राजेश कुमार पांडे ने उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक का पदभार ग्रहण कर लिया है। भारतीय रेलवे सिग्नल इंजीनियरिंग सेवा (आईआरएसएसई) के 1989 बैच के वरिष्ठ अधिकारी पांडे के पास रेलवे संचालन, सिग्नलिंग और सुरक्षा में तीन दशक से अधिक का अनुभव है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के मूल निवासी पांडे ने मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स में बी.ई. और आईआईटी दिल्ली से एम.टेक की डिग्री हासिल की है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बरौनी में सहायक सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर के रूप में की थी। सेवाकाल के दौरान, उन्होंने आरडीएसओ में निरीक्षण निदेशक के रूप में गुणवत्ता मानकों को मजबूत किया। उन्होंने पूर्व मध्य रेलवे के समस्तीपुर मंडल में अपर मंडल रेल प्रबंधक और पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल में डीआरएम के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। पश्चिम रेलवे में रहते हुए, उन्होंने मुंबई उपनगरीय खंड में ‘एक्सल काउंटर’ प्रणाली स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे मानसून के दौरान रेल सेवाएं सुचारु रहीं। पांडे को बुनियादी ढांचा और सुरक्षा परियोजनाओं में उनके प्रभावी नेतृत्व के लिए जाना जाता है। डीआरएम के रूप में, उन्होंने ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के कार्यों को गति दी। उन्होंने देश की स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ के विकास और कार्यान्वयन में भी प्रमुख भूमिका निभाई है। रेलवे बोर्ड में अपर सदस्य (सिग्नल) रहते हुए, उन्होंने 400 किलोमीटर रेलखंड पर ‘कवच’ प्रणाली की सफल स्थापना की निगरानी की। महाप्रबंधक का पद संभालते ही पांडे ने उत्तर रेलवे के आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए समयपालन, बुनियादी ढांचे के तेज विकास, बेहतर ग्राहक अनुभव और कर्मचारी कल्याण पर विशेष जोर दिया। उनका मार्गदर्शक आदर्श वाक्य है: “राष्ट्र प्रथम, ग्राहक प्रथम, सर्वथा प्रथम।” रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों ने नए महाप्रबंधक का स्वागत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि पांडे के नेतृत्व में उत्तर रेलवे नई ऊंचाइयों को छुएगा।


