की मानें तो उनके मान जाने की संभावना है और देर रात तक वे भी होटल पहुंच सकते हैं। लेकिन चुनाव में उनके भी क्रॉस वोटिंग करने की आशंका पार्टी आलाकमान को है। भास्कर ने इनके दो नंबर पर फोन किया, दोनों आउट ऑफ रीच हैं। NDA के तीन विधायक से डील कर रहे महागठबंधन के नेता ऐसी बात नहीं है कि क्रॉस वोटिंग का खतरा केवल महागठबंधन को है। महागठबंधन के नेता भी लगातार NDA के विधायकों के संपर्क में हैं। तीन विधायकों के साथ इनकी डील चल रही है। भास्कर को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इन्हें मोटी रकम का ऑफर दिया जा रहा है। इसके बदले में इन्हें दो विकल्प भी दिया गया है। पहला क्रॉस वोटिंग कर दें। अगर ऐसा नहीं कर पाते हैं तो वोटिंग की प्रक्रिया से दूर हो जाएं। NDA और महागठबंधन की कोशिश 41 के नंबर को कम किया जाए अभी राज्यसभा के एक कैंडिडेट को जीतने के लिए 41 विधायक की जरूरत है। महागठबंधन और NDA की पूरी कोशिश है कि इस संख्या को घटाकर 40 या इससे नीचे किया जाए। ऐसा कराने के लिए कम से कम 6 विधायक को एब्सेंट कराना होगा या इतने ही विधायक के वोट को रद्द कराना होगा। कांग्रेस के गायब 2 विधायकों के बारे में जानिए… सुरेंद्र प्रसादः पहली बार विधायक बने, NDA से लड़ चुके हैं चुनाव पाला बदलने के अटकलों के पीछे तर्कः सुरेंद्र प्रसाद को उपेंद्र कुशवाहा का काफी करीबी नेता माना जाता है। 2015 में सुरेंद्र को टिकट देने के लिए उपेंद्र ने यह सीट भाजपा से ली थी। मनोज विश्वासः JDU- RJD से पुराना नाता, चुनाव से पहले कांग्रेस में आए फारबिसगंज से पहली बार विधायक बने 38 साल के मनोज विश्वास RJD से कांग्रेस में आए हैं। केवट मतलब EBC समाज से आते हैं। पाला बदलने के अटकलों के पीछे तर्कः यह पहले भी पार्टी बदलते रहे हैं। इनका पॉलिटिकल करियर JDU से शुरू हुआ। 5 साल JDU में रहने के बाद 2018 में RJD में शामिल हुए। मतदान से एक दिन पहले NDA कैम्प में क्या हुआ? जदयू और भाजपा नेताओं के घर पर विधायकों की 5 बैठकें हुईं। वोटिंग से पहले रविवार को महागठबंधन में क्या हुआ? RJD ने अपने विधायकों को पटना के पनाश होटल में शिफ्ट कर दिया है। महागठबंधन की दूसरी पार्टियों के विधायकों को भी इसी होटल में ठहराया गया है। विधायक इसी होटल में रात भर रहेंगे। यहां से सीधे विधानसभा जाएंगे और वोट डालेंगे। तेजस्वी रविवार शाम को AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान की इफ्तार पार्टी में शामिल हुए। इस तरह उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी के 5 विधायकों को साधा है। क्या है राज्यसभा में जीत का समीकरण? राज्यसभा की 5 सीटें खाली हुई हैं। 6 कैंडिडेट हैं। इसके चलते वोटिंग होगी। एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के वोट की जरूरत है। NDA के पास 202 विधायक हैं। इसके 4 प्रत्याशी की जीत तय है। 5वें प्रत्याशी के लिए 3 वोट कम पड़ रहे हैं। 5वीं सीट के लिए NDA और महागठबंधन के बीच मुकाबला है। महागठबंधन के पास 35 वोट हैं। AIMIM और बसपा के विधायकों का साथ मिला तो राजद उम्मीदवार जीत सकते हैं। शिवेश राम और एडी सिंह के बीच पांचवीं सीट के लिए मुकाबला होना है। NDA के चार कैंडिडेट नीतीश कुमार, नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा की जीत तय है। कौन विधायक किस उम्मीदवार को वोट देगा यह तय किया गया है। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के विधायक नितिन नवीन को वोट देकर जिताएंगे। क्या है NDA की रणनीति? 1- महागठबंधन के विधायकों की क्रॉस वोटिंग- ‌‌BJP का पहला प्रयास है कि महागठबंधन के विधायकों की क्रॉस वोटिंग कराई जाए। BJP नेता दावा कर रहे हैं कि महागठबंधन के 3-4 विधायक उनके संपर्क में हैं। 2- महागठबंधन के विधायकों के वोट रद्द कराना- महागठबंधन के विधायकों के वोट रद्द होते हैं तो जीत के लिए जरूरी वोट की संख्या घटेगी। इससे NDA को पांचवीं सीट जीतने में मदद मिलेगी। विधायक के वोट कई तरीके से इनवैलिड हो सकते हैं। जैसे- -अगर विधायक अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट के अलावा किसी और एजेंट को वोट दिखाता है। -अगर विधायक अपनी पार्टी के एजेंट को मतपत्र नहीं दिखाता है। -अगर विधायक मतपत्र पर किसी दूसरे इंक का इस्तेमाल करता है। 3- महागठबंधन के विधायकों को एब्सेंट कराना- NDA की कोशिश इस बात की भी है कि महागठबंधन के विधायक वोटिंग में शामिल न हो। क्या है महागठबंधन की रणनीति? विपक्ष के सभी विधायकों को एकजुट रखना। इसके लिए राजद के विधायकों को रविवार को दिन भर होटल में रखा गया। कांग्रेस ने सभी विधायकों को पहले ही पटना बुला लिया। AIMIM के 5 विधायकों का साथ पाने के लिए तेजस्वी यादव AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान की इफ्तार पार्टी में पहुंचे। साथ खाना खाया। महागठबंधन की ओर से NDA के विधायकों को तोड़ने की कोशिश भी हो रही है।  

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