चुंदड़ी गणगौर की सवारी से गूंजा राजसमंद, भक्ति और रंगों में डूबा शहर

चुंदड़ी गणगौर की सवारी से गूंजा राजसमंद, भक्ति और रंगों में डूबा शहर

राजसमंद. राजसमंद में नगर परिषद के तत्वावधान में चल रहे गणगौर महोत्सव के तीसरे दिन आज “चुंदड़ीगणगौर” का भव्य आयोजन हुआ। जैसे ही पारंपरिक सवारी निकली, पूरा शहर उत्सव और भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। पुष्टि मार्ग की तृतीय पीठ प्रभु श्री द्वारकाधीश मंदिर से सवारी धूमधाम से रवाना हुई। ईसरजी और गणगौर माता को आकर्षक चुंदड़ी वस्त्रों से सजाया गया, वहीं प्रभु द्वारकाधीश की छवि भी मनमोहक रूप में सजी दिखी।

संगीत और नृत्य का संगम

बैंड की मधुर धुनों पर बालिकाओं ने भक्ति नृत्य प्रस्तुत किया। हनुमान जी की झांकी के साथ “जयकारों” से पूरा शहर गूंज उठा। सवारी में घुड़सवार निशान लिए हुए आगे बढ़े, वहीं फौज पलटन आकर्षक वेशभूषा में नजर आई। कच्छी घोड़ी कलाकारों ने अपने नृत्य और करतब से सभी को रोमांचित कर दिया।

देशभर के कलाकारों का जलवा

राज्य और देश के विभिन्न हिस्सों से आए लोक कलाकारों ने रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। शिव बारात की झांकी ने विशेष आकर्षण बटोरा। सवारी के मार्ग में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। देवी-देवताओं की आकर्षक झांकियों ने सभी का मन मोह लिया। पूरे आयोजन के दौरान राजसमंद का माहौल पूरी तरह भक्तिमय और उत्सवी बना रहा।

नाथद्वारा. नगर में गणगौर का पर्व मेवाड़ की लोक आस्था और परंपरा के अनुरूप मनाया गया। महिलाओं और युवतियों ने विधि-विधान से माता गौरी एवं भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की खुशहाली की कामना की। शहर के विभिन्न मोहल्लों और घरों में सुबह से ही उत्सव का माहौल रहा। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर सिर पर कलश और हाथों में पूजा की थाली लेकर गणगौर माता की आराधना की। इस दौरान लोकगीतों की मधुर स्वर लहरियों से वातावरण भक्तिमय हो गया। कई स्थानों पर महिलाओं ने समूह बनाकर पारंपरिक गीत गाए और नृत्य भी किया। घरों के आंगन और मंदिरों में गणगौर की प्रतिमाएं स्थापित कर विशेष सजावट की गई। रंगोली और फूलों से सजे पूजा स्थलों पर महिलाओं ने जल, फल, मिठाई व सुहाग सामग्री अर्पित कर परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना की।

कुंवारिया. क्षेत्र में शनिवार को गणगौर उत्साह से मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने घरों में इशर व गणगौर माता की प्रतिमाओं की विशेष पूजा अर्चना की। गणगौर से जुडी कहानियों को सुना। धर्म परायण महिलाओं के द्वारा मिट्टी से आकर्षक गणगौर माता व इशर की प्रतिमाए बनाई। उनको नए वस्त्र व आभूषण भी धराए गए।

पीपली आचार्यान. क्षेत्र में महिलाओं ने शनिवार को गणगौर की पूजा अर्चना कर गीत गाए। सुबह ब्रह्म मुर्हुत में महिलाओं ने शिव मंदिर पहुंचकर गणगौर और ईशर का श्रंगार किया। इस दौरान कथा सुनी। महिलाओं ने गणगौर का उद्यापन भी किया।

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